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अगर राफेल समय पर IAF में शामिल हो जाता, तो बालाकोट हमले का असर कहीं ज्यादा होता: IAF चीफ

अगर राफेल समय पर IAF में शामिल हो जाता, तो बालाकोट हमले का असर कहीं ज्यादा होता: IAF चीफ

वायुसेना प्रमुख बी एस धनोआ ने सोमवार को कहा कि बालाकोट हवाई हमलों में तकनीक भारत के पक्ष में थी और यदि समय पर राफेल लड़ाकू विमान मिल जाते तो परिणाम देश के और अधिक पक्ष में होते। वह भविष्य की एयरोस्पेस शक्ति और प्रौद्योगिकी के प्रभाव पर एक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा, ”बालाकोट अभियान में, हमारे पास प्रौद्योगिकी थी और हम बड़ी सटीकता के साथ हथियारों का इस्तेमाल कर सके। बाद में हम बेहतर हुए है क्योंकि हमने अपने मिग -21, बिसॉन और मिराज-2000 विमानों को उन्नत बनाया था।” धनोआ ने कहा, ”यदि हमने समय पर राफेल विमान को शामिल कर लिया होता तो परिणाम हमारे पक्ष में और अधिक हो जाते।”

इससे पहले भी वायुसेना प्रमुख राफेल की अहमियत पर अपनी राय जाहिर कर चुके हैं। भारतीय एयर चीफ मार्शल बीरेन्द्र सिंह धनोआ ने पिछले साल 19 दिसंबर को राफेल से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा था, ‘कौन कहता है कि हमें राफेल की जरूरत नहीं है? सरकार कहती है कि हमें राफेल की जरूरत है, हम कहते हैं कि हमें राफेल की जरूरत है, सुप्रीम कोर्ट ने भी अच्छा फैसला दिया है, हमें इस प्रक्रिया में काफी देरी पहले ही हो चुकी है, हमारे प्रतिद्वंदियों अपना सिस्टम पहले ही अपग्रेड कर चुके हैं।’

भारतीय वायु सेना ने बीते 26 फरवरी को तड़के सीमापार पाकिस्तान स्थित बालाकोट में आतंकी गुट जैश ए मोहम्मद के ठिकाने को निशाना बनाया था, जिसमें बड़ी संख्या में आतंकवादी, प्रशिक्षक, शीर्ष कमांडर और जिहादी मारे गए थे। इस अभियान में मारे गए आतंकियों में जैश ए मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर का बहनोई युसूफ अजहर भी शामिल था। यह कार्रवाई जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को आतंकी गुट जैश ए मोहम्मद द्वारा किए गए आत्मघाती हमले के ठीक 12 दिन बाद की गई है। पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।

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