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देश के चर्चित एनकाउंटर: चंदन तस्कर वीरप्पन और बटला हाउस एनकाउंटर को लोग आज भी नहीं भूले हैं
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देश के चर्चित एनकाउंटर: चंदन तस्कर वीरप्पन और बटला हाउस एनकाउंटर को लोग आज भी नहीं भूले हैं

हैदराबाद एनकाउंटर देश के चर्चित एनकाउंटर में शुमार हो गया है, पूरे देश में इस एनकाउंटर की चर्चा हो रही है. हरेक की जुबान पर इस एनकाउंटर की चर्चा है. लेकिन इससे पहले भी देश में कई एनकाउंटर हुए हैं जिन्होने पूरे देश को झकझोर दिया था. इनमें से एक था चंदन तस्कर वीरप्पन का एनकाउंटर और दूसरा था बटला हाउस एनकाउंटर. आइए जानते हैं इन एनकाउंटर के बारे में-

चंदन तस्कर वीरप्पन के नाम से तो सभी परिचित हैं. इस पर एक फिल्म भी बन चुकी है. वीरप्पन एक खतरनाक डाकू भी था, वह हाथी दांत की तस्करी करता था,कर्नाटक के जंगलों में उसकी हुकूमत चलती थी. इस पकड़ने के लिए दो राज्यों की पुलिस की कई टीमें लगाईं गई, ये टीमें कई सालों तक जंगलों की खाक छानती रहीं लेकिन सफलता नहीं मिली.

पुलिस के लिए चुनौती बन चुके वीरप्पन को पकड़ने की जिम्मेदारी आईपीएस अफसर के विजय कुमार को दी गई, वे एसटीएफ के प्रमुख थे, वर्तमान में वे गृहमंत्री अमित शाह के जम्मू कश्मीर मामलों के सलाहकार हैं. कर्नाटक और तमिलनाडु राज्य तक वीरप्पन का आतंक फैला हुआ था. दक्षिण भारत के जंगल वीरप्पन के कब्जे में थे, जंगल में बैठकर वीरप्पन हाथी दांत और चंदन की खुलेआम तस्करी किया करता था. उस पर पुलिसकर्मियों की हत्या करने का भी आरोप था, वीरप्पन मुखबिरी करने वालों को मौत के घाट उतार दिया करता था. उसका आंतक जब सिर चढ़कर बोलने लगा तो पुलिस ने उसे ठिकाने लगाने की ठान ली.

वीरप्पन को पकड़ने के लिए अधिकारी और पुलिस के जवान जंगलों में डेरा डाल कर रहने लगे. कई दिनों की मेहनत के बाद आईपीएस के विजय कुमार को खबर मिली कि वीरप्पन अपनी आंख का आपरेशन करने की योजना बना रहा है. विजय कुमार ने तय कर लिया कि वीरप्पन जब आंख का आपरेशन कराने के लिए डाक्टर के पास आएगा तभी उसे पकड़ लिया जाएगा. पूरी रणनीति तैयार कर ली गई. पुलिस ने अपने एक अधिकारी को वीरप्पन की गैंग में शामिल करा दिया, जिस व्यापारी से वीरप्पन मदद लेता था उसे भी पुलिस ने अपनी तरफ मिला लिया. सबकुछ पुलिस के मुताबिक हो रहा था.

वर्ष 2004 में तमिलनाडु के जंगलों के बीच से जब एक एंबुलेंस में बैठकर वीरप्पन आ रहा था तभी पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेर लिया, पुलिस को देख वीरप्पन ने फायरिंग शुरू कर दी, पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की जिसमें वीरप्पन वहीं ढेर हो गया.

बटला हाउस एनकाउंटर
आतंकियों ने 13 सितंबर 2008 को देश की राजधानी दिल्ली में सीरियल बम ब्लास्ट किए. जिसमें 26 लोग मारे गए और 133 घायल हुए. इस घटना को आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन ने अंजाम दिया था. घटना के छह दिन बाद ही पुलिस को सुचना मिली कि इंडियन मुजाहिद्दीन के पांच आतंकी बटला हाउस के एक मकान में बैठे हैं. जिसके बाद पुलिस ने इसे चारों तरफ से घेर लिया. बटला हाउस की बिल्डिंग नंबर एल-18 में फ्लैट नंबर 108 में यह आंतकी बैठे थे.

पुलिस ने सुबह 11 बजे की इस जगह की घेराबंदी कर दी. इस आपरेशन में पुलिस के जवानों ने बड़ी बहादुरी दिखाई. पुलिस को देख आंतकियों ने गोलियां चलाना शुरू कर दिया. जिसमें पुलिस के जवानों को भी गोलियां लगी. पुलिस और आतंकियों के बीच 10 मिनट तक गोलियां चलती रहीं. इस एनकाउंटर में एक पुलिस के अधिकारी शहीद हो गए थे.

 

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