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अलविदा अलविदा माहे रमजान अलविदा, हज़ारों की संख्या में मस्जिद पहुंचे लोग दुआ में आँखें हुईं नम
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अलविदा अलविदा माहे रमजान अलविदा, हज़ारों की संख्या में मस्जिद पहुंचे लोग दुआ में आँखें हुईं नम

ईद के आने की खुशी नहीं है मुझें
माह-ए-रमज़ान के जाने का ग़म है मुझें

अलविदा अलविदा ए माह-ए-रमज़ान अलविदा रमज़ान-उल-मुबारक के आखिरी ज़ुमा अलविदा की नमाज़ पढ़ने के लिए शुक्रवार को देश की तमाम मस्जिदों में भारी भीड़ रही। खुदा की बारगाह में पहुंच जहां लोग नम आंखों से अपने बख्शीश की दुआं मांगीं। वहीं मुल्क में अमनो अमान के लिए दुआएं खैर पढ़ी।

रमजान का पाक महीना रुखसत होने को है। आज रमजान उल मुबारक महीने का आखिरी जुमा है यानी अलविदा जुमा है। रोजेदारों के लिए इस जुमे की काफी अहमियत होती है। जुमे की नमाज के लिए मस्जिदों में तैयारियां पूरी चुकी हैं। रोजेदारों को इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है।

माना जाता है की अलविदा की नमाज में साफ दिल से जो भी दुआ की जाती है, वह जरूर पूरी होती है। अब ईद आने में महज चार से पांच दिन बाकी रह गए हैं। अगर चांद 4 मई को दिख गया तो भारत में ईद का त्यौहार 5 मई को, नहीं तो 6 मई को मनाया जाएगा। चलिए जानते हैं अलविदा जुमा का मतलब और उसका महत्व क्या होता है।

शुक्रवार को जिले के शहर से लेकर गांव कस्बों की मस्जिदों में अलविदा की नमाज़ बड़ी ही अकीदत के साथ अदा की गई। सुबह होते ही हर मुसलमान जुमातुल विदा की नमाज़ की तैयारी में लग गया था। रमज़ान माह का आखिरी जुमा होने के कारण नमाज़ का वक्त होते होते बड़ी तादाद में लोग मस्जिदों में पहुंचे। जहां मस्जिदें रोज़ेदारों की तादाद के सामने छोटी पड़ गई। इस पाक माह के विदा होने का गम हर रोज़ेदारों के चेहरों पर साफ छलकती दिखी। हर किसी की आंखें रमज़ान-उल-मुबारक के विदा होने के एवज में नम रही। इबादत के जज्बे से लबरेज़ रोज़ेदारों की तादाद मस्जिदों की तरफ रुख किए हुए बढ़ती रही और बड़ी ही अकीदत के साथ जुमातुल विदा की नमाज़ अदा की गई।

अलविदा जुमा क्या है?

अलविदा का मतलब है किसी चीज के रुखसत होने का यानी रमजान हमसे रुखसत हो रहा है। इसलिए इस मौके पर जुमे में अल्लाह से खास दुआ की जाती है कि आने वाला रमजान हम सब को नसीब हो। रमजान के महीने में आखिरी जुमा (शुक्रवार) को ही अलविदा जुमा कहा जाता है। अलविदा जुमे के बाद लोग ईद की तैयारियों में लग जाते है। अलविदा जुमा रमजान माह के तीसरे अशरे (आखिरी 10 दिन) में पड़ता है। यह अफजल जुमा होता है। इससे जहन्नम (दोजक) से निजात मिलती है।

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