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क्या आम चुनाव से पहले विजय माल्या को भारत ला सकेगी मोदी सरकार ?

क्या आम चुनाव से पहले विजय माल्या को भारत ला सकेगी मोदी सरकार ?

नई दिल्ली:भारतीय बैंकों का हजारों करोड़ रुपये लेकर फरार भगोड़ा शराब कारोबारी विजय माल्या को भारत लाने का रास्ता साफ हो गया है. ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने विजय माल्या के प्रत्यर्पण आदेश पर मुहर लगा दी है. अब माल्या के प्रत्यर्पण का मामला पूरी तरह से कोर्ट पर निर्भर है. बड़ा सवाल यह है कि क्या माल्या लोकसभा चुनाव तक यानी मई 2019 से पहले भारत लाया जा सकता है? तो इसका जवाब हां है, लेकिन इसमें अब भी एक अड़चन है. आइए जानते हैं कि वो अड़चन आखिर है क्या ?आपको बता दें कि विजय माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश गत 10 दिसंबर, 2018 को ब्रिटेन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के चीफ मजिस्ट्रेट ने दिया था, जिसे वहां के गृह मंत्री साजिद जावेद ने 3 फरवरी को मंजूरी दे दी है. अब विजय माल्या के पास ऊपरी अदालत में अपील के लिए 14 दिन का समय है. माल्या ने ट्वीट कर इस बात की पुष्टि भी की है कि वह इसके खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने जा रहा है. माल्या को वापस लाने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और भारतीय जांच एजेंसियों ने लंबी लड़ाई लड़ी है.विजय माल्या ने होम डिपार्टमेंट के निर्णय पर पहली प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट में लिखा है, ’10 दिसंबर, 2018 के वेस्टमिंस्टर कोर्ट के निर्णय के बाद ही मैने अपील की मंशा जाहिर की थी.लेकिन होम सेक्रेटरी गृहमंत्रालय के निर्णय से पहले मैं ऊपरी अदालत में अपील की प्रक्रिया की शुरुआत नहीं कर सकता था लेकिन अब जब ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने भारत के प्रत्यर्पण पर दस्तखत कर दिया है. अब मैं अपील की प्रक्रिया शुरू करूंगा.’

अगर ऐसा हुआ तो सुनवाई में लंबा समय लगेगा और माल्या ब्रिटेन में ही रहेगा 
माल्या की अपील पर सबसे पहले एक जज वाले हाईकोर्ट की बेंच में सुनवाई होगी. यह जज भी यदि प्रत्यर्पण के आदेश पर मुहर लगाते हैं, लेकिन आगे अपील की अनुमति भी दे देते हैं तो उसके बाद माल्या की अपील पर हाईकोर्ट के दो जज सुनवाई करेंगे. इसके बाद माल्या सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है कि उसके केस की सुनवाई वहां की जाए. अगर सुप्रीम कोर्ट यह मंजूर कर लेता है तो पूरे मामले की सुनवाई पूरी होने में करीब 18 महीने लग जाएंगे.
लेकिन अगर ऐसा हुआ तो मई 2019 तक (यानी लोकसभा चुनाव से पहले) माल्या भारत आ जाएगा  
यदि अपील के पहले चरण में ही हाईकोर्ट ने प्रत्यर्पण पर मुहर लगा दी और माल्या को आगे अपील की इजाजत नहीं दी, तो माल्या को जितनी जल्दी हो सके प्रत्यर्पित कर भारत लाया जा सकेगा. तब इस बात की प्रबल संभावना होगी कि माल्या को मई, 2019 से पहले ही भारत लाया जाए. आपको बता दें कि कारोबारी विजय माल्या पिछले कई साल से भारत सरकार और कर्ज देने वाले कई बैंकों के लिए सिरदर्द बना हुआ है. 9000 करोड़ का कर्ज लेकर फरार माल्या लंदन में गिरफ्तार भी हुआ था, लेकिन उसे तत्काल जमानत मिल गई.
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