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बाज़ और उल्लू की टीम करती है राष्ट्रपति भवन की निगरानी, ताकि कौवे ना पहुंचाएं नुकसान

बाज़ और उल्लू की टीम करती है राष्ट्रपति भवन की निगरानी, ताकि कौवे ना पहुंचाएं नुकसान

कौवों की दहशत का पुराना इतिहास रहा है लेकिन रुस के रक्षा विभाग ने कौवों की दहशत के लिए भी अनोखा जुगाड़ किया है। रूस में राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन और उसके आसपास की प्रमुख इमारतों की कौओं से हिफाजत करने के लिए रक्षा विभाग ने बाजों और उल्लुओं की टीम बनाई है। परिंदों की यह यूनिट 1984 में बनाई गई थी। अभी इसमें 10 से ज्यादा बाज और उल्लू हैं। उन्हें इसके लिए खास तरह की ट्रेनिंग दी गई है।
कौओं को देखते ही झपट पड़ते हैं
इस टीम में 20 साल की एक मादा बाज अल्फा और उसका साथी फाइल्या उल्लू है। ये कौओं की आवाज सुन लें या उन्हें आसमान में मंडराते देख लें तो चंद मिनटों में उन पर झपट पड़ते हैं। इन परिंदों के दल की देखरेख करने वाली टीम में शामिल 28 साल के एलेक्स वालासोव कहते हैं, ‘‘इसके पीछे मकसद सिर्फ कौओं से छुटकारा पाना ही नहीं है, बल्कि उन्हें इमारतों से दूर रखना है ताकि वे यहां अपना घोंसला न बना सकें।’’
कौओं के मल-मूत्र से गुंबदों का हो रहा था नुकसान 
वालासोव का कहना है, ‘‘कौए कई तरह की घातक बीमारियां फैलाते हैं। इनके बैठने और मल-मूत्र से क्रेमलिन के सुनहरे गुंबदों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा था। ये यहां फूलों क्यारियों को भी नुकसान पहुंचाते थे। ऐसे में क्रेमलिन के सुरक्षाकर्मियों के लिए इनकी गंदगी साफ करने से ज्यादा आसान इन्हें खदेड़ना था।’’
शिकारी पक्षी बना बेहतर विकल्प 
इमारतों की देखरेख करने वाली टीम के सुपरिटेंडेंट रहे पावेल माल्कोव का कहना है- सोवियत संघ के शुुरुआती दौर में क्रेमलिन और उसकी आसपास की इमारतों की रक्षा के लिए कौओं को मार गिराने वाले गार्ड रखे गए। कौओं को डराने के लिए शिकारी पक्षियों की रिकॉर्ड की गई आवाज का भी इस्तेमाल किया गया, लेकिन ये तरकीबें कारगर साबित नहीं हुईं। माल्कोव बताते हैं कि इसके बाद यहां शिकारी पक्षियों को ही बसाने का फैसला किया। अब रक्षा विभाग की टीम में शामिल इन पक्षियों का दल यहां स्थायी रूप से रहता है।
आखिर क्यों हुआ बाज और उल्लू का ही चुनाव ?
वालासोव का कहना है कि हर पक्षी के शिकार करने का अलग तरीका होता है। गोशाक्स (बाज की एक प्रजाति) बेहद तेज उड़ता है। कम दूरियों के लिए यह बहुत तेज है। उससे सामने आए कौए के बचने के बहुत कम मौके रहते हैं। वहीं, फाइल्या उल्लू के प्रशिक्षक डेनिस सिडोगिन बताते हैं कि वह रात में शिकार के लिए मुफीद है। यह बिल्कुल शांत रहकर शिकार करता है। कौओं से मुकाबले के लिए वह अकेला ही काफी है। वह अपनी बड़ी-बड़ी आंखों के साथ अपनी गर्दन को 180 डिग्री तक घुमा सकता है और अपनी जगह पर बैठे-बैठे ही पीछे देख सकता है।
क्रेमलिन के गार्ड्स का कहना है कि दुनियाभर में सशस्त्रबलों में पक्षियों की यूनिट का इस्तेमाल करती हैं। इन्हें कीट-पतंगों को डराने के लिए यहां तक की ड्रोन को मार गिराने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, क्रेमलिन की सुरक्षा में तैनात पक्षियों का इस्तेमाल ड्रोन गिराने में नहीं किया जाता, क्योंकि इसके लिए अब कई तरह की आधुनिक तकनीक मौजूद हैं।
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