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बीजेपी नेता ने नरेंद्र मोदी को कहा एहसान फरामोश, लिखा- आप कार्यकर्ताओं को गुलाम समझते हैं

बीजेपी नेता ने नरेंद्र मोदी को कहा एहसान फरामोश, लिखा- आप कार्यकर्ताओं को गुलाम समझते हैं

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता और एडवोकेट अजय अग्रवाल ने पीएम नरेंद्र मोदी के नाम खुला खत लिखा है। इस खत के ज़रिये उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोला है। अजय अग्रवाल ने इस बार टिकट नहीं दिए जाने से नाराज होकर बगावत के सुर बुलंद कर दिये हैं और पार्टी नेतृत्व को चुनौती दी है कि निष्पक्ष चुनाव होने पर भाजपा को 40 सीटें भी बमुश्किल नसीब होंगी।

अजय अग्रवाल ने सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिख कर कहा है कि उन्होंने गुजरात चुनाव में पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण भूूमिका निभायी थी और 2014 के चुनाव में रायबरेली की गांधी परिवार की पारंपरिक सीट पर भाजपा के लिए सर्वाधिक करीब पौने दो लाख मत हासिल कर पार्टी की प्रतिष्ठा बढाई थी, जबकि स्वयं श्री मोदी या किसी अन्य बड़े भाजपा नेता ने रायबरेली में प्रचार तक नहीं किया था। रायबरेली इससे पहले किसी भी विपक्षी उम्मीदवार को 35 हजार वाेट भी नहीं मिले थे।

अग्रवाल साल 2014 में रायबरेली सीट से सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं। पार्टी ने इन्हें यूपीए चेयरपर्सन के खिलाफ चुनाव में उतारा था। लेकिन, इस बार टिकट नहीं दिया। लगता है उन्‍हें पहले से इसका अनुमान था। शायद तभी उन्‍होंने पार्टी अध्‍यक्ष अमित शाह को चिट्ठी लिख कर कहा था कि अगर उन्‍हें टिकट नहीं मिला तो बनिया समुदाय का वोट बीजेपी को नहीं मिलेगा। उन्‍होंने यह दलील भी दी थी कि रायबरेली में बीजेपी के किसी उम्‍मीदवार को कभी उनके बराबर वोट नहीं मिला।

अजय अग्रवाल आरएसएस कार्यकर्ता रहे हैं। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के रहने वाले हैं। कानूूून की पढाई पूरी करने के बाद अजय ने 1987 में दिल्ली हाईकोर्ट से वकालत की शुरुआत की थी। बाद में वह सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने लग गए। अजय ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जनहित याचिकाएं भी दायर की। इनमें बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती के खिलाफ ताज कॉरिडोर केस और अब्दुल करीम तेलगी की संलिप्ता वाला फर्जी स्टांप पेपर घोटाला शामिल है।

लंबे समय तक भाजपा में रहने के बाद अजय अग्रवाल साल 2012 में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे। हालांकि, साल 2013 में वह फिर से घर वापसी करते हुए भाजपा में शामिल हो गए। अग्रवाल ने बोफोर्स मामले में हिंदुजा बंधुओं को सभी आरोपों से मुक्त करने के फैसले को 31 मई 2005 को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले साल 2005 में अग्रवाल की याचिका को स्वीकार कर लिया था।

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