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कानपुर में 1984 सिख दंगों की जांच के लिए एसआइटी गठित

कानपुर में 1984 सिख दंगों की जांच के लिए एसआइटी गठित

साल 1984 में कानपुर में हुए सिख विरोधी दंगों की जांच फिर शुरू होगी. उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्व डीजीपी अतुल की अध्यक्षता में चार सदस्यों की एसआइटी गठित की है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गठित की गई एसआइटी छह महीने के अन्दर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी.

दरअसल 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कानपुर में बड़े पैमाने पर दंगे भड़क उठे थे. जिसमे 300 से ज्यादा सिख समुदाय के लोगों के मारे जाने और सैकड़ों लोगों के बेघर होने की बात सामने आई थी. हालांकि रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट में कानपूर के दंगों में 127 मौतें होने का जिक्र किया गया था. प्रमुख सचिव (गृह) अरविंद कुमार के मुताबिक एसआइटी 1984 में कानपुर में हुए सिख विरोधी दंगों में दर्ज उन मामलों की दोबारा जांच करेगी,जिसमे सबूतों के आभाव में पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी।

एसआइटी की जांच में जघन्य अपराध के मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं अगर जरूरत पड़ी तो सीआरपीसी 173(8) के तहत मामले की जांच होगी। ऐसे मामले जिनमें जरूरत के बावजूद रिट या अपील नहीं की गई, एसआइटी उन्हें कोर्ट के सामने पेश करने की सिफारिश भी करेगी।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मनजीत सिंह की याचिका पर सरकार को कानपुर के बजरिया और नजीबाबाद इलाकों में सिख दंगों को दौरान दर्ज हुए मामलों की जांच के लिए एसआईटी के गठन के निर्देश दिए थे।

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