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अब मीटिंग में अकेली नहीं जाएंगी पंजाब की महिला अधिकारी, जानें, क्‍यों महिला आयोग को देना पडा ऐसा निर्देश

अब मीटिंग में अकेली नहीं जाएंगी पंजाब की महिला अधिकारी, जानें, क्‍यों महिला आयोग को देना पडा ऐसा निर्देश

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punjabपंजाब महिला आयोग की अध्यक्ष मनीषा गुलाटी ने पिछले दिनों एक ऐसा निर्देश्‍ जारी किया है जो न केवल हमारे देश के नेता-अधिकारियों के चरित्र के बारे में सोचने पर मजबूर करता है. बल्कि मतदाताओं की सोच के बारे में भी बताता है कि वो कैसे नेताओं को चुनता है. इस निर्देश में कहा गया है कि राज्य में अब कोई भी मंत्री या बड़ा अधिकारी किसी भी महिला को मीटिंग में अकेले नहीं बुला सकता. उस महिला के साथ एक और महिला का होना बहुत जरूरी है.

महिला आयोग ने अब सेक्शुअल हैरेसमेंट का दायरा भी थोड़ा बढ़ा दिया है. नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि कोई किसी महिला के शरीर या कपड़ों को लेकर भद्दे कमेंट करता है, भद्दे जोक्स, फोटो या वीडियो उस महिला के मोबाइल पर शेयर करता है, तो उसे भी सेक्शुअल हैरेसमेंट माना जाएगा. आयोग को ऐसा कदम इसलिए उठाना पड़ा क्‍योंकि हाल ही में पंजाब के एक वरिष्ठ मंत्री द्वारा एक महिला आईएएस अधिकारी को व्हाट्‌सअप मैसेज के जरिए बार-बार तंग किया जा रहा था. यह मामला गरमाने के बाद महिला आयोग ने ये दिशा-निर्देश दिए.

आयोग के इस सर्कुलर के साथ ही पूरे पंजाब के मंत्री और आइएएस अधिकारियों का कैरेक्टर रास्ते पर आ गया है. लोग ऐसा सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि क्या पंजाब में एक भी अधिकारी या मंत्री ऐसा नहीं, जिसके साथ अकेले में बात करने में महिला अपने आप को सुरक्षित समझे. यदि महिला कर्मचारी और महिला वरिष्ठ अधिकारियों का ये हाल है तो पूरे पंजाब में बाकी महिलाएं कितनी सुरक्षित होंगी, यह आप समझ सकते हैं.

क्या पंजाब की जनता के लिए ये शर्मनाक नहीं कि उन्होंने ऐसे लोगों को चुनकर भेजा जो मंत्री बनने के बाद महिला अधिकारी को सुरक्षा तक नहीं दे सकते? और क्या पंजाब के सारे अधिकारी इतने कैरेक्टर के ढीले हो गए कि अब महिला के साथ जबतक कोई और महिला नहीं होती, वो उनसे बात भी नहीं कर पाएंगे?

 

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