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सोनिया – प्रियंका गांधी को झटका देने वाली हैं अदिति सिंह, बहिष्कार के बाद भी विधानसभा सत्र में लिया हिस्सा
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सोनिया – प्रियंका गांधी को झटका देने वाली हैं अदिति सिंह, बहिष्कार के बाद भी विधानसभा सत्र में लिया हिस्सा

Aditi singh

उत्तर प्रदेश की रायबरेली सदर सीट से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह ने पार्टी को झटका देते हुए यूपी विधानसभा के विशेष सत्र में हिस्सा लिया और अपने विचार रखे. हालांकि उनकी पार्टी ने इस सत्र का बहिष्कार करने का एलान किया था. कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू ने मंगलवार को कहा था कि पार्टी के विधायक सदन का बहिष्कार करेंगे, लेकिन अदिति सिंह ने विधानसभा में भाषण दिया.

महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर बुधवार को शुरू हुआ यूपी विधानमंडल का विशेष सत्र 36 घंटे तक चलेगा. ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी खास अवसर पर सदन की कार्यवाही लगातार चलेगी. हालांकि विपक्ष ने इस सत्र के बहिष्कार का निर्णय लिया है.

सदन से बाहर निकलने के बाद उन्होंने कहा कि वह देशहित के मुद्दे पर पार्टी लाइन से हटकर चलती हैं. उन्होंने कहा, “मैंने अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले पर सरकार का स्वागत किया था. मेरे पिता ने जो मुझे सिखाया है, उस पर मैं अमल करती हूं.”

अदिति ने सतत विकास के लक्ष्य पर कहा कि वह दलगत भावना से ऊपर उठकर राष्ट्रपिता के सम्मान में सदन में आई हैं.

उन्होंने कहा कि वह “बचपन से बापू की कहानी सुनती आ रही हैं, लेकिन पंचायतीराज व्यवस्था का क्या हाल है? जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में खरीद-फरोख्त होती है.”

कौन हैं अदिति सिंह
2017 के यूपी विधानसभा चुनावों में अदिति सिंह ने 90 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज कराई थी. अदिति के पिता अखिलेश सिंह भी रायबरेली से 5 बार विधायक रह चुके हैं. अदिति की पढ़ाई अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी से हुई है. माना जाता है कि अदिति सिंह, प्रियंका वाड्रा की करीबी हैं. दिल्ली, मसूरी और फिर अमेरिका में पढ़ाई करने के बाद कारपोरेट करियर छोड़ कर राजनीति में आना उनका बड़ा कदम था.

अनुच्छेद 370 पर क्या बोलीं थीं अदिति
अदिति सिंह ने कहा था,”जो मेरा व्यक्तिगत ओपिनियन है इस पर वो मैंने बिल्कुल क्लियर कर दिया था कि ये जो धारा 370 बदलने के लिए जो बिल लाई गई है इसके मैं पूरे पक्ष में हूं. जो राज्यसभा में कल इंट्रोड्यूज भी किया गया था. मैं ये मानती हूं कि इससे देश की जो सुरक्षा व्यवस्था है, उस पर भी फर्क पड़ेगा, जम्मू कश्मीर को अधिक सुविधाएं मिल पाएंगी. और ये बहुत बड़ा हिस्टोरिक डिसिजन है, ये पार्टी लाइन से उपर उठ कर है. मैं सरकार का इस मुद्दे पर समर्थन करती हूं. इसको राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए.”

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