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उन्नाव रेप: UP से ट्रांसफर हो सकता है केस, लापरवाह पुलिस, 33 बार नहीं सुनी पीड़ित बेटी की फरियाद
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उन्नाव रेप: UP से ट्रांसफर हो सकता है केस, लापरवाह पुलिस, 33 बार नहीं सुनी पीड़ित बेटी की फरियाद

उन्नाव रेप पीड़िता के हादसे की जांच का जिम्मा CBI का सौंप दिया गया है, वहीं उन्नाव रेप केस में सुप्रीम कोर्ट कल यानी गुरुवार को सुनवाई करेगा. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट को तलब किया है. इसके अलावा पीड़िता और परिवार पर हुए जानलेवा हमले के बाद अब यह केस UP से बाहर ट्रांसफर किया जा सकता है.

बुधवार को सुनवाई के दौरान सीनियर वकील वी गिरि ने कहा कि इस मामले में उत्तर प्रदेश से बाहर ट्रांसफर कर देना चाहिए. जनवरी में पीड़िता की मां ने सुप्रीम कोर्ट में केस को ट्रांसफर करने की याचिका दाखिल की थी. अपनी याचिका में मां ने कहा था कि इस मामले की उत्तर प्रदेश में निष्पक्ष जांच नहीं हो पाएगी, इसलिए मामले को लखनऊ की बजाए दिल्ली में ट्रांसफर किया जाए.

मंगलवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने रजिस्ट्री से रिपोर्ट तलब की. चीफ जस्टिस ने रजिस्ट्री से पूछा कि उन्नाव पीड़िता की मां से कब पत्र लिखा था और अब तक न्यायाधीशों के संज्ञान में यह मामला क्यों नहीं लाया गया था? एक सवाल ये भी है कि इस मामले में अदालत ने स्वतः संज्ञान लेने में काफी देर कर दी है.

जिले के एसपी ने 33 बार अनसुनी की पीड़िता की फ़रियाद
हादसे से पहले उन्नाव गैंगरेप पीड़िता के परिवार ने पुलिस में 33 बार पुलिस में शिकायत कर अपनी जान को खतरा बताया था. इतने के बावजूद पुलिस ने मामले को हल्के में लिया. हालात यहां तक बने कि पीड़ितों को अपना घर तक छोड़ना पड़ा.
पुलिस का कहना है कि इन शिकायतों में कोई दम नजर नहीं आने के कारण इन्हें खारिज कर दिया गया था. एक रिश्तेदार ने बताया कि जब से विधायक को गिरफ्तार किया गया था तभी से हमें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं.

पीड़ित परिवार ने धमकाने वाले के वीडियो भी बनाए थे और 13 जुलाई को भी पुलिस में शिकायत की थी. उन्नाव के एसपी एम.पी. वर्मा भी स्वीकार करते हैं कि 33 शिकायतें पुलिस को मिली थीं. इस मामले में पुलिस की लापरवाही साफ तौर पर उजागर हो रही है और पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान लग रहे हैं. सूबे की सरकार भी इन सवालों से बच नहीं सकती. क्या योगी जी आरोपियों को बचा रहे हैं ? आखिर पुलिस इतनी मजबूर क्यों है ?

उन्नाव गैंगरेप पीड़िता के चाचा को 18 घंटे की पेरोल मिली है. ये पेरोल उन्हें अपनी पत्नी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मिली है. उन्नाव के गंगाघाट कोतवाली इलाके के बालूघाट में आज उन्नाव गैंगरेप पीड़िता की चाची का अंतिम संस्कार होगा. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने परिजनों की याचिका पर पत्नी का अंतिम संस्कार करने के लिए पीड़िता के चाचा को 18 घंटे की पेरोल दी है. इससे पहले पीड़ित परिवार ने चाचा की रिहाई के लिए सरकार से गुहार लगाई थी और कुछ देर के लिए अस्पताल के बाहर ही धरना भी दिया था.

उम्मीद की जानी चाहिए कि अब इस मामले में और लापरवाही ना हो क्योंकि अब तक हुई लापरवाही से भी अगर सबक नहीं लिया गया तो ये साबित हो जाएगा कि योगी सरकार, मोदी सरकार और पुलिस सब मिलकर रेप के आरोपी और हत्या के आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बचा रहे हैं हालांकि ये कड़वा सच सभी जानते हैं कि कौन किसको बचा रहा है? बावजूद इसके अगर कुछ बाते परदे में हैं तो उसे जगजाहिर करने में सरकार की भलाई तो नहीं है …

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