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इसरो की तीसरी आंख ने उड़ाई पाकिस्तान की नींद, आतंकियों के घर के भीतर रहेगी नजर
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इसरो की तीसरी आंख ने उड़ाई पाकिस्तान की नींद, आतंकियों के घर के भीतर रहेगी नजर

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने चंद्रयान-2 लॉन्च कर इतिहास रच दिया है. तो वहीं दूसरी तरफ इसरो की कामयाबी से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. लेकिन उसकी बौखलाहट की असल वजह चंद्रयान-2 नहीं बल्कि कुछ और है. तो चलिए आपको बताते हैं पाकिस्तान की बौखलाहट की असल वजह

दरअसल चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग के बाद इसरो के वैज्ञानिक अब जल्द ही कार्टोसैट-3 लांच करने का रहा है. जिसने पाकिस्तान की नीदें उड़ा दी है सूत्रों के मुताबिक सितंबर अंत या अक्टूबर के महीने में कार्टोसैट-3 को लॉन्च किया जा सकता है. बताया जा रहा है कि वैसे तो इस सैटेलाइट का काम आपदा और और ढांचागत विकास के लिए मदद करना है, लेकिन इसका इस्तेमाल देश की सीमाओं की निगरानी के लिए भी किया जाएगा. कार्टोसैट-3 की खासबात ये है कि ये पाकिस्तान के आतंकी कैंपों पर पैनी नजर रखेगा.

कार्टोसैट-3,कार्टोसैट सीरीज का नौवां सैटेलाइट है. इसमें लगा कैमरा इतना ताकतवर है कि वह अंतरिक्ष से जमीन पर 1 फीट से भी कम की ऊंचाई तक की तस्वीर ले सकता है वो भी एचडी. यानी कार्टोसैट-3 में लगे कैमेरे व्यक्ति की कलाई में बंधी घडी का भी समय बता देगा. जो सर्जिकल और एयर स्ट्राइक जैसे अहम मौकों पर काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. ध्यान देने वाली बात ये है कि पाकिस्तान में स्थित आतंकी कैम्पों पर हुई सर्जिकल और एयर स्ट्राइक में कार्टोसैट उपग्रह काफी मददगार साबित हुए थे.

आपको बता दें कि अमेरिकी कंपनी डिजिटल ग्लोब का जियोआई-1 सैटेलाइट 16.14 इंच की ऊंचाई तक की तस्वीरें ले सकता है. वहीं, इसी डिजिटल ग्लोब का वर्ल्डव्यू-2 उपग्रह 18.11 इंच की ऊंचाई तक की तस्वीरें ले सकता है. इसे पृथ्वी से 450 किमी ऊपर की कक्षा में स्थापित किया जाएगा.लेकिन इसरो के कार्टोसैट-3 में लगे कैमरे अंतरिक्ष से जमीन पर 0.25 मीटर यानी 9.84 इंच की ऊंचाई तक तस्वीरें ले सकता है.

गौरतलब है कि कार्टोसैट सीरीज का पहला सैटेलाइट कार्टोसैट-1, 5 मई 2005 को लॉन्च किया गया था. जिसके 10 जनवरी 2007 को कार्टोसैट-2,28 अप्रैल 2008 को कार्टोसैट-2ए,12 जुलाई 2010 को कार्टोसैट-2बी तो वहीं 22 जून 2016, 15 फरवरी 2017, 23 जून 2017 और 12 जनवरी 2018 को कार्टोसैट-2 सीरीज के सैटेलाइट लॉन्च किए गए थे.

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