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यूपी पुलिस की अधूरी कहानी, अदालत को क्यों नहीं बताया कौन हैं शाहनवाज़ के क़ातिल ?

यूपी पुलिस की अधूरी कहानी, अदालत को क्यों नहीं बताया कौन हैं शाहनवाज़ के क़ातिल ?

मुजफ्फरनगर के कवाल गांव में हुए दंगों के मामले में अदालत ने आज अपना फैसला सुना दिया है। पांच साल की न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने कवाल कांड में सभी 7 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 27 अगस्त, 2013 को जानसठ कोतवाली क्षेत्र के कवाल गांव में मलिकपुरा के गौरव और उसके ममेरे भाई सचिन की हत्या कर दी गई थी। इस घटना में कवाल के शाहनवाज की भी मौत हुई थी। जिसके बाद महापंचायत के दौरान दंगा भड़क गया था। यह घटना मुजफ्फरनगर दंगे का कारण बनी, जिसमें 65 से ज्यादा बेगुनाहों की मौत हो गई। 
 
इस पूरे फैसले और अदालती कार्यवाही की बीच कई सवाल फाइलों के अंदर ही कहीं गुम हो गए हैं। इस पूरे दंगे का मास्टरमाइंड जिस शाहनवाज़ को बताया जा रहा था पुलिस ने उसके क़त्ल की गुत्थी को सुलझाना ही मुनासिब नहीं समझा। इस दंगे में चालीस से ज्यादा मौतें हुई थीं और चालीस हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गये। पहली बार यहां लोग अपने ही गांव और अपने ही कस्बों में रिफ्यूजी हो गये थे। इस दंगे की कहानी के अंदर तक पहुंचने से पहले उस इलाके को समझना बेहद ज़रूरी है, जहां से इसकी शुरुआत हुई थी। कवाल जानसठ तहसील में आता है। यही वो गांव है जहां से 27 अगस्त को दंगे दो समुदाए के बीच नफरत की चिंगारी भड़की और फिर उसे नेता हवा देते चले गए। ये वही कवाल गांव है जहां पिछले 66 साल से हिंदू और मुसलमान भाई-चारे और मुहब्बत के साथ रहते चले आ रहे थे। उस रोज़ जो कुछ भी हुआ वो बेहद खौफनाक था।

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पुलिस की रिपोर्ट कहती है कि, इस पूरे दंगे कि शुरुआत कवाल गाँव में एक जाट समुदाय लड़की के साथ एक मुस्लिम युवक शाहनवाज की छेड़खानी के बाद से हुई. बताया जाता है कि इस छेड़छाड़ की  शिकायत पर गौरव और शाहनवाज के बीच लड़ाई हुई. इस दौरान शाहनवाज ने गौरव की पिटाई कर दी. जिसके बाद गौरव ने लड़ाई की बात सचिन को बताई. सचिन, शाहनवाज को समझाने गांव पहुंचा. जहां शाहनवाज ने सचिन को छुरी मारने की सोची. लेकिन सचिन ने शाहनवाज की छुरी से उसे ही मार दिया. लेकिन छुरी मारने के बाद गांव के लोगों ने सचिन और गौरव को घेरकर मार दिया था. हालाँकि शाहनवाज के चाचा हाजी नसीम ने छेड़छाड़ की घटना से इनकार करते हुए कहा था कि शाहनवाज की बाइक से गौरव की साइकिल की टक्कर हो गई थी. जिसके बाद गौरव इस लड़ाई का बदला लेने आठ लोगों के साथ आ  धमका था. जहाँ शाहनवाज को मारकर भाग रहे सचिन और गौरव को गुस्साई भीड़ ने गांव के अगले चौराहे पर घेर कर मार दिया.
 
जिसके बाद मृतक सचिन और गौरव के परिजनों ने कवाल के सात मुस्लिम समुदाय के लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था. वहीं, शाहनवाज के पिता ने भी सचिन गौरव सहित उनके परिवार के पांच लोगों के खिलाफ भी एफआईआर की थी. जिसके बाद मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन सेल ने शाहनवाज को आरोपी मानते हुए अपनी फाइनल रिपोर्ट लगाकर  शाहनवाज की हत्या से जुडी केस क्लोज कर दिया था. साथ ही दोनों तरफ के लोगों को गिरफ्तार कर लिया।  मारे गए दोनों जाट समुदाय के युवकों के इंसाफ के लिए एक महापंचायत बुलाई गई। इसके बाद मुस्लिमों की तरफ से 30 अगस्त को हुई मुस्लिम महापंचायत हुई। उसके जवाब में नंगला मंदौड़ में हुई महापंचायत में बीजेपी के स्थानीय नेताओं पर यह आरोप लगा की उन्होंने जाट समुदाय को बदला लेने को उकसाया। वहीं 7 सितम्बर को दो समुदाय की हुई झड़प में महापंचायत से लौट रहे किसानों पर जौली नहर के पास दंगाइयों ने घात लगाकर हमला किया। आरोप है कि दंगाइयों ने किसानों के 18 ट्रैक्टर और 3  मोटरसाइकिलों को आग के हवाले कर दिया और उन लोगो ने शवों को नहर में फेक दिया। जिसके बाद दंगा फैलते ही शहर में कर्फ्यु लगा दिया गया.  मामले की गंभीरता को देखते हुए सेना,पी.ए.सी, सी.आर.पी.एफ और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को हजारों की  संख्या में तैनात किया गया था.  
 
वहीं अब मुजफ्फरनगर दंगें में फैसला आने के बाद  शाहनवाज के घर वालों का कहना है कि भले ही कोर्ट के फैसलें में दंगों के 7 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है लेकिन शाहनवाज को अभी तक न्याय नहीं मिला है.शाहनवाज के परिवार का आरोप है कि सचिन गौरव के साथ और भी लोग शाहनवाज को मारने आये थे लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया.
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