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बसंत पंचमी से जुडी ख़ास बातें, इस बार 2 दिन मनाया जाएगा ये पर्व  
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बसंत पंचमी से जुडी ख़ास बातें, इस बार 2 दिन मनाया जाएगा ये पर्व  

बसंत पंचमी  (Basant Panchami) का भारतवर्ष में एक अलग ही महत्त्व है, वसंत ऋतुओं से जुड़ा पर्व है लेकिन ब्रह्मा सूर्य और सरस्वती देवता के इस पर्व से जुड़े होने के कारण ये और भी खास हो जाता है. इस बार वसंत पंचमी 2 दिन मनाई जाएगी, देशभर के कई इलाकों में ये 10 फरवरी को मनाई जाएगी. वही उत्तर भारत के कई राज्यों में श्री पंचमी (Shri Panchami), वसंत पंचमी (Vasant Panchami) और सरस्वती पंचमी (Saraswati Panchami) के नाम से जानी जाने वाली ये पंचमी 9 फरवरी को भी मनाई गई. बसंत पंचमी के दिन प्रयागराज में चल रहे कुंभ में शाही स्नान भी होगा. यह कुंभ मेले का चौथा शाही स्नान है. इस दिन मां सरस्वती की खास पूजा की जाती है. सरस्वती को ज्ञान, कला और संगीत की देवी कहा जाता है. मथुरा में बांकेबिहारी के मंदिरों में रंगोत्सव (Rangotsav) शुरू हो जाता है. वहीं संसार के निर्माता ब्रह्मा ने उन्हें वाणी की देवी नाम दिया.
इसके साथ ही, बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का बेहद खास महत्व होता है. स्कूलों, शिक्षण संस्थानों और मंदिरों में मां सरस्वती की प्रतिमा को पीले रंग के वस्त्रों और आभूषणों से सजाया जाता है. मां सरस्वती की आराधना करने वाले भक्त भी बसंत पंचमी ((Basant Panchami)) के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनते हैं. बसंत पंचमी (Basant Panchami 2019) के दिन पीला रंग पहनना शुभ माना जाता है.
इसके पीछे दो महत्वपूर्ण कारण माने जाते हैं. पहला बसंत को ऋतुओं का पर्व माना जाता है. बसंत पंचमी के दिन से कड़कड़ाती ठंड खत्म होकर मौसम सुहावना होने लगता है. हर तरफ पेड़-पौधों पर नई पत्तियां, फूल-कलियां खिलने लग जाती हैं. गांव में इस मौसम में सरसों की फसल की वजह से धरती पीली नज़र आती है. इस पीली धरती को ध्यान में रख लोग बसंत पंचमी का स्वागत पीले कपड़े पहनकर करते हैं. Basant Panchami से ब्रज में शुरू हो रहा है रंगोत्सव, कुछ ऐसा होगा पूरा कार्यक्रम वसंत मय हो जाएगा. वहीं दूसरी मान्यता के अनुसार बसंत पंचमी के दिन सूर्य उत्तरायण होता है. जिसकी पीली किरणें इस बात का प्रतीक है कि सूर्य की तरह गंभीर और प्रखर बनना चाहिए. इन्हीं दो वजहों से बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का खास महत्व रहता है. इतना ही नहीं बसंत पंचमी के दिन पीला प्रसाद और खाना भी पीले रंग का ही बनता है. कुल मिलाकर आस्था के इस पर्व में समूचा भारत सराबोर नज़र आ रहा है, भारतवर्ष में सभी पर्व की अपनी एक परंपरा है और भारत इन्ही परम्पराओं का प्रतीक है.
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