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कौन है लक्ष्मी और कैसे लक्ष्मी से प्रभावित हुईं दीपिका पादुकोण ? पूरी कहानी
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कौन है लक्ष्मी और कैसे लक्ष्मी से प्रभावित हुईं दीपिका पादुकोण ? पूरी कहानी

मुंबई: सोमवार की सुबह जब बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण ने अपनी फिल्म छपाक का फर्स्ट लुक शेयर किया तो पूरी दुनिया भर में इसके चर्चे होने लगे। फिल्म एक एसिड पीड़ित लड़की की है। जिसे महज़ 15 साल की उम्र में तेज़ाब से जला डाला गया था। दीपिका पादुकोण उसी लक्ष्मी के किरदार में हैं और मेघना गुलजार इसका निर्देशन कर रहीं हैं।

लक्ष्मी का रिश्ता अलोक से टूट गया तो वो पैसे पैसे के लिए मजबूर हो गईं थी। कई कई दिनों तक उन्हें भूका रहना पड़ा और अपनी बच्ची के लिए भी दूसरों के आगे भीख माँगना पड़ा। एक दिन उन्हें मेघन गुलज़ार ढूंढ़ते हुए दिल्ली आईं। फिर उन्होंने उनके घर का भाड़ा दिया और राशन भरवाया। तब उन्होंने बताया की वो उनकी ज़िन्दगी फिल्म बनाना चाहती हैं।

दीपिका फूट फूटकर रोईं
मुंबई में पहली बार उन्होंने दीपिका पादुकोण से मुलाक़ात की। लक्ष्मी फिलाहल इस पूरे मामले में ज़्यादा कुछ नहीं बताना चाहती हैं लेकिन उन्होंने इतना ज़रूर बताया की जब लक्ष्मी ने उन्हें अपनी कहानी बताई थी दीपिका फुट फूटकर रोने लगीं। उन्होंने फ़ौरन पीहू को उनकी गॉड से उठाकर अपने सीने से लगा लिया। जब मैं वहां से निकलने लगी तो कई बार दीपिका ने मुझे गले लगाया और भरोसा दिलाया की छपाक में उनके दर्द को वो पूरी दुनिया के सामने रखेंगी।

कौन है लक्ष्मी ?
लक्ष्मी ने भी फिल्म का पोस्टर देखा और बेहद भावुक भी हो गईं। लक्ष्मी कहतीं हैं की जब उनके साथ ये सब हुआ था तब उन्हें लगा भी नहीं था की कोई उन्हें अपनाएगा। लेकिन उन्हें बहुत प्यार मिला और आज वो अपने बच्चे के साथ बेहद खुश भी हैं। अपने साथ हादसे को लेकर पहली बार लक्ष्मी ने हमसे खुलकर बात की अपना दर्द बांटा।

लक्ष्मी ने बताया की वो 15 साल की थी और बड़ी होकर एक कामयाब सिंगर बनना चाहती थी। मगर सिर्फ एक इंकार ने उसके सारे सपनों को जला कर रख दिया और उसकी जिंदगी बदल गई। उनके ऊपर एसिड अटैक हुआ। वो भी ऐसा-वैसा हमला नहीं बल्कि वो हमला जो शरीर के साथ-साथ आत्‍मा को भी जला देता है। इस हमले के जख्‍म से रिसने वाले मवाद तो एक समय के बाद बंद हो जाते हैं मगर इसका दर्द पूरी जिंदगी रिसता रहता है।

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आप ज़िंदा रहकर भी समाज के लिए अछूती हो जातें हैं। कोई आपके करीब तक नहीं आना चाहता। लोग किसी की ज़िन्दगी की दुआ करते हैं मगर एसिड विक्टिम के लिए मौत से बेहतर कोई दवा नहीं है। आपके अपने आपका दर्द देख कर आपकी मौत की दुआ मांगते हैं। अगर आप फिर भी बच गए तो आपकी ज़िन्दगी मौत से बद्तर हो जाती है।

इस हमले में हो सकता है कि शिकार होने वाले की जान चली जाए। लेकिन वो बच गया तो समाज उसे दोयम दर्जे का नागरिक बना देता है।
जिंदगी बेहद दर्दनाक हो जाती है और वो तिल-तिल कर जीने को मजबूर हो जाता है। हम बात कर रहे हैं एसिड अटैक (तेजाबी हमले) की। अगर हमारे चेहरे पर कोई दाग लग जाता है तो हम उसे जल्‍द से जल्‍द साफ करने के लिये दौ़ड़ते है। और तबतक बेचैन रहते हैं जबतक चेहरा पहले जैसा ना हो जाये।

लड़ाई लड़ो जब तक लड़ सकते हो

लेकिन लक्ष्मी ने हर हालत से लड़ाई की और जीती भी। आज लक्समी कहती हैं की एक वक़्त उन्हें ऐसा लगा था की अब मौत के सिवा उनके पास कोई दसूरा रास्ता नहीं है। कई बार उन्होंने ख़ुदकुशी की कोशिश भी की लेकिन कामयाब नहीं हो पाई। तब उन्हें लगा की मौत भी उन्हें आसानी से नहीं मिलेगी, उसके लिए भी लड़ना पड़ेगा। आज लक्ष्मी देश में एसिड अटैक की शिकार लड़कियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।

