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नर्मदा नदी के ऋणमोचक कुंड में स्नान से मिलती है पितृ ऋृण से मुक्ति

नर्मदा नदी के ऋणमोचक कुंड में स्नान से मिलती है पितृ ऋृण से मुक्ति

वेद- पुराणों में वर्णित नर्मदा की महिमा के वास्तविक प्रमाण आज भी नदी के अलग-अलग तट पर उपलब्ध हैं. मध्य प्रदेश का आदिवासी ज़िला मंडला उद्गम के बाद नर्मदा को प्रथम विश्राम का स्थल माना जाता है. इस नदी के तट पर हुई खुदाई में संगमरमर के घाट और कुंड मिले हैं, जिन्हें जानकार सतयुग के ऋणमोचक कुंड बता रहे हैं, हालांकि उपरोक्त तथ्यों की पुष्टि होना अभी बाकी है.

नर्मदा नदी के किनारे कई सौ साल पहले घाट हुआ करते थे. इसी बात की पुख्ता करने के लिए कुछ लोगों ने नर्मदा के किनारे इन घाटों की खोज के लिए खुदाई का कार्यक्रम प्रारंभ किया. मंडला में अचानक संगमरमर से बने घाट और कुंड दिखाई दिए.

गांव के बुजुर्गों से यह सुना जाता रहा है कि नर्मदा नदी के किनारे कई सौ साल पहले घाट हुआ करते थे. इसी बात की पुष्टि करने के लिए कुछ लोगों ने नर्मदा के किनारे इन घाटों की खोज के लिए खुदाई का कार्यक्रम प्रारंभ किया. मंडला में अचानक संगमरमर से बने घाट और कुंड दिखाई दिए. इस कुंड के बारे में स्थानीय जानकार यह दावा कर रहे हैं कि  यह कुंड सतयुग में स्थापित तीन ऋृणों से मुक्त करने वाले कुंडों में से है. इस कुंड के बारे में कहा जाता है कि मनुष्य अपने जीवन में तीन ऋृण लेकर पैदा होता है. इन ऋृणों के कारण ही उसके जीवन में अलग-अलग बाधाएं सामने आती हैं.

नर्मदा पुराण में उल्लेख है कि मनुष्य छह मास भक्ति से पितृों का दर्पण करते हुए पितृ ऋृण से मुक्त होता है, जबकि नर्मदा के जल में ऋृण मुक्त कुंडों के स्नान के बाद वह तीनों तरह के ऋृणों से मुक्त हो जाता है. जानकारों के अनुसार अनेक ऋृषि मुनियों ने नर्मदा के किनारे विभिन्न प्रकार की साधनाएं की हैं. मानव जाति के कल्याण के लिए इन्ही ऋृषि मुनियों द्वारा ऋृण मुक्त कुंडों का निर्माण सतयुग में किया गया था. वर्तमान में मिले इन पुरातात्विक महत्व के कुंडों के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं का आना प्रारंभ हो चुका है. कहा जाता है कि कुंड के नीचे की तरफ शिवलिंग स्थापित है, जिसकी खोज की जा रही है. जिला विकास एवं जन जागृति समिति के कार्य सेवकों के अनुसार इन कुंडों का मिलना हमारे लिए एक अविश्वसनीय घटना है. संतोष तिवारी के अनुसार किदवंतियों में अभी तक प्रचारित घाटों की खोज से स्थानीय युवाओं का उत्साह काफी बढ़ा हुआ है. जन जागरण समिति के श्याम सुंदर के अनुसार वर्ष 2011 में होने वाले आदिवासी महाकुंभ के पूर्व कुंड और घाटों का मिलना एक रोमांचक घटना है. हम इन घाटों को महाकुंभ के पूर्व स्नान योग्य बनाने की कोशिश करेंगे.

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