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बालाकोट हमला पाकिस्तान को चेतावनी थी कि अब आतंकी हमले की कीमत चुकानी पड़ेगी: पूर्व वायुसेना प्रमुख धनोआ
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बालाकोट हमला पाकिस्तान को चेतावनी थी कि अब आतंकी हमले की कीमत चुकानी पड़ेगी: पूर्व वायुसेना प्रमुख धनोआ

भारत पूर्व एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने कहा है कि बालाकोट एयरस्ट्राइक देश के पिछले 47 सालों के युद्ध इतिहास में अपनी तरह की पहली गैर-सेना बचाव कार्रवाई थी। धनोआ ने कहा कि बालाकोट का मकसद पाकिस्तान सरकार और वहां छिपे आतंकी संगठनों को यह संदेश देना था कि भारत पर किए गए हमले की उन्हें कीमत चुकानी पड़ेगी। चंडीगढ़ में पंजाब सरकार की तरफ से आयोजित मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल में ‘अंडरस्टैंडिंग द मैसेज ऑफ बालाकोट’ कार्यक्रम पर चर्चा के दौरान धनोआ बोले- बालाकोट एक्शन का संदेश साफ और स्पष्ट था कि आतंकवादियों को पनाह या प्रशिक्षण देने की किसी भी भारत विरोधी कार्रवाई से सख्ती से निपटा जाएगा।

‘आतंकी हमलों के प्रति सरकार का रुख भी बदला’

बालाकोट पर चर्चा के दौरान पैनल में पूर्व एयर चीफ मार्शल धनोआ, स्क्वाड्रन लीडर समीर जोशी और रक्षा विशेषज्ञ प्रवीन साहनी शामिल थे। धनोआ ने आतंकी हमलों के प्रति भारत सरकार के बदलते रुख की तारीफ करते हुए कहा, “1993 के मुंबई बम धमाकों और 2008 के आतंकी हमले के बाद हमारी तरफ से कोई सैन्य प्रतिक्रिया नहीं हुई। लेकिन 2016 में उड़ी हमलों के बाद सेना ने पीओके में घुसकर आतंकियों के लॉन्च पैड तबाह किए। इससे पाकिस्तान को साफ संदेश मिल गया कि नई सरकार किसी बड़े हमले का जवाब सैन्य तरीके से देना जानती है।”

‘संदेश साफ था- तुम कहीं भी छिपो, हम तुम तक जरूर पहुंचेंगे’

धनोआ ने बताया कि 14 फरवरी को पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान को यह डर सताने लगा था कि भारत की तरफ से इसका जवाब दिया जाएगा, लेकिन सवाल सिर्फ दो ही थे- कहां और कब? हमने फैसला किया कि पाकिस्तान में बालाकोट में आतंकी संगठन जैश के ट्रेनिंग कैंप को तबाह करेंगे। सरकार और राजनीतिक इच्छाशक्ति भी साफ थी कि पाकिस्तान और जैश को यह संदेश पहुंचे कि भारत पर हमले की कीमत चुकानी पड़ेगी। फिर आप चाहे जहां भी हों। पाकिस्तान या पीओके। हम तुम तक जरूर पहुंचेंगे।

अगर अभिनंदन के पास मिग-21 की जगह राफेल होता तो स्थिति कुछ और होती
पूर्व वायुसेना प्रमुख ने कहा कि बालाकोट हमले के बाद अगले दिन जब पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट हमारे सामने आए, तो हम हम उन्हें ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाए। धनोआ ने कहा कि इससे एक बड़ी सीख मिली कि सीमित युद्ध में तकनीक सबसे ज्यादा मायने रखती है। उन्होंने पिछली सरकारों पर सवाल उठाते हुए कहा, “उन लोगों की जिम्मेदारी का क्या, जिन्हें यह तकनीक हमारे लिए लानी थी और वे 10 साल तक एयरक्राफ्ट के लिए बातचीत ही करते रह गए? क्या होता अगर पाकिस्तान के साथ आमने-सामने आने के दौरान कमांडर अभिनंदन वर्तमान के पास राफेल फाइटर जेट होता तो?”

 

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