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मुख्यमंत्री के गृह नगर में पुलिस की मनमानी

मुख्यमंत्री के गृह नगर में पुलिस की मनमानी

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सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकारों पर हो रहे फर्ज़ी मुक़दमे

पुलिस की शह पर दबंग कर रहे ज़मीन पर अवैध क़ब्ज़ा

bhrबिहार में पुलिस द्वारा अत्याचार और मनमानी की खबरें ऐसे तो प्रतिदिन आती रहती हैं, लेकिन जब पुलिस मुख्यमंत्री के गृह नगर में भी निर्दोषों पर अत्याचार करे और फर्जी मुकदमे में फंसाने का काम करे तो यह बड़ी खबर है. वो भी तब, जब बिहार को विकास से लेकर विधि व्यवस्था तक में रास्ते पर लाने वाले नीतीश कुमार जैसे मुख्यमंत्री के गृह नगर की बात हो, तो लोगों में इसकी विशेष चर्चा स्वाभाविक है.

यह सच है कि नीतीश कुमार बिहार के विकास पुरुष हैं और वे अपने मुख्यमंत्री के पहले पूर्ण काल में विधि व्यवस्था के साथ बिहार को विकास के रास्ते पर लाए, वो देश के किसी मुख्यमंत्री के लिए बड़ी चुनौती के रूप में था. क्योंकि राज्य की जनता ने नीतीश कुमार को बहुत ही खराब स्थिति में बिहार का जिम्मा दिया था.

तब गलत करने वाले जनता से लेकर सरकारी कर्मियों तक में नीतीश कुमार का भय व्याप्त था. लेकिन आज जनता से लेकर अधिकारी तक बेखौफ हैं. कहा जाए तो कुछ अराजक सी स्थिति में बिहार आ गया है. अब इसका चाहे जो भी राजनीतिक-सामाजिक पारिस्थितिक कारण हो. सच तो यह है कि बिहार में भ्रष्टाचार भी कम नहीं हो पा रहा है. सरकारी कार्यालयों, पुलिस थानों में जायज कामों के लिए भी लोगों को परेशान होना पड़ता है, या फिर चांदी के जूते की मार लगानी पड़ती है.

सरकारी विभाग के पदाधिकारियों व पुलिस पदाधिकारियों की मनमानी की खबरें भी रोज आती हैं. पूरे राज्य में जब हर तरफ के हालात ऐसे हों, तो मुख्यमंत्री का गृह नगर भी इनसे अछूता क्यों रहेगा. किसी विकास और निर्माण कार्य में गड़बड़ी हो रही हो और किसी सामाजिक कार्यकर्ता ने इस बात की शिकायत विभाग से लेकर मुख्यमंत्री तक कर दी, तो उसे फर्जी मुकदमे में फंसा दिया गया. संबंधित ठेकेदार-अभियंता पर कार्रवाई तो नहीं हुई, लेकिन पुलिस की मिलीभगत से सामाजिक कार्यकर्ता पर रंगदारी मांगने का फर्जी मुकदमा कर दिया गया.

मुख्यमंत्री के गृह नगर बख्तियारपुर नगर परिषद के अंतर्गत आता है -अब्बू महमदपुर मुहल्ला. यहां 1 करोड़ 17 लाख की एक योजना से पीसीसी सड़क और नाले का निर्माण कार्य किया गया. ठेकेदार और अभियंता ने नगर विकास विभाग से मिली राशि से इस सड़क का बहुत ही घटिया निर्माण किया और इस्टीमेंट घोटाला किया. क्योंकि इसी तरह की और इतने ही लम्बाई-चौड़ाई वाली सड़क सांसद शत्रुघन सिन्हा की राशि से मात्र 12 लाख में बगल के रानी सराय में बनी. इस गांव के चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता और कभी नीतीश कुमार के नजदीकी रहे भरत सिंह ने इसकी लिखित शिकायत सीधे मुख्यमंत्री से की.

मुख्यमंत्री के आदेश पर इसकी जांच की गई तो शिकायत को सही पाया गया. इस मामले में ठेकेदार के सभी बिल रुक गए और अभियंता को निलबिंत कर दिया गया. इससे खार-खाए ठेकेदार गणेश यादव व बख्तियारपुर नगर परिषद के अध्यक्ष के कुछ खास लोगों ने साजिश कर सामाजिक कार्यकर्ता भरत सिंह पर बख्तियारपुर थाने में रंगदारी मांगने का फर्जी मुकदमा कर दिया.

जिसका केस नं. 195/18 है. नीतीश कुमार से लेकर पूरा क्षेत्र भलीभांति भरत सिंह के चरित्र को जानता है. उसके बाद कभी जदयू की सक्रिय राजनीति में प्रदेश पदाधिकारी रहे भरत सिंह ने वरीय पुलिस पदाधिकारी को अपने ऊपर दर्ज फर्जी मुकदमे की जानकारी दी और इसे समाप्त करने का अनुरोध किया. लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो पाया है.

