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Citizenship Amendment Bill के खिलाफ नॉर्थ-ईस्ट में उबाल, त्रिपुरा में दो महीने के बच्चे की मौत, मोबाइल इंटरनेट बंद
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Citizenship Amendment Bill के खिलाफ नॉर्थ-ईस्ट में उबाल, त्रिपुरा में दो महीने के बच्चे की मौत, मोबाइल इंटरनेट बंद

Citizenship Amendment Bill Protest

लोकसभा में पारित विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ छात्र संघों और वाम-लोकतांत्रिक संगठनों ने मंगलवार को पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन किया. इस दौरान सड़क अवरुद्ध होने के कारण अस्पताल ले जाते समय दो महीने के एक बीमार बच्चे की मौत हो गई.

राज्यसभा  में इस विधेयक को पेश किए जाने से ठीक पहले असम में इस विधेयक के खिलाफ दो छात्र संगठनों के राज्यव्यापी बंद के आह्वान के बाद ब्रह्मपुत्र घाटी में जनजीवन ठप रहा. ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू), नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन, वामपंथी संगठनों-एसएफआई, डीवाईएफआई, एडवा, एआईएसएफ और आइसा ने अलग से एक बंद आहूत किया.

गुवाहाटी के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जुलूस निकाले गए और प्रदर्शनकारियों ने इस विधेयक के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के पुतले भी जलाए.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि सचिवालय और विधानसभा की इमारतों के बाहर गुवाहाटी में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प भी हुई, क्योंकि पुलिस प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक रही थी. डिब्रूगढ़ जिले में बंद समर्थकों की झड़प सीआईएसएफ कर्मियों के साथ हुई. इनमें से तीन घायल हो गए, क्योंकि ये ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) के कर्मचारियों को कार्यालय में जाने से रोक रहे थे. सोनोवाल और राज्य के अन्य मंत्रियों के काफिलों का मार्ग मोड़ दिया गया, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने मुख्य मार्गों को अवरुद्ध कर दिया था.

रेलवे के एक प्रवक्ता ने बताया कि पूरे असम में ट्रेन सेवा प्रभावित रही, क्योंकि रेलवे की पटरियों पर अवरोधक लगाए गए थे. बंद को देखते हुए सभी पहले से तय परीक्षाओं की समय-सारणी बदल दी गई है. प्रदर्शनकारियों ने असम में भाजपा, असम गण परिषद के मुख्यालयों, दूरदर्शन केन्द्र और स्वास्थ्य मंत्री हिमंत विश्व सरमा की पत्नी के स्वामित्व वाले एक निजी टीवी चैनल के कार्यालय का घेराव किया.

गुवाहाटी में एक कार्यक्रम में सोनोवाल ने प्रदर्शनकारियों से ‘भ्रामक सूचना’ नहीं फैलाने और राज्य में अशांति पैदा करने से बचने के लिए कहा. इस बीच आसू के नेताओं ने मंगलवार की शाम कहा कि वे विवादास्पद विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे.

गैर-आदिवासी लोगों के मन में भय
त्रिपुरा में एनईएसओ द्वारा आहूत बंद में भाग लेने वाले प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को त्रिपुरा के धलाई जिले के एक बाजार में आग लगा दी. इस बाजार में ज्यादातर दुकानों के मालिक गैर-आदिवासी हैं. हालांकि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ. अधिकारी ने बताया, ‘बाजार में सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं, लेकिन इस घटना से गैर-आदिवासी लोगों के मन में भय है, जो ज्यादातर दुकानों के मालिक हैं.’

एक आधिकारिक सूचना में कहा गया है कि त्रिपुरा में शरारती तत्वों द्वारा अफवाहों को फैलाने से रोकने के लिए मंगलवार अपराह्र दो बजे से 48 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी गई है. पुलिस ने बताया कि सेपाहीजला जिले के बिश्रामगंज में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर वाहनों के आवागमन को अवरुद्ध कर दिया और इस कारण अस्पताल ले जाते समय एंबुलेंस सड़क पर फंसने के कारण दो महीने के एक बीमार बच्चे की मौत हो गई जबकि त्रिपुरा के तीन स्थानों पर 11 घंटे के बंद के दौरान झड़पों में लगभग 40 लोग घायल हो गये.

क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक
लोकसभा में सोमवार की रात इस विधेयक को सात घंटे से भी अधिक समय तक चली बहस के बाद पारित किया गया. नागरिकता संशोधन विधेयक में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए गैर मुस्लिम शरणार्थी – हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का पात्र बनाने का प्रावधान है.

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