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फिर फुफकारे राज ठाकरे, नई शिक्षा नीति पर कहा- हम पर ना थोपें हिंदी और ना ही भड़काएं

फिर फुफकारे राज ठाकरे, नई शिक्षा नीति पर कहा- हम पर ना थोपें हिंदी और ना ही भड़काएं

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 के मसौदे पर हिंदी भाषा को लेकर देशभर में विरोध के सुर दिखाई दे रहे हैं. राष्ट्रिय शिक्षा नीति में प्रस्तावित त्रिभाषी फॉर्मूले के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होते हुए महाराष्ट्र नव-निर्माण सेना (एमएनएस) ने रविवार को इस बात पर जोर देते हुए कहा कि हिन्दी उनकी मातृभाषा नहीं है। एमएनएस के ऑफिशियल ट्वीटर हैंडल पर राज्य के नेता और प्रवक्ता अनिल शिंदोरे के हवाले से कहा गया- “हिंदी हमारी मातृभाषा नहीं है, इसे हम पर मत थोपिए और हमें मत भड़काइए।”

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मनसे से पहले, त्रिभाषी फॉर्मूले पर तमिलनाडु में बड़ा विवाद पैदा हो गया। वहां की राजनीतिक पार्टियों ने नई शिक्षा नीति के मसौदे पर चेतावनी देते हुए इसे जबरदस्ती हिन्दी थोपने का ‘प्रयास’ करार दिया। जबकि, केन्द्र ने साफ किया कि उनका इरादा किसी के ऊपर भाषा थोपना नहीं है।

हालांकि, जैसे ही इस पर बवाल बढ़ा केन्द्र इस मुद्दे पर लोगों की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी भाषा को किसी पर थोपने का कोई कदम नहीं उठाया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मीडिया से कहा- “नई शिक्षा नीति पर सिर्फ रिपोर्ट जमा की गई है।

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इस बारे में सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है। इस पर विचार भी नहीं किया गया है। इसलिए यह गलतफहमी की सरकार ने नई शिक्षा नीति पर फैसला लिया है, यह सच नहीं है।” बहरहाल इस मामले पर चर्चा शुरू हो गई है।

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