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खत्म नहीं हो रहा नक्सलियों का खौ़फ
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naxalismकेंद्रीय सुरक्षा बलों तथा राज्य पुलिस के लाख प्रयासों के बाद भी झारखंड की सीमा से लगे बिहार के गया जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सलियों का खौफ कम नहीं हो पा रहा है. प्रतिबंधित नक्सली संगठन जब-जब मगध, बिहार, झारखंड में बंद का आह्‌वान करते हैं, तब-तब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बाजारें बंद हो जाती हैं. वाहन चलने बंद हो जाते हैं, जिससे यातायात पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है. लोग भी घरों से निकलना मुनासिब नहीं समझते हैं. हाल के दिनों में प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी ने सरकार विरोधी मांगों को लेकर एक पखवारे में दो-दो बार बंद का आह्‌वान किया.

मगध के शहरी क्षेत्रों में तो इसका कोई असर नहीं देखने को मिला, लेकिन झारखंड की सीमा से लगे गया जिले के इमामगंज विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ शेरघाटी और जीटी रोड पर भी नक्सलियों के बंद से प्रभाव पड़ा. जबकि इन्हीं क्षेत्रों में सुरक्षा बलो की बड़ी संख्या लगी हुई है. इसके बाद भी इन क्षेत्रों में नक्सलियों का खौफ लोगों के मन से नहीं निकल पा रहा है. हालांकि इस दौरान नक्सली कोई भी बड़ी या छोटी घटना को अंजाम नहीं दे सके. सुरक्षा बलों की सक्रियता ने नक्सलियों के मंसूबे पर पानी फेर दिया. बावजूद इसके, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बंद की घोषणा के बाद लोग घरों से नहीं निकलते हैं.

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन व स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से कई कल्याणकारी योजनाएं भी चला रही है, जिससे काफी संख्या में युवकों को भटकने से रोका गया है. इस दौरान पुलिस व केंद्रीय सुरक्षा बलों ने दर्जनों नक्सलियों को गिरफ्तार करने तथा नक्सलियों के द्वारा बड़ी घटना को अंजाम देने से रोकने में भी सफलता हासिल की है. लेकिन लोगों के मन में नक्सलियों का खौफ बरकरार है. गत 19-20 जुलाई 2018 तथा 1-3 अगस्त 2018 को प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी की तरफ से बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी ने दोनों राज्यों में बंद का ऐलान किया था.

नक्सलियों ने इस दौरान अपने प्रभाव वाले इलाकों में विरोध- प्रदर्शन करने की भी घोषणा की थी. नक्सलियों से निबटने के लिए सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन और एसएसबी की तैनाती प्रभावित क्षेत्रों में की गई थी. नक्सली किसी छोटी या बड़ी घटना को अंजाम देने में सफल नहीं हो सके, लेकिन बिहार के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों गया, औरंगाबाद जमुई और लखीसराय के नक्सल की आधार भूमि में बंद का व्यापक असर पड़ा. स्कूल-कॉलेजों के साथ-साथ सरकारी कार्यालयों और बैंको की शाखएं भी बंद रहीं. बंद से पूर्व गया जिले के इमामगंज में भाकपा माओवादी की तरफ से पोस्टर चिपकाकर आपरेशन ग्रीन हंट व पुलिस जुल्म के खिलाफ बंद का समर्थन करने का आह्‌वान किया गा था. बंद को नजरअंंदाज करने वालों के लिए पोस्टर में कहा गया था कि ऐसे लोगों के खिलाफ फौजी कार्रवाई की जाएगी.

हालांकि पिछले आठ-दस महीने में सुरक्षाबलोें ने नक्सलियों के कई खतरनाक मंसूबों को नाकाम करने में सफलता पाई है. स्वतंत्रता दिवस के पूर्व, 13 अगस्त 2018 को एसएसबी और स्थानीय पुलिस की टीम ने गया जिले के मोहनपुर प्रखंड के लगूंरा गांव के पास जंगल में छिपाकर रखे गए चार सिलेंडर बम बरामद किया. इन बमों के जरिए नक्सली स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किसी बडी हिंसक घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे.

बताया जाता है कि इस स्थान पर कई बार नक्सलियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ हो चुकी है. बम के बरामद होने के बाद एसएसबी पूरे क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन कर रही है. गौरतलब है कि 12 अक्टूबर 2017 को झारखंड की सीमा से लगे गया जिले के डुमरिया के छकरबंधा के ढकपहरी जंगल में कोबरा और सीआरपीएफ के जवानों ने नक्सलियों के एक बंकर को घेरा था, जिसमें विरेंद्र सिंह भोक्ता नामक नक्सली को को पकड़ा गया था.

इस बंकर से कई हथियार बरामद हुए थे, जिनमें मेड इन चाईना हैंड ग्रेनेड भी शामिल थे. इन हथियारों के जखीरे से नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे. इसी प्रकार 22 जुलाई 2018 को गया जिले के बांके बजार प्रखंड के लुटूआ थाना क्षेत्र में दो नक्सली 3 किलो आइईडी को कहीं रास्ते में लगाकर पुलिस वाहन को उड़ाने की योजना बना रहे थे. पुलिस को इसकी गुप्त सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस ने दोनों नक्सलियों को आइईडी के साथ मौके से गिरफ्तार कर लिया.

इन नक्सलियों को राजनीतिक संरक्षण मिलने की बात भी बताई जा रही है. 22 जुलाई 2018 को पुलिस ने गया जिले के कोंच थाना क्षेत्र से अशोक साव नामक एक नक्सली को पकड़ा था. पुलिस ने जब छान-बीन शुरू की, तो पता चला कि अशोक साव जदयू के अतिपिछड़ा सेल का प्रखंड अध्यक्ष है. वह नक्सलियों को विस्फोटक की सप्लाई करता था. पूछताछ में उसके द्वारा बताए गए जगह पर खुदाई के बाद विस्फोटक का जखीरा बरामद किया गया था.

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