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दिल्ली की दिल दहला देने वाली इन जगहों पर अंधेरा होने के बाद परिंदा भी पर नहीं मारता

दिल्ली की दिल दहला देने वाली इन जगहों पर अंधेरा होने के बाद परिंदा भी पर नहीं मारता

haunted-place-in-delhi

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आपने अभी तक देश में बहुत से डरावनी जगहों के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आप दिल्ली की ऐसी जगहों के बारे में जानते हैं जो हॉन्टेड हैं. अगर नहीं जानते तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं दिल्ली की वो पांच जगह जो डरावनी हैं.

दिल्ली कैंट

यह पूरा इलाका एक छोटे से जंगल की तरह दिखाई देता है जिसमे चारों तरफ हरे भरे पेड़ हैं. कहा जाता है कि यहां सफेद लिबास में एक डरावनी बुजुर्ग महिला लोगों से लिफ्ट मांगती है, अगर आप आगे निकल जाते हैं तो यह महिला कार के जितना तेज भाग कर पीछा करती है. बहुत से लोगों ने उसको देखे जाने की पुष्टि भी की है.

द्वारका (सेक्टर-9), मेट्रो स्टेशन

नाइट शिफ्ट में काम करने वाले कॉल सेंटर के लोगों की शिकायत है कि इस इलाके मे लोगों को थप्पड़ पड़ते हैं. साथ ही वे बताते हैं कि उनके कैब के आगे एक औरत आ जाती है जो तेज रफ्तार से आगे-आगे दौडऩे के बाद गायब हो जाती है.

हाउस नम्बर W -3, ग्रेटर कैलाश-1

एक बुजुर्ग दम्पति की हत्या इस मकान में कर दी गई थी, और इसके बाद उनके मृत शरीर को वहीं की टंकी से महीने बाद बरामद किया गया. आस-पास रह रहे लोगों ने वहां से किसी के रोने और चीखने-चिल्लाने की आवाजें कई बार सुनी है. इस मकान में अब कोई नहीं रहता और इसे भुतहा घोषित कर दिया है.

मलछा महल, बिस्तदारी रोड

दिल्ली के मलछा गांव में ये महलनुमा पुराना खंडहर है. इसका निर्माण आज से 700 साल पहले फिरोज शाह तुगलक ने करवाया था. वो इसे अपनी शिकारगाह के रूप में इस्तेमाल करते थे. यह महल पिछली कई सदियों से वीरान रहने के कारण खंडहर हो चुका था. इस खंडहर हो चुके महल में 1985 में, अवध घराने की बेगम विलायत खान अपने दो बच्चों, पांच नौकरों और 12 कुत्तों के साथ रहने आई. इस महल में आने के बाद वो कभी इस महल से बाहर नहीं निकली. इसी महल में बेगम विलायत खान ने 10 सितम्बर 1993 को आत्महत्या कर ली थी. कहते है की बेगम की रूह आज भी उसी महल में भटकती है.

अग्रसेन की बावली, कनॉट प्लेस

अग्रसेन की बावली राजधानी दिल्ली में कनाट प्लेस से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है. महाराजा अग्रसेन ने चौदवहीं शताब्दी में इस बावली का निर्माण करवाया था. इसकी लंबाई 60 मीटर और चौड़ाई 15 मीटर है. इस प्राचीन स्मारक को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का संरक्षण प्राप्त है. किसी ज़माने में यह हमेशा पानी से भरी रहती थी, लेकिन अब यह सूख चुकी है. इसके बारे में प्रचलित है कि इसका काला पानी लोगों को सम्मोहित कर आत्महत्या के लिए उकसाता था. इसके तल तक पहुंचने के लिए 106 सीढियां उतरनी पड़ती हैं.

 

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