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महाराष्‍ट्र में शिवसेना के अलग होने के बाद बिहार की राजनीति गरमायी, जानें क्या कहते हैं जदयू नेता
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महाराष्‍ट्र में शिवसेना के अलग होने के बाद बिहार की राजनीति गरमायी, जानें क्या कहते हैं जदयू नेता

भाजपा के 30 साल पुरानी सहयोगी दल शिवसेना के अलग होने के बाद एनडीए की दूसरी बड़ी पार्टी जदयू ने गठबंधन में आदर्श स्थिति के लिए को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाने की मांग की है. जदयू ने कहा है कि को-ऑर्डिनेशन कमेटी बन जाने से एनडीए के सभी घटक दलों के बीच आपसी संवादहीनता और वैचारिक भिन्नता खत्म होगी. सभी एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे.

इसके साथ ही पार्टी ने एनडीए का संयुक्त घोषणा पत्र बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है. जदयू के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने यह मांग उठायी है. बिहार में जदयू और भाजपा की सरकार में हिस्सेदारी है. इनके अलावा यहां एनडीए में लोजपा भी शामिल है. राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए में शिवसेना के अलग हो जाने के बाद 19 दल रह गये हैं, जिनमें लोकसभा में दूसरी बड़ी सहयोगी पार्टी जदयू होगी और राज्यसभा में 11 सदस्यों वाली एआइडीएमके बड़ी सहयोगी पार्टी होगी.

सत्ता में भागीदारी के सवाल पर महाराष्ट्र में एनडीए टूट गया है. शिवसेना ने अपनी अलग राह पकड़ ली है. झारखंड में पहले ही जदयू सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर चुका है. दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी वह अलग होकर अपनी ताकत आजमायेगा.
इधर, आजसू ने भाजपा से इतर अपने अलग 11 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है.अगले साल बिहार विधानसभा का चुनाव होना है. ऐसे में जदयू के इस प्रस्ताव को राजनीतिक हलके में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

क्या कहते हैं जदयू नेता

जदयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि एनडीए में को-ऑर्डिनेशन कमेटी बननी चाहिए. इससे घटक दलों के बीच आपसी टकराव से बचाव होगा. उन्होंने कहा कि भाजपा हर चुनाव अपने बलबूते लड़ना चाहती है, वह घटक दलों का साथ नहीं चाहती. यही कारण है कि झारखंड चुनाव में जहां भाजपा अकेले लड़ रही है, वहीं जदयू और लोजपा भी अलग-अलग लड़ रहे हैं. हालांकि, उन्होंने जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार पर भरोसा जताते हुए कहा कि जदयू अपनी भूमिका से संतुष्ट है.

झारखंड में पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी. महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा में तकरार पर उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां वैचारिक समानता वाली हैं और दोनों पुराने साथी हैं, लेकिन उनमें समन्वय की कमी है. ऐसे में चुनाव लड़ने की रणनीति में कभी-कभी ऐसा हो जाता है.

त्यागी बोले

एनडीए का संयुक्त घोषणा पत्र बनाने की जरूरत
को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनने से एनडीए के सभी घटक दलों में संवादहीनता व वैचारिक भिन्नता खत्म होगी
भाजपा हर चुनाव अपने बलबूते लड़ना चाहती, घटक दलों को नहीं दे रही तरजीह

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