2005 में हुआ था हमला

लक्ष्मी का जन्म 1990 के एक बेहद मध्यम परिवार में हुआ था। लक्ष्मी भी दूसरी लड़कियों की तरह खूबसूरत, शांत, और खुशनुमा स्वाभाव की थी। मगर उसने कभी सपने में भी नही सोचा होगा कि 15 साल की उम्र में उस से दुगनी उम्र का कोई सरफिरा आदमी अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर एक ऐसे गुनाह को अंजाम देगा जो उसकी पूरी जिन्दगी को हमेशा के लिए बदल देगा। ये बात 2005 की है है उस समय वो अपने स्कूल से लौट रही थी कि एक 32 साल के शख्स ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया था। वो बार बार लक्ष्मी को शादी का प्रस्ताव देता और हर बार वो इंकार कर देती। उस दिन भी जब वो अपने स्कूल से लौट रही थी तब उस सनकी शख्स ने उसे रोका और अपने दोस्तों के साथ मिलकर दिन दिहाड़े और भरे बाजार उस पर एसिड अटैक  कर दिया।

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इस हमले में लक्ष्मी का चेहरा बुरी तरह जल गया था। लक्ष्मी के चहेरे के साथ-साथ शारीर का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह झुलस गया था। उसके परिवार ने पूरे जीवन भर की कमाई का पाई-पाई बेटी के इलाज पर खर्च कर दिया। इस भयानक घटना के बाद लक्ष्मी तो जिन्दा बच गयी मगर उनकी सूरत और शरीर पर गहरे घाव छोड़ दिए। इन घावों की वजह से होने वाली शारीरिक तकलीफ से कहीं ज्यादा वो तकलीफ थी जो ज़माने के बदले हुए रवैये से उसे हुई। एक लड़की ही ये ज्यादा अच्छी तरह समझ सकती है कि उस के लिए चेहरे का खुबसूरत होना कितना मायने रखता है। जब भी लक्ष्मी कहीं जाती तो लोग उसे अजीब तरीके से देखते थे। ये बात उसे बहुत दुःख पहुंचाती थी। लक्ष्मी का परिवार इस बात से खुश तो था की उसकी जिन्दगी खतरे से बाहर है मगर उतना ही लक्ष्मी के भविष्य को लेकर चिंतित भी रहता था।

खुद आरोपियों को दिलाई सजा

लक्ष्मी ने लेकिन हार नहीं मानी और डट कर जमाने के सामना किया। न सिर्फ उस ने ज़माने के नजरिये को डिफेंड किया बल्कि 2006 में लक्ष्मी ने इन तीनो आरोपियों के खिलाफ Delhi High Court में एक PIL दाखिल की और तीनो आरोपियों को जेल की हवा भी खिलाई। लक्ष्मी ने अपनी PIL में न सिर्फ आरोपियों को सजा बढ़ाने, मुआवजा दिलवाने की बात की बल्कि सरकार को मजबूर किया कि वो मौजूदा कानून में संशोधन करे और साथ ही साथ acid की open बिक्री पर भी बंदिश लगाये। ये लड़ाई कर सालों तक चली। जिंदगी की इसी लड़ाई के दौरान 2012 में उसके पिता की भी मृत्यु हो गयी। वो घर मे इकलौते कमाने वाले थे।

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उसका बड़ा भाई भी dysfunctional lungs नाम की बीमारी से ग्रस्त हो गया। माँ का सारा समय भाई का ध्यान रखने में चला जाता था। लक्ष्मी ने परिवार चलाने के लिए सिलाई तथा beautician का काम सीखा और थोड़ा बहुत पैसे कमाने लग गई। एक लड़की जिस का खुद का face अब पहले जैसा खूबसूरत न रह गया हो वो अब दूसरों के पहनावे और face को सजाती थी। लोग उस से सहानुभूति तो रखते थे मगर आम लोगों जैसा व्यवहार नही करते थे। लक्ष्मी की मेहनत ने आखिरकार रंग लाया। कानून में संशोधन होने में अगले 7 साल लग गए और 2013 में ये संशोधन भी हो गया।

जब लक्ष्मी अपनी जिंदगी के सब से बुरे दिनों को संभालने में झूझ रही थी तो उसकी मुलाकात आलोक दीक्षित नाम के आदमी से हुई जो कि journalist तथा social activist भी थे। इस पुरे सफ़र में उन्होंने laxmi का भरपूर साथ दिया। आलोक ने बहुत गहराई से जाना कि अगर एक लड़की के पास बाहरी खूबसूरती न रह जाये तो उसे कितना ही कठिन जीवन जीना पड़ता है। 2014 में उन्होंने एक दूसरे के साथ बिना विवाह के साथ रहने का निर्णय भी लिया।

लक्ष्मी ने बताया कि, मेरे चेहरे की 7 बड़ी surgery होने के बाद मैंने कभी नही सोचा था कि मुझे कभी कोई soulmate मिलेगा। soulmate तो दूर की बात मैं तो सोचती थी कि मुझे तो कोई अपनाने को भी तैयार नही होगा। दोनों कई सालों तक लिव इन में रहे फि Nov 2015 में लक्ष्मी और आलोक एक नन्ही परी के माता पिता बन गए। उस नन्ही परी का नाम पीहू है। लेकिन अलोक से भी उनके रिश्ते टूट गए आज लक्ष्मी को अपने घर का किराया देने तक के लिए पैसे नहीं हैं।

 

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