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राजस्थान में फिर शुरू हुआ गुर्जर आरक्षण आंदोलन, रोकी ट्रेने

राजस्थान में फिर शुरू हुआ गुर्जर आरक्षण आंदोलन, रोकी ट्रेने

जयपुर : राजस्थान में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने अपनी मांगों को लेकर फिर से आंदोलन शुरू कर दिया. वहीँ सवाईमाधोपुर जिले में अपने समर्थकों के साथ दिल्ली मुंबई रेल लाइन पर बैठे गुर्जर नेता किरौड़ी सिंह बैंसला ने इस बार आंदोलन को आरपार की लड़ाई करार दिया है. गुर्जर समाज द्वारा सरकार को आरक्षण के लिए दी गई समय सीमा खत्म होने के बाद किरोड़ी सिंह बैंसला ने रेल लाइन पर बैठने का एलान किया है.यह ऐलान सवाई माधोपुर के मलारना डूंगर में चौहानपुरा मकसूदनपुरा में देवनारायण मंदिर पर महापंचायत के दौरान लिया गया.

दरअसल गुर्जर समाज शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और सरकारी नौकरियों में गुर्जर, रायका रेबारी, गडिया लुहार, बंजारा और गडरिया समाज के लोगों के लिए पांच फीसदी आरक्षण की मांग कर रहा है. जबकि मौजूदा समय में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के अतिरिक्त 50 प्रतिशत की कानूनी सीमा में गुर्जर समाज को अति पिछड़ा वर्ग श्रेणी के तहत एक फीसदी आरक्षण अलग से दिया जा रहा है.

जुर्गर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला का कहना है कि राज्य सरकार को अपने वादे पर खरा उतरना चाहिए। उन्होंने कहा कि हालात बदल गए हैं, इस बार हम चूकेंगे नहीं. राज्य में कांग्रेस सरकार से पांच फीसदी आरक्षण की मांग करते हुए बैंसला ने कहा कि कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में इस बारे में वादा किया था और अब हम कांग्रेस सरकार से सरकारी दस्तावेज बन चुके घोषणा पत्र के वादे को पूरा करने की मांग कर रहे हैं. हालांकि गुर्जर नेता अपनी मांग के समर्थन में रेल व सड़क मार्गों को अवरुद्ध करने की चेतावनी दे चुके हैं.वहीं दूसरी तरफ गुर्जर आंदोलन के मद्देनजर राजधानी जयपुर में उच्चस्तरीय बैठकें हो रही हैं ताकि आंदोलनकारियों से बातचीत की कोई राह निकाली जा सके.

गौरतलब है कि साल 2008 में राजस्थान में हुए गुर्जर आंदोलन के दौरान हुई पुलिस फायरिंग में 20 लोगों की मौत हो गई थी और इस घटना को वसुंधरा सरकार की हार की अहम् वजह माना गया था. तक़रीबन 10 साल पहले हुए इस आंदोलन में राज्य में ट्रेनें और बसों का चक्का जाम कर दिया गया था और ट्रेन की पटरियों पर गुर्जर समाज के लोग धरना प्रदर्शन करते नज़रआये थे. जिसके बाद राज्य सरकार ने 5 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया था लेकिन हाइकोर्ट में इसे खारिज कर दिया गया. इसके बाद 2011 में गहलोत सरकार ने एक फीसदी और वसुंधरा सरकार ने 2015 में फिर से 5 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया लेकिन दोनों ही कोर्ट में खारिज कर दिए गए.

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