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बिहार में बच्चों की मौत के बीच चिकित्सक हड़ताल पर, ओपीडी सेवा बाधित, लौटाये जा रहे मरीज
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बिहार में बच्चों की मौत के बीच चिकित्सक हड़ताल पर, ओपीडी सेवा बाधित, लौटाये जा रहे मरीज

बिहार में बच्चे मर रहे हैं। बढ़ी रही संख्या के बीच दिल्ली से स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन तक वहां पहुंच गए, लेकिन बिहार के CM नीतीश कुमार अब तक नहीं पहुंचे। इस बीच अब एक नयी मुसीबत सामने आ गई है। बिहार में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से बच्चों की जा रही जानें और लू के कहर से हो रही मौतों के बीच बिहार के डॉक्टर हड़ताल पर हैं। डॉक्टरों की हड़ताल से बिहार में स्थिति भयावह होने लगी है। डॉक्टरों की हड़ताल का असर अस्पतालों में दिखने लगा है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि चिकित्सकों की हड़ताल के बावजूद इमरजेन्सी सेवा बहाल है। साथ ही एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों का इलाज जारी रहेगा।

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जानकारी के मुताबिक, बिहार में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से बिहार में सौ से ज्यादा बच्चों की जानें अब तक जा चुकी हैं। बिहार में पांच दर्जन से ज्यादा लोगों की मौतें लू के कारण हो चुकी हैं। वहीं, पटना, मुजफ्फरपुर समेत सूबे में ओपीडी सेवा बाधित है। चिकित्सकों की हड़ताल के कारण मरीजों को ओपीडी सेवा बाधित होने के कारण लौटाया जा रहा है।

राजधानी के न्यू गार्डिनर अस्पताल में इलाज के लिए सोमवार की सुबह पहुंचे मरीजों को बिना इलाज किये लौटा दिया गया। अस्पताल प्रबंधन की ओर से मरीजों को बताया गया कि आज हड़ताल होने के कारण ओपीडी सेवा बाधित है, अस्पताल में सिर्फ इमरजेन्सी सेवा बहाल है। इस संबंध में अस्पताल के प्रभार डॉ एनसी प्रसाद ने कहा कि हड़ताल के कारण ओपीडी सेवा बाधित है। सिर्फ इमरजेन्सी सेवा बहाल है। वहीं, मुजफ्फरपुर में भी ओपीडी सेवा बाधित होने से मरीजों को हलकान होना पड़ रहा है। एसकेएमसीएच के अधीक्षक सुनील शाही ने कहा है कि हड़ताल के कारण ओपीडी में मरीजों का इलाज नहीं किया किया जा रहा है। हालांकि, इमरजेन्सी और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों का इलाज जारी रहेगा।

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पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों के साथ हुई हिंसा के विरोध में इंडियन मेडिकल असोसिएशन के आह्वान पर देश भर के चिकित्सकों के साथ बिहार के चिकित्सक भी आज हड़ताल पर हैं। चिकित्सकों की मांग है कि मेडिकल प्रफेशनल्स के साथ होनेवाली हिंसा से निबटने के लिए केंद्र सरकार को कानून बनाये। साथ ही अस्पतालों को सेफ जोन घोषित करने के साथ सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सरकार को उठाने की बात कही है।

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