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आयुष्मान भारत से वोट हासिल करने की कवायेद में जुटी भाजपा

आयुष्मान भारत से वोट हासिल करने की कवायेद में जुटी भाजपा

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healthगरीबों के बजाये निजी अस्पतालों को योजना का लाभ!

आयुष्मान भारत की महत्वकांक्षी योजना का इस लिए शुरू की गई ताकि दिन-ब-दिन मंहगी होती स्वस्थ्य सेवाएं गरीबों तक आसानी से पहुंचाई जा सकें. लेकिन अभी तक इस योजना से सम्बंधित जो चीज़ें सामने आईं उसे देखते हुए यह लगता है कि इस योजना में घोटाला करने की पूरी छूट दे दी गई है.

पहले ही बीपीएल परिवारों के इलाज के मामले में बहुत सारे घोटाले उजागर हो चुके हैं. एक तरह से देखा जाए तो इस महत्वाकांक्षी योजना के नाम पर गरीबों को फिर से छलने का काम किया गया है. कहने को तो यह विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है, पर इस योजना के लिए जितनी राशि का आवंटन केन्द्र सरकार को करना चाहिए था, नहीं किया गया. इस योजना के लिए एक लाख करोड़ राशि की जरूरत होगी.

पर आवंटित हुआ मात्र दो हजार करोड़. जाहिर है इतनी कम राशि में दस करोड़ परिवारों का इलाज मुफ्त में कैसे हो सकेगा.

दरअसल, पहली नज़र में ऐसा लगता है की यह योजना गरीबों की आंख में धूल झोंककर आने वाले चुनाव में उनका वोट लेना है. झारखंड में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव अगले साल ही होने वाले हैं. ऐसे में इस योजना के माध्यम से घर-घर पहुंचने की कवायद भाजपा ने शुरू कर दी है. सरकार से लेकर पार्टी भी इस योजना को लेकर गंभीर है.

दिल्ली से लेकर रांची तक आयुष्मान योजना पर फोकस है. मिशन 2019 को लेकर भाजपा इस योजना को चुनावी एजेंडा बनाएगी. इस योजना के प्रचार-प्रसार में पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को भी टास्क दिए गए हैं. पार्टी का मानना है कि इस योजना को जमीनी स्तर पर भुनाने के लिए कार्यकर्ताओं की एक बड़ी फौज की जरूरत है.

कार्यकर्ताओं को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे लाभुकों के बीच कार्ड का वितरण करें, उसे अस्पताल पहुंचाए और फिर उसे भाजपा के पक्ष में तब्दील करें. आयुष्मान योजना को लेकर पार्टी या सरकार कोई भी किसी तरह की चूक करना नहीं चाहती. यही कारण है कि सरकारी कार्यक्रम होने के बावजूद पार्टी से जुड़े होर्डिंग्स राजधानी में लगाए गए और इस पर पार्टी के स्लोगन की तरह यह लिखा गया कि गरीबों को स्वास्थ्य योजना का लाभ किसने दिया?

सोचिए जरूर. पार्टी सरकारी लाभकारी योजनाओं को वोटों में तब्दील करने में जुट गई है. इससे पहले भी गरीबों को गरीबी के नाम पर राजनीतिक दलों ने छला, अब खुद को गरीबों की हिमायती बताने वाली भाजपा भी गरीबों के नाम पर राजनीति कर रही है.

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