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गुस्साई भीड़ ने पुलिस को दौड़कर पीटा, लापता बेटी की शिकायत नहीं सुनने पर पिता ने की आत्महत्या   
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गुस्साई भीड़ ने पुलिस को दौड़कर पीटा, लापता बेटी की शिकायत नहीं सुनने पर पिता ने की आत्महत्या   

बेशक ये जंगल राज है. भीड़ पुलिस को पीट रही है भीड़ की आरजकता का ये नज़ारा मायानगरी मुंबई का है. जहां गुस्साई भीड़ जनता की अदालत में पुलिस कर्मियों को सज़ा दे रही है. दरअसल चेंबुर में एक शख़्स की बेटी कई दिनों से लापता थी, पिता ने पुलिस से कई बार गुहार लगाई. लेकिन मुंबई पुलिस मामला टालती रही.

हारकर शख़्स ने ख़ुदकुशी कर ली और जब पुलिस शव लेने पहुंची तो स्थानीय लोगों ने उनकी जमकर पिटाई कर दी. मृतक के साथ हुए अन्याय की कहानी सुनकर भीड़ का ये बर्ताव भले ही एक पल के लिए ठीक लग रहा हो. लेकिन जनता की अदालत में पुलिस के साथ ये बर्ताव ना संविधान के हिसाब से सही है और ना ही लोकतंत्र के लिए.

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गुस्साई भीड़ का शिकार कोई भी हो उसे अराजक ही कहा जाना चाहिए, लेकिन अब घटना को दूसरे पहलू से देखते हैं कि इस घटना के लिए जिम्मेदार कौन है ? जवाब बहुत सरल है, पुलिस. जब एक पीड़ित अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाने थाने आता है और पुलिस उसे दरकिनार कर देती है और यह सिलसिला कई दिनों तक चलता है. हताश होकर पीड़ित ख़ुदकुशी कर लेता है जिसके बाद भीड़ गुस्सा जाती है.

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तो इस घटना के लिए पुलिस ही जिम्मेदार है क्योंकि अगर वक्त रहते पुलिस ने पीड़ित की मदद की होती तो ये मामला इतना नहीं बिगड़ता लेकिन ये आम जनता को भी सोचना चाहिए की कातिल भीड़ हमारे समाज के लिए उतनी ही खतरनाक जितना आतंकवाद ये तरीका सदियों से दुनियाभर में आरजकता फैलात आया है और आज भी फैला रहा है…

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