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EXCLUSIVE: प्रियंका गांधी के महासचिव बनने के बाद बैकफुट पर माया-अखिलेश, दिया 14 सीटों का ऑफर कांग्रेस 30 की मांग

EXCLUSIVE: प्रियंका गांधी के महासचिव बनने के बाद बैकफुट पर माया-अखिलेश, दिया 14 सीटों का ऑफर कांग्रेस 30 की मांग

Priyanka Gandhi

प्रियंका गाँधी के कांग्रेस का चेहरा बनते ही एक राजनितिक घटनाक्रम बड़ी तेज़ी से बदल रहा है। अब तक जो मायावती और अखिलेश कांग्रेस को गेम से बाहर बता रहे थे वो भी थोड़ा परेशान हैं। उन्हें लगने लगा है कि कांग्रेस पूरी तरह से खेल से बाहर नहीं हुई है, बल्कि प्रियंका के आने उनकी चमक बढ़ रही है। प्रियंका गाँधी को कांग्रेस में लाने कि मांग सबसे ज़्यादा उत्तर प्रदेश से ही हुई थी। बताया जा रहा है कि यूपी में वोटर प्रियंका की तरफ आकर्षित दिखाई दे रहे हैं। ख़ास तौर पर मुस्लिम और दलित समाज। एक बड़ा वोट बैंक वाला ब्राह्मण समाज भी प्रियंका की इंट्री से काफी उत्साहित है। ऐसा माना जा रहा है की इसका सीधा असर सपा और बसपा को भी होने वाला है।

तमाम परिस्तिथियों को देखते हुए उत्तर प्रदेश में बुआ और बाबू की जोड़ी हरकत में आ गई है। बताया जा रहा है की दोनों ही पार्टियों ने अपना प्लान बी एक्टिवेट कर दिया है। अब ये चर्चा होने लगी है की कांग्रेस को अनदेखा कर वो अपना बड़ा नुक्सान नहीं उठा सकते हैं। वो भी तब जब प्रियंका गाँधी को लोकसभा चुनाव में तुरुप का इक्का बताया जा रहा है।

यही वजह है कि, प्रियंका गांधी की एंट्री के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया ट्विस्ट देखने को मिल रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सपा और बसपा ने कांग्रेस से गठबंधन पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है। सूत्रों कि मानें तो सपा का एक बड़ा धड़ा जिसमे खुद मुलायम सिंह यादव भी हैं ये चाहते हैं की इस गठबंधन में कांग्रेस को शामिल किया जाए। नहीं तो बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। सूत्रों की मानें तो मौजूद परिस्तिथि को देखते हुए सपा – बसपा ने नए सिरे महागठबंधन विचार करते हुए कांग्रेस को 14 सीटों का ऑफर भी दे दिया है। तो वहीँ दूसरी तरफ अपनी स्तिथि थोड़ी मज़बूत देखते हुए कांग्रेस ने भी अपने पाशे फेंकने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने सपा-बसपा से कम से कम 30 सीटें मांगीं हैं।

गौरतलब है कि, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश और बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस से किनारा करते हुए 12 जनवरी को आगामी लोकसभा चुनाव के लिए महागठबंधन का ऐलान किया था। आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए दोनों पार्टियों के बीच 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 पर चुनाव लड़ने का फैसला किया गया था। जबकि दो सीटें गठबंधन की अन्य पार्टियों और अमेठी-रायबरेली सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ दी थी। कांग्रेस के लिए दो सीटें छोड़ने की घोषणा के साथ ही दोनों ने यह भी साफ किया था कि वे कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं करेंगे।

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