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राफेल डील पर सीक्रेट ईमेल का खुलासा- राहुला गांधी ने फिर दागे 5 और सवाल

राफेल डील पर सीक्रेट ईमेल का खुलासा- राहुला गांधी ने फिर दागे 5 और सवाल

राफेल डील के मामले में बैकफुट पर मोदी सरकार जनता के बीच सफाई से बचने के लिए सराकर मंगलवार को सीएजी रिपोर्ट संसद में पेश करने जा रही है. वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इससे पहले ही एक सीक्रेट ईमेल का बड़ा खुलासा करते हुए मोदी सरकार पर कई सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि राफेल डील में एक सीक्रेट ईमेल सामने आया है, जिसके तहत विदेश सचिव और एचएएल से पहले राफेल डील के बारे में अनिल अंबानी को पता था और वो फ्रांस के रक्षा मंत्री से क्या डील कर रहे थे ? राहुल ने इस तरह से पांच सवाल खड़े किए हैं.

 

राफेल पर राहुल के तीखे सवाल

  • राहुल गांधी ने कहा कि राफेल डील के एमओयू साइन होने से 10 दिन पहले अनिल अंबानी को कैसे पता चला कि कोई डील हो रही है. जबकि न तो डिफेंस मिनिस्टर को मालूम था, न ही एचएएल को और न ही विदेश मंत्री को.
  • राहुल ने कहा कि फ्रांस के रक्षा मंत्री के ऑफिस में अनिल अंबानी गए थे. मीटिंग में अंबानी ने कहा था कि जब पीएम आएंगे तो एक एमओयू साइन होगा, जिसमें अनिल अंबानी का नाम होगा.
  • राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अनिल अंबानी के मिडिलमैन की तरह काम कर रहे थे.
  • राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी ने गोपनियता कानून का उल्लंघन किया है. पीएम ने राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ किया है. प्रधानमंत्री के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए.
  • राहुल गांधी ने सवाल किया कि मोदी राफेल मामले को क्यों दबाना और किसे बचाना चाहते हैं. इसीलिए राफेल मामले पर जेपीसी से बच रहे हैं. राहुल ने कहा कि CAG का मतलब ‘चौकीदार ऑडिटर जनरल’ रिपोर्ट है. हमारा काम सरकार पर दबाव बनाना है और कांग्रेस पार्टी अपना काम पूरे दम से कम कर रही है.

 


वैसे तो चुनावी प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री और अमित शाह शॉर्ट फॉर्म का पूरा मतलब बताते देखे जाते थे लकिन अब वहीं राहुल ने भी उनका ही फार्मूला अपना लिया है. जीएसटी यानी गाबार सिंह टैक्स के बाद से ही राहुल के फुलफॉर्म को भी काफी लोकप्रियता मिल रही है. बहरहाल इस मजाक से हटकर अगर बात राफेल की करें तो लोकसभा चुनाव में निश्चित ही राफेल बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है और अगर मोदी सरकार ने इसे हलके में लिया तो निकट भविष्य में ये कदम बीजेपी के लिए अच्छा नहीं होगा.

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