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अनदेखी से नाराज़ मांझी, कैसे किनारे लगेगी महागठबंधन की नाव!

अनदेखी से नाराज़ मांझी, कैसे किनारे लगेगी महागठबंधन की नाव!

jitan-ram-manjhi

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जीतन राम मांझी बहुत ही गुस्से में हैं. उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि उनके कद के हिसाब से तवज्जो नहीं दी जा रही है.

जबसे बिना सांसद वाले पार्टी को महागठबंधन में एक सीट देने के फार्मूले पर चर्चा चली है हम पार्टी के कई नेताओं के चुनावी समीकरण में लोचा लग गया है. अगर एक सीट वाला फार्मूला लागू हो गया तो वृषण पटेल, महाचंद्र सिंह और रमई राम जैसे नेताओं के टिकट पर ग्रहण लग जाऐगा.

राजद के सूत्र बताते हैं कि जीतन राम मांझी को गया या फिर जमुई का विकल्प दिया गया है, लेकिन बाकी नेताओं को लेकर कोई ठोस बात सामने नहीं आई है जिसके कारण हम पार्टी में इन दिनों हड़कंप मचा हुआ है. पार्टी के प्रदेश प्रमुख वृषण पटेल का बयान भी आ चुका है कि अगर सम्मानजनक सीटें नहीं मिली तो हम पार्टी महागठबंधन में तो रहेगी पर किसी भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ेगी.

महागठबंधन में तो पहले से ही सीटों की मारामारी थी अब उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश सहनी के आ जाने के बाद से तो किल्लत और भी बढ़ गई है. जानकार बताते हैं कि जीतन राम मांझी दो सीट पर मान जाऐंगे और इसके लिए पार्टी की ओर से गया, जमुई, वैशाली और मुंगेर का विकल्प दिया गया है. गया या जमुई से जीतन राम मांझी खुद लड़ेंगे और अगर वैशाली मिली तो वृषण पटेल और अगर मुंगेर सीट मिली तो महाचंद्र सिंह की लॉटरी लग सकती है.

फिलहाल मांझी गुस्से में हैं और सीट बंटवारे का पेंच फंसा हुआ है.

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