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इस मुसलमान ने गायों को बचाने में गुज़ार दी पूरी ज़िंदगी , मिला इनाम
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इस मुसलमान ने गायों को बचाने में गुज़ार दी पूरी ज़िंदगी , मिला इनाम

 

नई दिल्ली: कर्म ही पूजा है- काम चाहे जो भी हो, शिद्दत से उसे करने पर बेहतर फल भी मिलता है, लेकिन अपने काम से संतुष्ट होना भी जरुरी है। शायद यही कारण था कि शब्बीर सैयद ने गाय को क़त्ल करने का अपना पेशा छोड़कर गाय की सेवा करनी शुरू कर दी है। जिसके बाद अब भारत सरकार ने शब्बीर सैयद को पद्म श्री से सम्मानित करने का फैसला किया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार को पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी। इस बार कुल 112 पद्म पुरस्कार दिए जा रहे हैं, जिसमें से 94 लोगों को पद्मश्री, 14 लोगों को पद्म भूषण और 4 हस्तियों को पद्म विभूषण से नवाजा जाएगा।

  • शब्बीर सैयद ने गाय के क़त्ल का पेशा छोड़कर गाय की सेवा का मार्ग चुना
  • शब्बीर सैयद को सामाजिक कार्य और पशु कल्याण के लिए पद्मश्री का सम्मान
  • 50 साल से कर रहे हैं गाय की सेवा
  • गाय की सेवा में शब्बीर सैय्यद को मिलता है परिवार का साथ

 

महाराष्ट्र के बीड जिले के शिरूर कासार तालुका निवासी 58 वर्षीय शब्बीर सैय्यद को सामाजिक कार्य और पशु कल्याण के लिए पद्मश्री देने की घोषणा की गई है। वो अपने परिवार के साथ पिछले 50 साल से गाय की सेवा कर रहे हैं। वो ऐसे इलाके से आते हैं, जहां पर कई बार पानी की किल्लत बनी रहती है। उस इलाके में कई बार जानवरों की भूख-प्यास से मौत तक हो जाती है, लेकिन शब्बीर इन तमाम दिक्कतों के वाबजूद गायों की सेवा पूरी शिद्दत से करते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि वो काटने के लिए न तो गाय को बेचते हैं और न ही दूध। वो गाय के गोबर को बेचकर पूरा खर्च निकाल लेते हैं। गाय के गोबर बेचकर वो हर साल 70 हजार रुपये तक कमा लेते हैं।इसके अलावा अगर वो बैल बेचते हैं, तो सिर्फ किसानों को। इतना ही नहीं, शब्बीर सैय्यद इसके लिए बाकायदा कागज में उस किसान से लिखवा लेते हैं कि वह कभी कसाई को नहीं बेचेंगे। इसके लिए वो काफी डिस्काउंट भी देते हैं।

शब्बीर सैय्यद का कहना है कि अगर कोई गाय या उसका बच्चे की मौत हो जाती है, तो उनको बहुत पीड़ा होती है। उनका लगता है कि उनके परिवार का एक सदस्य इस दुनिया से चला गया है।गोमाता की सेवा में शब्बीर सैय्यद का साथ उनका पूरा परिवार देता है। इस परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है, लेकिन फिर सैय्यद गोमाता की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। वर्तमान में शब्बीर सैय्यद के पास 165 गोवंश हैं। शब्बीर का परिवार बीफ भी नहीं खाता है। शब्बीर सैय्यद की पत्नी आशरबी, बेटे रमजान और यूसुफ और बहू रिजवान और अंजुम भी बीफ नहीं खाते हैं। ये सभी मिलकर गायों की खूब सेवा करते हैं।

 

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