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रक्षा बजट 3 लाख करोड़ के पार फिर भी पाई पाई के लिए क्यों मजबूर हैं हमारी सेना ?

रक्षा बजट 3 लाख करोड़ के पार फिर भी पाई पाई के लिए क्यों मजबूर हैं हमारी सेना ?

नई दिल्ली : भारतीय सेना के लिए चुनाव पूर्व बजट में 3 लाख करोड़ से अधिक का बजट पेश किया गया. जाहिर तौर पर आम चुनाव से पहले ये मोदी सरकार का लोकलुभावन बजट माना जा रहा है. पिछले साल का रक्षा बजट आवंटन 2.98 लाख करोड़ रुपये था. उस लिहाज से इस बजट में करीब करीब 5 हजार करोड़ रुपए का इजाफा हुआ है. कुल बजट आवंटन में से 1,08,248 करोड़ रुपये पूंजी व्यय के लिए रखे गए हैं. यानी यह राशि नए हथियार, विमान, युद्धक पोत और अन्य सैन्य हार्डवेयर की खरीद पर खर्च की जाएगी. पिछले साल सरकार ने पूंजी व्यय के लिए 93,982 करोड़ रुपये आवंटित किए थे. लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मामना है कि हमारे सैन्य बलों को जिस प्रकार के आधुनिकीकरण की जरूरत है उस लिहाज से पूंजी व्यय आवंटन पूरी तरह अपर्याप्त है, क्योंकि सेना के आधुनिकीकरण के लिए और ज्यादा पैसे की जरुरत है वहीं दूसरी तरफ विशेषज्ञों का कहना है कि गायेल ने अंतरिम बजट पेश किया है और जब नयी सरकार पूर्ण बजट पेश करेगी तो सैन्य बलों के लिए आवंटन में बदलाव हो सकता है, रक्षा बजट में दिया गया पैसा घटाया भी जा सकता है.

वहीं 2018 में एक रिपोर्ट सामने आई थी जिसके मुताबिक सेना ने अपनी उस जमीन के बदले पैसे की मांग की थी, जिस पर या तो अतिक्रमण कर लिया गया है या फिर वह राज्य सरकार को ट्रांसफर कर दी गई है. इससे सेना को अपने रुके हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर संबंधी कामों को आगे बढ़ाने में मदद का हवाला दिया गया था. सेना की ओर से रक्षा विभाग को पत्र लिखकर जमीन के बदले पैसे की मांग की गई थी. इस पत्र के अनुसार, देश में 1550.20 एकड़ आर्मी की जमीन राज्य सरकार के पास है. इसके अलावा सेना की 1219.98 एकड़ जमीन पर किसी न किसी तरह का अतिक्रमण है. सेना की मांग थी कि राज्य सरकारें उसे जमीन के बदले रुपए दें. इससे वह अपने करीब 5000 करोड़ के मेरिड अकोमेडेशन प्रोजेक्ट (एमएपी) के लिए इस्तेमाल कर सके. इसके अलावा उसे अगले पांच साल के लिए आधुनिकीकरण के लिए जो 15000 करोड़ की जरूरत है, उसे भी पूरा किया जा सकेगा. यानी फंड की कमी से जूझ रही सेना को 2018-19 आधुनिक तौर पर मजबूत होने के लिए तकरीबन 20 हजार करोड़ रूपए की जरुरत थी, लेकिन इस बार बजट में बढ़कर मिले हैं 5 हजार करोड़ मतलब साफ़ है कि सेना अब भी करीबन 10 से 15 हजार करोड़ रूपए की किल्लत से जूझ रही है. वैसे सेना की कितनी जमीन कहाँ फंसी है ये आंकड़ा भी दिलचस्प है नीचे दिए आंकड़े देखिये।

सेना की कहां कितनी जमीन पर अतिक्रमण

दिल्ली               250 एकड़

मुंबई                 40 एकड़

सिकंदराबाद     65 एकड़

जामनगर          60 एकड़

उदयपुर            400 एकड़

पुरी                   400 एकड़

वहीं ना सिर्फ केंद्र सरकार बल्कि राज्य सरकार भी चुनावी रैलियों में या फिर कही और सेना को लेकर अपनी दरियादिली दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ती लेकिन यही सियासी नेता सेना की करोडो की जमीन डकार गए हैं, आलम ये है कि सेना को खुद अपनी ही जमीन वापस मांगने के लिए इनके आगे हाथ फैलाना पड़ रहा है, इस रिपोर्ट के बाद ये साफ़ हो गया है कि दुश्मन के इलाके में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक करने वाली सेना अपनी ही जमीन को बेचकर पैसा प्राप्त कर उसे खुदके आधुनिकीकरण में लगाने को मजबूर दिख रही है जबकि देशभर में सेना और रक्षा बजट में बढ़ोतरी के नाम पर मोदी सरकार अपनी ही पीठ थपथपाने में लगी हुई है.

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