Now Reading:
प्रियंका के शक्ति प्रदर्शन का चुनावी विश्लेषण- उत्तरप्रदेश की राजनीति का लेखाजोखा 
Full Article 5 minutes read

प्रियंका के शक्ति प्रदर्शन का चुनावी विश्लेषण- उत्तरप्रदेश की राजनीति का लेखाजोखा 

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की संजीवनी कितना काम करती है, ये तो भविष्य के गर्भ में समाया हुआ एक ऐसा सच है, जो निकट भविष्य में तय हो जाएगा लेकिन अगर बात करें लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक मानी जाने वाली प्रियंका गांधी वाड्रा ने आज लखनऊ में रोड शो किया. इस दौरान सडकों पर प्रियंका के समर्थन में एक बड़ा जन सैलाब देखने को मिला. इस दौरान प्रियंका के साथ उनके भाई और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी रहे. साथ ही कांग्रेस की युवा ब्रिगेड भी नज़र आई, संभवतः कांग्रेस उत्तर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी, ऐसे में इस मेगा शो के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने की तैयारी है. यह रोड शो एयरपोर्ट मोड़ – शहीद पथ तिराहा – अवध चौराहा- आलमबाग चौराहा – नाथा होटल तिराहा – हुसैनगंज चौराहा – बर्लिंगटन चौराहा – लालबाग तिराहा- हजरतगंज चौराहा – विक्रमादित्य चौराहा होते हुए नेहरू भवन तक गया. लखनऊ में प्रियंका गांधी के स्वागत में पोस्टर लगाए गए थे, इन पोस्टरों में प्रियंका गांधी वाड्रा को मां दुर्गा बताया गया था. भले ही ये सियासत में महिमामंडन की पराकाष्ठा रही हो लेकिन प्रियंका के रोड शो और सडकों पर उमड़े जनसैलाब को देखकर एक बार जरूर साफ़ हो गई है कि उत्तरप्रदेश की राजनीति में प्रियंका के आगमन से कांग्रेस को एक नई ऊर्जा मिली है, जो खासकर यूपी की सियासत में लोकसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएगी.

2014 के आम चुनाव का परिदृश्य कुछ और था जबकी 2019 में आलम कुछ और है

जहां एक तरफ सपा-बसपा के गठबंधन के लिए प्रियंका की राजनीतिक दस्तक खतरे की घंटी बताई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ यूपी में योगी का कुनबा भी प्रियंका की धमाकेदार एंट्री से परेशान, परेशानी की लकीरें राजनीति के धरातल पर दिखे ना दिखे पर राजनेताओं के चहरे पर साफ़ दिख रही है, यूपी में योगी-मोदी की जोड़ी के तोड़ के तौर पर प्रियंका राहुल की जोड़ी को देखा जा रहा है. अब बात करते हैं यूपी में कांग्रेस के परम्परा गत मतदाताओं की, यूपी में तथा कथित दलित, अल्पसंख्यक और हिन्दू सवर्ण ये कभी कांग्रेस के परम्परागत वोटर्स हुआ करते थे, ये वो समय था जब यूपी और केंद्र में कांग्रेस की तूती बोलती थी, लेकिन वक्त के साथ यूपी में सियासत का ध्रुवीकरण हुआ, जिस कारण हिन्दू सवर्ण बीजेपी के खेमे में खिसकता चला गया, वहीं अल्पसंख्यक, मुलायम के साथ हो लिए और दलितों ने मायावती का दामन थामन लिया, जिसके कारण लम्बे समय तक कांग्रेस को यूपी में ना सिर्फ सत्ता से दूर रहना पड़ा बल्कि पिछले लोकसभा चुनाव में तो कांग्रेस यूपी में अपने अस्तित्व तक को खोती नज़र आई, लेकिन 2014 के आम चुनाव का परिदृश्य कुछ और था जबकी 2019 में आलम कुछ और है.

यूपी में लोकसभा चुनाव ने कांग्रेस को बढ़त और बीजेपी को बड़ा नुकसान होते दिख रहा है

गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद से ही लगातार विपक्ष मजबूत होने लगा कर्नाटक चुनाव में बढ़त मिली और अभी हाल ही सम्पन्न हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में से 3 राज्यों में कांग्रेस की फतह ने उसे राजनीति के उभरते हुए धरातल पर ला खड़ा किया है, बेशक राहुल गांधी और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की मेहनत का फल हो सकता है, लेकिन मोदी सरकार से जनता की नाराजगी भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रही है. ठीक उसी तरह जैसे 2014 कांग्रेस के प्रति जनाक्रोश ने ही मोदी लहार का नाम ले लिया था, बहरहाल बात उत्तरप्रदेश की हो रही है, और सवाल ये है कि क्या प्रियंका का आगमन कांग्रेस के पुराने दिन वापस ला सकता है, तो इसका जवाब है, हां लेकिन ये हां उतना आसान नहीं है जितना कांग्रेसी समझ रहे हैं, क्योंकि प्रियंका के पास कोई जादुई छड़ी नहीं है जो वो घुमाएंगी और यूपी की लोकसभा की 80 सीटें उनके नाम हो जाएगी. कांग्रेस प्रियंका के बहाने यूपी में इंदिरा गांधी की छवि को भुनाना चाहती है, साथ ही वो अपने परंपरागत वोटरों को एकबार फिर अपने पाले में लाना चाहती है, लखनऊ के नेहरू भवन जाते समय बाबा साहेब आम्बेडकर के प्रतिमा का माल्यार्पण दलित वोटरों को लुभाने का ही संकेत था, वहीं अल्पसंख्यक वोटरों का रुझान भी इन दिनों सपा की तरफ से खिसककर वापस कांग्रेस की तरफ गया है, जो कांग्रेस प्रियंका के माधयम से पूरी तरह भुनाने का प्रयास करेगा, वहीं दूसरी तरफ सवर्ण हिन्दुओं को मोदी सरकार ने जो 10 % आरक्षण का लॉलीपॉप दिया है, वो लोग भलीभांति जानते हैं की चुनावी जुमले से बढ़कर कुछ और नहीं है, उसके अलावा गौरक्षा के नाम पर फसलों को बर्बाद करते गौवंशियों से जिस कदर उत्तरप्रदेश का किसान त्राहिमाम कर रहा है वो फैक्टर भी लोकसभा चुनाव में जरूर दिखाई देगा, कुल मिलाकर यूपी में राजनीति के बनते बिगड़ते समीकरणों के बीच एक बात साफ़ हो गई है जो बीजेपी के आतंरिक सर्वे में भी कहीं ना सामने भी आया है कि यूपी में लोकसभा चुनाव ने कांग्रेस को बढ़त और बीजेपी को बड़ा नुकसान होते दिख रहा है.

Input your search keywords and press Enter.