Now Reading:
धर्म-जाति-राजनीति के अखाड़े में सीतामढ़ी
Full Article 7 minutes read

धर्म-जाति-राजनीति के अखाड़े में सीतामढ़ी

seetamadhi

सूरी समाज को अति पिछड़ा वर्ग में बिहार सरकार शामिल करे. उन्होंने कहा कि दोनों प्रस्ताव एक प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से राज्य सरकार को भेजा जायेगा. वही सम्मेलन के समापन के क्रम में एक स्वजातीय वक्ता ने कार्यक्रम आयोजकों पर निशाना साधने से परहेज नही किया. खुद को सम्मेलन में उपेक्षित बताते हुए यहां तक कह दिया कि अगली बार से वे किसी भी स्वजातीय आयोजनों में भागीदारी नही देंगे. हालांकि सम्मेलन के संयोजक नवल किशोर ने कार्यक्रम की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि आयोजन का मकसद सफल रहा.

seetamadhi2019 लोकसभा चुनाव को ले कर राजनैतिक उथल-पुथल व समर्थन-विरोध का माहौल तैयार होना शुरू हो गया है. दलगत आधार पर संभावित प्रत्याशियों का क्षेत्र भ्रमण से लेेकर नेताओं के दरबार में हाजिरी भी शुरू हो गयी है. कहीं जातीय एकजुटता पर बल दिया जा रहा है, तो कहीं धर्म के बहाने पत्ते चले जा रहे है. इस बीच कुछ ऐसे चेहरे भी मतदाताओं के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में व्यस्त है, जो वक्त आने पर चुनावी समर में ताल ठोंकने को तैयार है. चुनावी चर्चाओं पर यकीन करे तो 2019 के लोेकसभा चुनाव में सीतामढ़ी सीट पर पुन: जदयू की दावेदारी का माहौल बनाया जाने लगा है. कारण कि इस सीट पर पूर्व में जदयू का कब्जा रहा है. इस बात की चर्चा भी है कि अगर गठबंधन के तहत सीतामढ़ी सीट जदयू के पाले में आयी तो अबकी बार किस बिरादरी के प्रत्याशी को मौका मिलेेगा? वैसे अबकी बार सीतामढ़ी में लोेकसभा के चुनावी समर में राजद व जदयू के बीच ही फाईनल चुनावी संग्राम की संभावना दिख रही है. वही वर्तमान चुनावी माहौल मोदी लहर को किनारा करता दिख रहा है. जमीनी राजनीतिक माहौल मजबूत कर पाने में भाजपा विफल साबित हो रही है. वही महागठबंधन में उत्साह चरम पर दिख रहा है.

राम नहीं सीता के नाम पर राजनीति

पिछले साल भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट किया था कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद सीतामढ़ी में बनेगा मां सीता का भव्य मंदिर. 22 जनवरी 2018 को विराट हिन्दुस्तान संगम के बिहार प्रांत के अध्यक्ष प्रो. डा. देवेंद्र प्रसाद सिंह ने जानकी जन्म स्थली पुनौरा धाम में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष की योजनाओं से अवगत कराया था. 15 अक्टूबर 2017 को पटना में भारतीय नृत्यकला मंदिर में डा. स्वामी द्वारा जानकी जन्म कुंड पुनौरा धाम में एक भव्य जानकी मंदिर निर्माण की घोषणा की थी. प्रस्तावित मंदिर के नक्शा को भी सार्वजनिक किया गया. परंतु उक्त घोषणा के 6 माह बाद तक जमीनी कार्य कुछ भी नहीं हुआ. नतीजतन इस घोषणा को लोेग चुनावी नजरिया से देखने लगे है.

हाल ही में यूपी के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा के एक बयान ने तूफान खड़ा कर दिया है. सीतामढ़ी सीजेएम सरोज कुमारी के न्यायालय में अधिवक्ता ठाकुर चंदन कुमार सिंह ने एक परिवाद पत्र दायर कर दिया, जिसमें कहा है कि दिनेश शर्मा ने सार्वजनिक रूप से मां जानकी के बारे में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. चुनावी मसलों पर चर्चा के दौरान आम लोेग इन तमाम बातों पर गंभीर होने लगे है. अधिकांश लोेगों का कहना है कि चाहे किसी भी दल का कोई नेता हो, उनके किसी भी बयान अथवा घोषणा को तरजीह नहीं दी जा सकती है. यहां के लोग सीता के नाम पर राजनीति करने वालों को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है. वक्त आने पर उचित जवाब की तैयारी में है. लोेगों का कहना है कि अब धर्म के नाम पर राजनीति से नेताओं को परहेज करना होगा और जमीनी समस्या के समाधान के लिए काम करना होगा.

