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नीच कहकर होती थी रैगिंग, जूनियर डॉक्टर पायल तड़वी, आत्महत्या के 4 दिन बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं
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नीच कहकर होती थी रैगिंग, जूनियर डॉक्टर पायल तड़वी, आत्महत्या के 4 दिन बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं

मुंबई: मृतक डॉक्टर की पायल तड़वी की मां का आरोप है कि जाति सूचक शब्दों के पायल से रैगिंग होती थी। मां का कहना है कि उनकी बेटी खुद ऐसा कदम नहीं उठा सकती, उसे मारा गया है। मुंबई के नायर अस्पताल में महिला जूनियर डॉक्टर के आत्महत्या करने के 4 दिन बाद भी मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की। जूनियर डॉक्टर के परिजनों ने 3 महिला डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

दरअसल पायल तड़वी (23) साल की एक डॉक्टर ने रैगिंग से तंग आकर 22 मई को आत्महत्या कर ली थी। परिवार का कहना है कि सीनियर डॉक्टर आदिवासी होने की वजह से पायल का मजाक उड़ाते थे और उसे जातिसूचक शब्द कहते थे। यह भी कहा जा रहा है कि पीड़िता का ऐडमिशन रिजर्वेशन कोटे से हुआ था जिस वजह से उन पर कटाक्ष किया जाता था।

पुलिस का ढुलमुल रवैया पैदा करता है संदेह
मृतक की मां ने कहा कि उन्होंने हॉस्टल अथॉरिटी से इस बारे में शिकायत की थी लेकिन फिर भी कोई ऐक्शन नहीं लिया गया। उधर मामले में पुलिस का ढीला रवैया भी सामने आया है। पायल के आत्महत्या करने के इतने दिन बीत जाने के बाद भी मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

पुलिस ने कहा, ‘हमने अत्याचार का मामला दर्ज किया है। तहकीकात चालू है।’ डॉक्टर की मां ने आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘जब भी पायल से फोन पर बात होती थी तो वह कहती थी कि उसके साथ बहुत रैगिंग की जा रही है। जातिसूचक शब्द कहे जाते हैं जो तकलीफ देते हैं। वह कहती थी कि उसे पढ़ाई करनी है। वह खुद ऐसा कदम नहीं उठा सकती, उसे मारा गया है।’

ऐंटी रैगिंग ऐक्ट की चर्चा तेज
मामले के बाद से अस्पताल में हलचल काफी बढ़ गई है। एक तरफ इसके लिए लोग अस्पताल के डीन को जिम्मेदार ठहरा उनके सस्पेंशन की मांग कर रहे, वहीं तड़वी समाज के लोग तत्काल रूप से आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहें हैं। बता दें कि मुंबई जैसे मेट्रो शहर में रैगिंग की बात सामने आने के बाद एक बार फिर से ऐंटी रैगिंग ऐक्ट को लेकर चर्चाएं भी शुरू हो गई है।

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