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‘‘विधना नाच नचावे’’ मगही के लिए अनूठा प्रयास

‘‘विधना नाच नचावे’’ मगही के लिए अनूठा प्रयास

new film is good for maghi

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मगही भाषा के कवि, साहित्यकार व फिल्मकार अपने संसाधनों के भरोसे मगही भाषा को मुकाम तक पहुंचाने में लगे हुए हैं। मगही का धार्मिक रूप में भी पहचान है। कई जैन धर्मग्रंथ मगही भाषा में लिखे गए हैं। उसी में एक हैं मगही भाषा के विकास व विस्तार में जुटे पटना जिला निवासी प्रभात वर्मा जो मगही भाषा में दर्जनों पुस्तक लिख चुके हैं। 90 के दशक में वर्मा द्वारा लीलकहवा नामक मगही फिल्म का निर्माण किया गया था। लेकिन यह फिल्म दूरदर्शन तक ही सीमित रह गई थी। एक बार फिर अपने संसाधनों के भरोसे वर्मा ‘‘विधना नाच नचावे’’ नामक मगही फिल्म का निर्माण कर सिनेमा घरों में चलवाने के लिए प्रयासरत हैं।
नवपीढ़ी की जुबान पर लाने का प्रयास

प्रभात वर्मा ने कहा कि यह फिल्म एक भाषाई लड़ाई है अर्थात् सिनेमा के स्तर पर एक सशक्त आन्दोलन कही जा सकती है, जो मगही को ऊंची पहचान दिलाने की लड़ाई है। ‘‘ विधना नाच नचावे’’ फिल्म में अपनी आंचलिक भाषा को नवपीढ़ी की जुबान पर गौरवमयी भाषा के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है। गांव का माहौल और ग्रामीणों द्वारा प्रयुक्त आंचलिक भाषा मगही के विशेष टोन को ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है।

खूब धूम मचा रही फिल्म : प्रभात वर्मा
फिल्म के निर्देशक प्रभात वर्मा ने बताया कि विधना नाच नचावे महज एक फिल्म ही नहीं वरन् लोक संस्कृति एवं भाषा को पुरानी पीढ़ी से उठाकर नई पीढ़ी तक की पहचान बनाने का बीड़ा है, जो आज सफल होता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि बहुत बार ऐसा देखा जाता है कि फिल्म जगत में स्थापित भाषाओं की फिल्में भी पर्दे पर कोई खासा कमाल नहीं दिखा पातीं है। कभी-कभी तो 30-35 से ज्यादा भीड़ ही नहीं जुटती। किंतु यह फिल्म ‘‘विधना नाच नचावे’’ ने सच में एक मिशाल पेश की है। वर्मा ने बताया कि अपने पहले दिन से लेकर अब तक इस फिल्म ने न केवल दर्शकों की संख्या में धमाके पे धमाके किये हैं, बल्कि दर्शकों का प्यार व तालियां बटोरती है। यह फिल्म आंचलिक भाषा की फिल्मी दुनिया में खूब धूम मचा रही है, जो निश्चित इसकी सफलता का शुभ सूचक है।

प्रेमकथा पर बनी फिल्म

प्रभात वर्मा ने बताया कि गांव की एक प्रेम कथा पर आधारित फिल्म ‘‘ विधना नाच नचावे’’ पूरी तरह से एक पारिवारिक फिल्म है, जो कि एक अनाथ लड़की के जीवन पर केंद्रीत है। उन्होंने बताया कि दर्शकों की संवेदना को समझते हुए फिल्म की शुरूआती दृश्यों की प्रस्तुती बड़ी भावपूर्ण की है और अंत तक बनाये रखा है, जो किसी भी पारिवारिक फिल्म की खासा जरूरत है। चूंकि यह गांव की संस्कृति पर आधारित पारिवारिक फिल्म है अतः इसमें लोक संस्कृति, लोक-रिवाजों का विशेष ख्याल रखा गया है। इस फिल्म में प्रेमगीत ,विवाह के लोक गीत व लोक पर्व छठ गीत के अलावे आइटम गाने को भी बखूबी परोसा गया है।

इस फिल्म में पात्रों के अभिनय की बात करे तो कुछ प्रमुख पात्र काफी अच्छे अभिनय में हैं तो कुछ के अभिनय से फिल्म में कहीं कहीं नाटकीयता उभर आती है। कहीं कहीं पर एक दो दृश्यों का ताल मेल एडिटिंग की कमी निरर्थक होना सा लगता है। कुल मिलाकर विधना नाच नचावे एक काफी मनोरंजन व सामाजिक उद्देश्यों से पूर्ण एक पारिवारिक फिल्म है, जिसके माध्यम से आंचलिक भाषा मगही को पहचान दिलाने का जो बिड़ा लेखक निर्देशक प्रभात वर्मा ने उठाया है।

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