राजनीतिक निशानेबाजी का मैदान बना सूरी सम्मेलन

पिछले दिनों सीतामढ़ी में आगामी चुनाव को ले कर सूरी समाज के तत्वाधान में जातीय सम्मेलन का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में जिलेे के दो कद्दावर स्वजातीय नेताओं ने सम्मेलन के मूल मकसद को किनारा करते हुए दलगत मुहर लगा दी. यह अलग बात रही कि दोनों में से किसी ने भी एक दूसरे का नाम तो नहीं लिया, मगर राजनीतिक निशानेबाजी से परहेज नही रखा. कार्यक्रम के संयोजक नवल किशोर की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन के शुरुआती पल में ही कुछ ऐसी आपसी बातें हो गयी कि मौजूद समाज के लोेग आपस में ही उलझने लगे. परंतु आयोजकों की सजगता के कारण चंद पलों में मामले को शांत करा लिया गया.

मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सह प्रदेश राजद अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे ने माईक संभाली और अपने सधे अंदाज में सम्मेलन में उपस्थित हजारों लोेगों को अपनी ओर मुखातिब कर लिया. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर के सानिध्य में राजनीति शुरू किया और उन्हीं के आर्शीवाद का नतीजा है कि आज राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के स्नेह से इस मुकाम पर है. साथ ही अपनी धर्मपत्नी रंजना पूर्वे को समाजसेवा के प्रति समर्पित होने की बात कहते हुए अघोषित तौर पर जातिय सम्मेलन में यह भी बात रख ही दिया कि अब चुनावी समर में वह आ सकती है. हालांकि मंचासीन सभी दल से जुड़े नेताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि एक मंच पर मौजूदगी सामाजिक जागरूकता का परिचायक है. डॉ पूर्वे ने आपसी विवादों का निपटारा सामाजिक स्तर पर करने और सेवाभाव को जागृत रखने की नसीहत लोेगों को दी. वही जदयू की आरती प्रधान ने नेताओं पर चाटुकारिता की बदौलत वोट लेकर पद पर आने और जरूरत पड़ने पर ठेंगा दिखाये जाने की बात कही.

उन्होंने समाज के लोेगों से एकता के साथ अधिकार के लिए संघर्ष की अपील की. सूरी समाज को राजनैतिक हिस्सेदारी और अतिपिछड़ा वर्ग में शामिल कराने को लेकर आयोजित सम्मेलन में भाजपा नेता बैद्यनाथ प्रसाद ने अंतिम समय में मंच संभाला. उन्होंने सधे अंदाज में मुख्य अतिथि डॉ पूर्वे को निशाने पर लिया. बगैर किसी का नाम लिये उन्होंने कहा कि आलोेचना से विचलित नहीं होना चाहिए, अन्यथा खामियां बाहर नही आती. समाज को संगठित करने के लिए स्वयं से बाहर होना होगा. राजनीति व्यक्ति के लिए नही सामाजिक उत्थान के लिए होना चाहिए. समाज के लोेगों से जनसंख्या के आधार पर चुनावों में टिकट नहीं मिलने पर वोट का बहिष्कार के लिए भी तैयार रहने की अपील की.

पूर्व विधान पार्षद ने सम्मेलन में दो प्रस्तावों पर चर्चा की. पहला यह कि सीतामढ़ी-शिवहर जिलेे में सूरि समाज का वोट उसी राजनीतिक दल के पक्ष में जायेगा, जो सूरी समाज की वाजिब राजनीतिक हिस्सेदारी निश्चित करेगी. दूसरा सूरी समाज को अति पिछड़ा वर्ग में बिहार सरकार शामिल करे. उन्होंने कहा कि दोनों प्रस्ताव एक प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से राज्य सरकार को भेजा जायेगा. वही सम्मेलन के समापन के क्रम में एक स्वजातीय वक्ता ने कार्यक्रम आयोजकों पर निशाना साधने से परहेज नही किया. खुद को सम्मेलन में उपेक्षित बताते हुए यहां तक कह दिया कि अगली बार से वे किसी भी स्वजातीय आयोजनों में भागीदारी नही देंगे. हालांकि सम्मेलन के संयोजक नवल किशोर ने कार्यक्रम की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि आयोजन का मकसद सफल रहा. समाज के लोेगों को अपनी बात रखने का मौका मिला. हर कोई एक दूसरे की भावना को समझा और भविष्य के लिए बेहतर सुझाव भी रखा.

सूरी समाज में किसी भी प्रकार के आपसी द्वेष की संभावनाओं को एक सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि जहां समाज के सजग लोेग एक साथ होंगे, वहां हर कोई अपनी बात अपने हिसाब से रखेंगे. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सूरी समाज की एकता सूबे की राजनीति में अहम भूमिका निभायेगी. नवल किशोर राउत के संचालन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विधान पार्षद सुमन महासेठ, मधुबनी के प्रहलाद पूर्वे, रोसड़ा के रामेश्वर महतो, वैशाली के अशोक कुमार गुप्ता, मुजफ्फरपुर से केदार प्रसाद, रेखा गुप्ता, रत्नेश्वर प्रसाद, डा वरुण कुमार, डा रघुनाथ प्रसाद, धु्रव किशोर महतो, रमेश कुमार व पूर्व प्रमुख संजय महतो समेत अन्य ने अपना विचार व्यक्त किया.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Input your search keywords and press Enter.