Now Reading:
सावधान: बेहद खतरनाक है विटामिन डी और कैल्शियम की कमी से हाने वाली यह बीमारी

सावधान: बेहद खतरनाक है विटामिन डी और कैल्शियम की कमी से हाने वाली यह बीमारी

Vitiligo

Vitiligo

सर्दियों का मौसम शुरू होते ही अनेक प्रकार के त्‍वचा रोग उभरने लगती है. इस मौसम में त्‍वचा रूखी और बेजान होने लगती है और साथ ही चेहरे की रौनक उड़ने जाती है और हाथ पैर फटने लगते हैं. इस स्थिति से बचने के लिए कई प्रकार के क्रीम और लोशन लगाने के साथ साथ कई घरेलू उपाय भी करने लगते हैं. फिर भी कई बार त्‍वचा रुखे और बेजान ही रहते हैं. इस स्थिति में हमें त्‍वचा का उपचार बाहर से नहीं बल्कि अंदर से करना चाहिए. इसके लिए शरीर को जरूरी मात्रा में विटामिन डी और कैल्शियम की आवश्‍यकता होती है.

यदि शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी से विटिलिगो (ल्‍यूकोडर्मा) जिसे हम आम भाषा में सफेद दाग कहते हैं, त्‍वचा पर दिखाई देने लगती है. भारत में सफेद दाग बहुत तेजी से फैलने वाला त्‍वचा रोग है. एक शोध में पता चला है कि विश्‍व में सफेद दाग से लगभग दो प्रतिशत लोग प्रभावित हैं और सिर्फ भारत में ही लगभग 5 से 6 प्रतिशत लोग इस बीमारी से पीडि़त हैं. सफेद दाग राजस्‍थान और गुजरात के कुछ इलाकों में यह लगभग 8 प्रतिशत के स्‍तर तक पहुंच गया है. ऐसे इन दागों पर खुजली या दर्द नहीं होता है लेकिन देखने पर काफी बुने लगने लगते हैं. वहीं इस रोग को सामाजिक भ्रांतियों के कारण कुष्‍ठ रोग मानकर दूरी बनाने भी लगते हैं.

इस रोग से पीडि़त व्‍यक्ति अपने आप को उपेक्षित महसूस करने लगता है. जिससे डिप्रेशन का शिकार होकर कई मरीज अपना उपचार भी नहीं कराते हैं और यह समस्‍या धीरे धीरे बढ़ती जाती है. इस रोग से आधे से ज्‍यादा मरीज 20 साल आयु होने से पहले और लगभग 95 प्रतिशत लोग 40 वर्ष आयु होने से पहले सफेद दाग की समस्‍या का सामना करने लगते हैं. शरीर में कैल्शियम की कमी को इस रोग का प्रमुख कारण है. जबकि कैल्शिय शरीर को स्‍वस्‍थ बनाए रखने के साथ प्रतिरोधक क्षमता और तवचा रोगों से मुकाबला करने की क्षमता में वृद्धि करता है.

इसे भी जरूर पढ़ें : सावधान: बच्‍चों के लिए खतरनाक है, विषाणुु जनित यह रोग

सर्दियों के मौसम में अधिकतर लोग व्‍यायाम नहीं करते हैं वहीं अन्‍य मौसमों के मुकाबले सर्दियों के मौसम में ज्‍यादा से ज्‍यादा मात्रा में तला भूना भोजन करते हैं. जिससे हमारे शरीर को आवश्‍यक पोषक तत्‍व खासकर विटामिन डी और कैल्शियम पर्याप्‍त मात्रा में हमें नहीं मिल पाता है. जिससे हमारी त्‍वचा के ऊपर और अंदर मौजूद विषैले तत्‍व दाद, खाज, खुजली, एक्जिमा जैसी समस्‍याओं को जन्‍म देते हैं. इसलिए इससे बचने के लिए हमें अपने शरीर में पर्याप्‍त मात्रा में विटामिन डी और कैल्शियम पूर्ति करते रहना चाहिए.

विटामिन डी प्राप्त करने का सबसे आसान तरीका दिन में कुछ समय सूरज की किरणों अर्थात धूप में रहना. हमारे शरीर की खुली त्वचा सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणों को अवशोषित कर विटामिन डी का निर्माण करती हैं. वहीं दूध, अंडा, चिकन, कॉड लीवर ऑयल और साल्मन, ट्यूना, मैकेरल और सार्डिन जैसी मछलियां भी विटामिन डी का अच्छा स्रोत हैं. संतरा और गाजर भी विटामिन डी प्रदान करते हैं. साथ ही साथ दूध व दूध से बने खाद्य पदार्थ, गेहूं, बाजरा, मूंग, मोठ, चना, राजमा और सोयाबीन जैसे अनाज, अरबी, मूली, मेथी, करेला, टमाटर, ककड़ी, गाजर, भिंडी, और चुकंदर जैसी सब्जियों का सेवन करने से भी कैल्शियम की कमी दूर होती है. अन्नानास, आम, संतरा और नारियल जैसे फल भी शरीर को कैल्शियम प्रदान करते हैं.

विटामिन डी और कैल्शियम एक-दूसरे के पूरक हैं इसलिये इन दोनों की संतुलित मात्रा शरीर में अत्‍यंत आवश्यक है. इनके पोषण के लिये नियमित तौर पर शारीरिक श्रम करना जरूरी है जिससे शरीर इन दोनों तत्वों को पचा कर संरक्षित कर सके.

इसे भी जरूर पढ़ें : जानलेवा है, असुरक्षित यौन संबंध से पैदा होने वाली यह बीमारी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Input your search keywords and press Enter.