fbpx
Now Reading:
क्या PM मोदी के आगे मजबूर है चुनाव आयोग ? निष्पक्षता पर बड़ा सवाल
Full Article 2 minutes read

क्या PM मोदी के आगे मजबूर है चुनाव आयोग ? निष्पक्षता पर बड़ा सवाल

PM मोदी मजबूर चुनाव आयोग

मुंबई: लोकसभा के आखिरी चरण के मतदान के पहले शुक्रवार शाम को चुनावी प्रचार ख़त्म हो गया. जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धार्मिक यात्रा पर जाने का फैसला लिया. जिसके लिए चुनाव आयोग ने हरी झंडी भी दी. लेकिन उनकी यात्रा से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय को याद दिलाया गया कि लोकसभा चुनाव 2019 के लिए लागू आदर्श आचार संहिता अभी भी प्रभावी है.

सवाल ये उठता है कि क्या पीएम मोदी अपनी धार्मिक यात्रा पर निकलने के लिए 48 घंटे का इंतज़ार नहीं कर सकते थे? क्या पीएमओ में ऐसा कोई भी सरकारी काम पेंडिंग नहीं था जिसे वो दो दिन में निपटा लेते और दो दिन बाद ये यात्रा शुरू की जाती? या फिर धार्मिक यात्रा एक चुनावी प्रचार का स्टंट है जिसका लाभ वो मतदान के पहले लेना चाहते हैं क्योंकि मतदान के बाद वो लाभ नहीं मिलेगा ?

केदारनाथ पीएम मोदी गुफा ध्यान

सभी जानते हैं कि पीएम जहां भी जाएंगे वहां मीडिया उन्हें दिनभर दिखाएगा सभी बड़े चैनलों पर लाइव पीएम का केदारनाथ दर्शन पूजा और गुफा में ध्यान दिखाया जा रहा है. क्या चुनावी प्रचार का एक माध्यम नहीं बन गया ? आधिकारिक यात्रा होने के नाते चुनाव आयोग ने पीएम की इस धार्मिक यात्रा पर रोक नहीं लगाई.

तो क्या ये मान लिया जाए कि चुनाव आयोग के पास इतना अधिकार नहीं है कि वो अपने विवेक से पीएम की आधिकारिक यात्रा और चुनावी प्रचार को समझकर रोक लगा सके? बहरहाल जिस राजनीतिक पार्टियों ने मंदिर में पूजा भजन को चुनावी प्रचार का माध्यम बना लिया है. ये एक बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है.

जब चुनाव आयोग ने किसी नेता पर बैन लगाया तब नेताजी मंदिर पहुंच जाते हैं और चुनाव आयोग मजबूर हो जाता है. क्योंकि किसी को मंदिर जाने से रोका नहीं जा सकता उनकी पूजा पाठ का सीधा प्रसारण दिखाने वाली मीडिया को भी नहीं रोका जा सकता.

तो ऐसे में चुनाव आयोग के लिए ये समझना बेहद जरुरी है कि वो ऐसी स्थिति में क्या करे? क्योंकि अगर इसी तरह होता रहा तो चुनाव आयोग की गरिमा धूमिल हो जाएगी और लोकतंत्र का मज़ाक बनकर रह जाएगा…

Input your search keywords and press Enter.