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बच्चों की मौत पर भी नहीं पसीज रहा है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दिल ? निजी कार्यकर्म में शिरकत लेकिन अस्पताल नहीं पहुंचे
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बच्चों की मौत पर भी नहीं पसीज रहा है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दिल ? निजी कार्यकर्म में शिरकत लेकिन अस्पताल नहीं पहुंचे

Nitish

बिहार में इस समय त्रासदी जैसा माहौल है चमकी बुखार और भीषण गर्मी से लगतार मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। मुजफ्फरपुर में मासूमों की मौत का सिलसिला बदस्तूर जारी है। रविवार की देर रात मासूमों की मौत का आंकड़ा 111 तक जा पहुंचा। राज्य भर से मौत के आंकड़े कुछ इस तरह आ रहे हैं-

मुज़फ़्फ़रपुर में 101
मोतिहारी 10
वैशाली 15
सीतामढ़ी 2
समस्तीपुर 1
कुल मौत 129

दिल्ली दरबार में बैठे सरकार तक उन मांओं की चीख पहुंच गई जिन्होंने अपने कलेजे के टुकड़ों को खो दिया। चुनावी जीत के शोर में ये उन मांओं की चीख-पुकार का ही असर है कि जीत का जश्न रोक कर बीमार बच्चों का हाल पूछा जा रहा है। लेकिन बिहार के सरकार ऐसे हैं जो मुजफ्फरपुर का रास्ता ही भूल गए हैं। सुशासन का दावा और पारदर्शिता की दुहाई के बीच सरकार की यह कैसी बेरुखी है? सीएम नीतीश कुमार दिल्ली में बिहार के भविष्य के लिए डेरा जमाए हुए हैं और यहां बिहार के भविष्य लचर सिस्टम के आगे हार जा रहे हैं।

इस बीमारी से बिहार में हाहाकार मचा है. दिल्ली दरबार वाले नेता बैचेन हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन दिल्ली से मुजफ्फरपुर आ जाते हैं लेकिन बिहार के सरकार मुजफ्फरपुर जाने का जहमत नहीं उठा पाते. बिहार के सरकार को इस त्रासदी के बीच दिल्ली दरबार में हाजिरी लगाना ज्यादा कारगर दिखता है. सीएम नीतीश की मुजफ्फरपुर से ये बेरुखी देखकर अब लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या सीएम नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर का रास्ता भूल गए हैं?

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