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सोनभद्र में आदिवासियों की हत्या के मामले की वामदलों ने आलोचना की
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सोनभद्र में आदिवासियों की हत्या के मामले की वामदलों ने आलोचना की

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में जमीन के विवाद को लेकर आदिवासी समुदाय के कुछ लोगों के सामूहिक हत्याकांड की वामदलों ने कड़ी आलोचना की है। माकपा पोलित ब्यूरो ने शनिवार को इस घटना की निंदा करते हुये इसके लिये उत्तर प्रदेश प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उल्लेखनीय है कि जमीन विवाद के चलते इस हफ्ते हुए खूनी संघर्ष में 10 लोगों की जान चली गई थी।

पोलित ब्यूरो ने पार्टी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा घटनास्थल का दौरा कर भेजी गयी रिपोर्ट के आधार पर जारी बयान में कहा है कि सोनभद्र के उम्भा गांव में तीन महिलाओं सहित दस आदिवासियों की भू माफिया गिरोह ने कथित तौर पर हत्या कर दी। पार्टी ने कहा कि पीड़ित परिवार विवादित जमीन पर सात दशक से खेती कर रहे थे लेकिन किसी भी सरकार ने इन परिवारों को जमीन का पट्टा आवंटित नहीं किया।

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पोलित ब्यूरो ने इस घटना के लिये स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुये कहा कि पीड़ित परिवारों ने सरकार को पहले ही सूचित कर दिया था कि स्थानीय भू माफिया उक्त जमीन पर खेती नहीं करने की उन्हें धमकी दे रहे हैं। इसके बावजूद सरकार ने आदिवासियों की सुरक्षा के लिये कोई कार्रवाई नहीं की।

पार्टी ने राज्य सरकार से उन सभी आदिवासी परिवारों को जमीन का पट्टा आवंटित करने की मांग की है जिस पर वे पिछले सात दशक से खेती कर रहे हैं। पार्टी ने सामूहिक हत्याकांड के आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग की है।

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इस बीच भाकपा के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अनजान ने भी इसे नृशंस सामूहिक हत्याकांड बताते हुये इस घटना की निंदा की है। अनजान ने कहा कि इस कथित वारदात को राज्य की योगी सरकार से संरक्षण प्राप्त भू माफिया गिरोहों ने अंजाम दिया है। इसका मकसद दलित, आदिवासी और शोषित समुदायों को भयभीत करना है।

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