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फंड की कमी से जूझ रही है दुश्मनों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने वाली हमारी सेना, टीए/डीए बिल पर अस्थाई रोक

फंड की कमी से जूझ रही है दुश्मनों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने वाली हमारी सेना, टीए/डीए बिल पर अस्थाई रोक

No fund with Army

इन दिनों सेना की शौर्यता पर बनी फिल्म उरी दा सर्जिकल स्ट्राइक देख कर देश भर के सिनेमा घरों में बीजेपी के मंत्री चिल्ला चिल्ला कर लोगों से पूछ रहे हैं। ‘How is the Josh’ ‘How is the Josh’, ये खबर उन्हीं लोगों के लिए है। खबर है हमारी सेना इन दिनों फंड की कमी से जूझ रही है। ये खबर पहले भी आई थी लेकिन इस पर हंगामा नहीं हुआ था। लेकिन इस बार खूब शोर मच रहा है। खबर है की फंड की कमी की वजह से अब सेना में टीए/डीए बिल पास करने पर अस्थाई रोक तक लगा दी गई है।

सोमवार (4 फरवरी, 2019) को एक अधिसूचना जारी होने के बाद सशस्त्र बलों में खूब हंगामा हुआ। इस अधिसूचना में प्रिंसिपल कंट्रोलर ऑप डिफेंस अकाउंट (PCDA) ने घोषणा की कि सेना के पास धन की कमी हो गई है। जिसके के चलते बीट, असाइनमेंट और पोस्टिंग पर जाने वाले सैन्य अधिकारियों की प्रक्रिया पर जाने वालों केटीए/डीए बिल मान्य नहीं होगा। PCDA (अधिकारियों) ने कहा कि धन की कमी के चलते अस्थाई ड्यूटी और स्थाई ड्यूटी के अधिकारियों को टीए/डीए (यात्रा भत्ता), एडवांस और क्लेम को संबंधित प्रमुखों के तहत पर्याप्त धन प्राप्त होने तक संसाधित नहीं किया जा सकता। PCDA रक्षा मंत्रालय के तहत आता है।

जानना चाहिए की अधिसूचना जारी होने से सेना में खासी नाराजगी बढ़ गई, जिसमें करीब 42,000 अधिकारियों के अलावा 12 लाख जवाब तैनात हैं। मामले में एक सैन्य अधिकारी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, ‘ये संभावित रूप से सेना के दिन प्रतिदिन के कामकाज को प्रभावित कर सकता है। उदाहरण के लिए किसी भी समय अस्थाई ड्यूटी पर 50 फीसदी से अधिक अधिकारियों को बीट में जाने का काम सौंपा गया है।’

सेना में फंड की तंगी से महंगे हथियारों की खरीद में भी कटौती

खबर तो ये भी है कि, भारतीय सेना में फंड की तंगी है और कई महत्वपूर्ण साजो-सामान, गोला-बारूद की 15 से 20 फीसदी की भारी कमी हो गई है। इसकी वजह से भारतीय सेना मिसाइल और अन्य महंगे हथियारों, साजो-सामान की खरीद पर रोक लगा सकती है। हालत यह है कि अब सेना के पास कुछ ही दिन के गहन युद्ध के लिए हथियार, गोला-बारूद मौजूद हैं। हालाँकि सरकार इसे सिरे से खारिज कर रही है।

सूत्र बताते हैं कि जिन महंगे हथियारों की खरीद में कटौती होनी है, उनमें मल्टिपल रॉकेट लॉन्चर, स्पेशलाइज्ड माइन्स और एंटी टैंक हथियार शामिल हैं। सूत्रों ने संकेत दिया है कि आर्मी कमांडर सरकार से और फंड मांगने पर भी विचार कर रहे हैं।

गौरतलब है कि तीनों सेनाओं को हमेशा कम से कम 40 दिन तक के युद्ध के लिए तैयार रहना पड़ता है और उसके हिसाब से हथियारों, साजो-सामान की व्यवस्था करनी होती है।

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