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भारत वासियों के लिए भी खतरे की घंटी है, Facebook डाटा चोरी मामला
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भारत वासियों के लिए भी खतरे की घंटी है, Facebook डाटा चोरी मामला

facebook data leak indians are also get effected

facebook data leak indians are also get effected

दुनियाभर में सबसे ज्यादा लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफोर्म फेसबुक इन दिनों विवादों में घिरा हुआ है, बता दें कि फेसबुक का डाटालीक मामला अब प्रकाश में आ चुका है जिसकी वजह से कम्पनी को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. फेसबुक से डेटा चुराने को लेकर कैंब्रिज एनालिटिका सुर्खियों में हैं. भारत की दो बड़ी राजनीतिक पार्टियां इस मामले में एक-दूसरे पर हमलावर हैं. कैंब्रिज एनालिटिका के शिकार भारतीय भी हो सकते हैं और इसके संकेत बीजेपी-कांग्रेस द्वारा एक दूसरे पर लगाए जा रहे आरोपों से मिल रहे हैं.

मौजूदा दौर में डेटा सबसे कीमती चीज है. भारत में टेलीकॉम सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी जियो की लॉन्चिंग के मौके पर मुकेश अंबानी ने कहा था कि डाटा इज द न्यू ऑयल… अब आप इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं डेटा कितना महत्वपूर्ण हैं. बता दें कि भारत में फेसबुक के 20 करोड़ यूजर हैं यानी हर छठा भारतीय फेसबुक यूज करता है. अमेरिका के बाद भारत में फेसबुक यूजर सबसे ज्यादा हैं.

क्या होगा अगर हम आपको बताएं कि फेसबुक और आपके बीच कोई तीसरा है, जो फेसबुक पर आपकी गतिविधियों पर नजर रख रहा है और इसके जरिए आपका कैरेक्टर प्रोफाइल बना सकता है.

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के लेक्चरर अलेक्जेंदर कोगन ने कैंब्रिज एनालिटिका के साथ मिलकर एक ऐप बनाया था, जिसको नाम दिया गया दिस इज योर डिजिटल लाइफ. इस ऐप के लिए उन्होंने अपनी फर्म ग्लोबल साइंस रिसर्च और कैंब्रिज एनालिटिका के साथ मिलकर एक पर्सनैलिटी क्विज बनाया, ताकि हजारों लोगों से उनकी पसंद के बारे में जानकारी जुटाई जा सके. इन यूजर्स को पेड किया गया और उनसे कहा गया कि इस डेटा का उपयोग एकेडमिक्स के लिए किया जाएगा. यहीं से चीजें संदिग्ध लगने लगीं.

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इस ऐप ने इन वॉलंटियर्स के फ्रेंड्स के बारे में भी जानकारी जुटाई, फेसबुक के मुताबिक इसका उपयोग ऐप एक्सपीरियंस को बढ़ाना था, न कि बेचे जाने और विज्ञापन के लिए था. फेसबुक ने माना है कि कम से 2 लाख 70 हजार लोगों ने इस ऐप को डाउनलोड किया था और अपनी निजी जानकारी साझा की थी.

लाखों अमेरिकियों से जुटाया गया यह डेटा पहले वालंटियर ग्रुप के दोस्तों का था. मामले में व्हिसलब्लोअर के मुताबिक इस डेटा का उपयोग 2014 के चुनाव में एक-एक अमेरिकी वोटर की प्रोफाइल बनाने के लिए की गई. इसका मकसद इन सभी लोगों को राजनीतिक विज्ञापनों के जरिए टारगेट करना था.

कैंब्रिज एनालिटिका के पूर्व रिसर्च डायरेक्टर क्रिस विलिस ने बताया कि इन सभी जानकारियों को जुटाने के लिए उन्होंने क्या किया.

कैंब्रिज एनालिटिका ने कैसे जुटाई जानकारी

व्हिसलब्लोअर ने ब्रिटिश अखबार ऑब्जर्वर को बताया, ‘हमने फेसबुक यूजर्स की प्रोफाइल में सेंध लगाई और इसके जरिए एक मॉडल बनाया कि हम उनके बारे में क्या जानते हैं. इसी आधार पर पूरी कंपनी खड़ी की गई.’

इसके बाद कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक के करोड़ों यूजर्स की प्रोफाइल से डाटा चुराया ताकि चुनावों में उन्हें राजनीतिक रूप से टारगेट किया जा सके.

क्यों आपको चिंतित होना चाहिए

कैंब्रिज एनालिटिका के फेसबुक प्रोफाइल से डेटा चुराने के मामले से स्पष्ट हो गया है कि कोई भी कंपनी (सिर्फ कैंब्रिज एनालिटिका ही नहीं) आपको टारगेट कर सकती है. और यह कोई हल्की बात नहीं है. ये एक बहुत गंभीर चिंता की बात है.

बता दें कि सोशल मीडिया साइट्स फेसबुक और कैंब्रिज एनालिटिका जैसी कंपनियां एल्गोरिदम का उपयोग करती हैं, जो आपके लाइक्स पर आधारित हैं.

इस लाइक्स के आधार पर बनाए गए सिस्टम से वे आपके यौन रूझान, पसंद-नापसंद, रिलेशनशिप स्टेटस, राजनीतिक रूझान, ड्रग्स की लत और तमाम तरीके की जानकारियां जुटा सकती हैं.

कैंब्रिज एनालिटिका जैसी कंपनियां इनके आधार पर आपकी पूरी प्रोफाइल बना सकती हैं, सिर्फ इसके जरिए कि आप फेसबुक पर क्या लाइक करते हैं. आपको कुछ लिखने की जरूरत नहीं, ना ही फोटो पोस्ट करने की और या कोई स्टेटमेंट देने की.

बीजेपी नेता और केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को आरोप लगाया कि कैंब्रिज एनालिटिका के कांग्रेस पार्टी के साथ संबंध हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सोशल मीडिया प्रोफाइल में कैंब्रिज एनालिटिका की क्या भूमिका है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 2019 के चुनाव अभियान के लिए कैंब्रिज एनालिटिका की सेवा ली है. मीडिया के एक वर्ग द्वारा इसे ब्रह्मास्त्र कहा जा रहा है.

बीजेपी और रविशंकर प्रसाद पर कांग्रेस का पलटवार

केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा सोशल साइटों से डेटा निकालने वाली कंपनी कैम्ब्रिज एनेलिटिका का संबंध कांग्रेस से जोड़ने पर पलटवार करते हुए विपक्षी दल ने कहा कि यह भगवा दल था जिसने बिहार एवं गुजरात चुनावों में इस विवादास्पद फर्म की सेवाएं ली थीं.

कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने यह दावा किया है कि उनकी पार्टी और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी ने लंदन स्थित इस कंपनी की सेवाएं कभी नहीं लीं. कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रसाद की यह टिप्पणी तथ्यों को तोड़ने मरोड़ने और अन्य मुद्दों से देश का ध्यान बंटाने का एक अन्य प्रयास है.

उन्होंने दावा किया कि कंपनी की वेबसाइट में यह कहा गया है कि यह एक अध्ययन एवं संचार अभियान चलाती है और 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव के लिए गहन चुनाव विश्लेषण करने के लिए उसके साथ अनुबंध किया गया था. सुरजेवाला ने कहा कि कैम्ब्रिज एनालिटिका एवं अन्य भारतीय फर्म ओबीआई, जिसे एक राजग नेता का पुत्र चलाता है, एक दूसरे के व्यवसाय की प्रतिपूर्ति करते हैं.

 

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