इसी तरह पटना के बख्तियारपुर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार के संवाददाता हैं-सबल सिंह. इन पर भी एक ही दिन में दो-दो रंगदारी के केस बख्तियापुर थाने में दर्ज किए गए. मामला था कि बख्तियारपुर नगर परिषद के उपाध्यक्ष सरिता देवी के पति वार्ड आयुक्त मिथलेश यादव और एक अन्य वार्ड आयुक्त शंभू चौधरी ने होली के समय होली मिलन समारोह के नाम पर सबल सिंह से कैबरे डांस करवाया था. इसका वीडियो क्लिप पत्रकार सबल सिंह ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जब जांच हुई तो वायरल खबर सच साबित हुई.

इस पर बाढ़ के अनुमंड़ल पदाधिकारी ने संबंधित लोगों पर केस दर्ज करने का आदेश दिया. इस मामले में एसडीओ के लिखित आदेश के बाद भी बख्तियारपुर थाने में केस दर्ज नहीं हुआ, उलटे पत्रकार सबल सिंह पर एक ही दिन में आधे घंटे के अंतराल पर मिथिलेश यादव और शंभू चौधरी ने रंगदारी मांगने का केस दर्ज करा दिया. पुलिस ने भी तत्परता से मुकदर्मा दर्ज किया.

कारण था कि पत्रकार सबल सिंह बख्यिातरपुर थाने के गलत हरकतों को अपने सामाचर पत्र में प्रकाशित करते रहते हैं. इसलिए पुलिस ने भी इस मामले में सक्रिय होकर पत्रकार पर फर्जी केस दर्ज करने में देरी नहीं की. इस पर पत्रकार सबल सिंह और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं नेे पुलिस के वरीय पदाधिकारी एवं पटना के जोनल आईजी नैयर हसनैन खान से मिलकर उन्हें सही स्थिति से अवगत करवाया.

क्योंकि बख्यिातरपुर के वर्तमान थानाध्यक्ष अपने को जोनल आईजी का खास बताते हैं, ऐसा बख्यिातपुर के स्थानीय लोगों का कहना है. लोगों का कहना भी कुछ-कुछ सच सा लगता है, क्योंकि पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं के द्वारा जोनल आईजी से फर्जी मुकदमे को हटाने की मांग की गई थी, लेकिन अभी तक न तो फर्जी मुकदमा खत्म हुआ और न ही बख्यिातपुर थानाध्यक्ष पर कोई कार्रवाई हुई.

इसी प्रकार एक भूमि विवाद में भी पुलिसिया कार्रवाई पर बहुत हंगामा हुआ. इसके बाद भी बख्यिातपुर थानाध्यक्ष पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, उलटे जबरन शराब पीने, हंगामा करने, आर्म्स एक्ट और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में चार निर्दोष लोगों को जेल भेज दिया गया. कई अन्य को अभियुक्त बनाकर फरार रहने को बाध्य किया गया.

मामला था कि मवेशी हाट, राष्ट्रीय उच्च पत्र संख्या 31 पर राधोपुर के मो. इस्लाम का नौ कट्‌ठा का एक भूखंड है. इसे कई लोगों ने खरीदा. इसमें तीन कट्‌ठा जमीन राधोपुर के ही महेंद्र यादव ने खरीदा और चार दिवारी का निर्माण कराकर अपना कारोबार करने लगा. दूसरी ओर बाढ़ के लेम्बुआबाद के लल्लू यादव ने मो. इस्माईल के बेटी से पूरी नौ कट्‌ठा जमीन लिखवा ली. लल्लू यादव मोकामा का विधायक आनंद सिंह का खास बताया जाता है.

इसी अकड़ में लल्लू यादव अपने आदमियों को लेकर जमीन पर कैंजा करने आया तो महेंद्र यादव समेत अन्य लोगों ने भी विरोध किया. उसके बाद लल्लू यादव को लौट जाना पड़ा. तब उसने बख्यिातपुर पुलिस का सहारा लिया, बख्यिातपुर थाने की पुलिस ने महेंद्र यादव समेत चार व्यक्तियों को पकड़कर लल्लू यादव के ग्रुप को सौंप दिया. पुलिस की इस गलत कार्रवाई के विरोध में बख्यिातपुर में आक्रोश उमड़ पड़ा.

लोगों ने एनएच 31 को जाम कर दिया. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने लल्लू यादव के यहां बंधक बने लोगों को छुड़वाया, तब जाकर सड़क जाम हट सका. बाद में पुलिस ने उक्त चारों को फर्जी मुकदमे में जेल भेज दिया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह नगर में पुलिस की मनमानी और अत्याचार के खिलाफ अंदर ही अंदर स्थानीय लोगों में आक्रोश उबल रहा है.

समय रहते पुलिस प्रशासन के वरीय पदाधिकारीओं और सत्ता में बैठे राज नेताओं ने कोई उपाय नहीं किया, तो बख्यिातपुर में बहुत बड़ा विस्फोट होगा, जिसे संभालना पुलिस प्रशासन के लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी. हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक इस मामले की जानकारी सरकारी उच्च अधिकारी पहुंचने नहीं दे रहे हैं. यदि मुख्यमंत्री को अपने गृह नगर की इस हालात की जानकारी मिलेगी तो वे इसपर जरूर उचित कार्रवाई का निर्देश देंगे.

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