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कोलकाता में BJP-TMC कोहराम जारी, BJP पर विद्यासागर की मूर्ति तोड़ने का आरोप
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कोलकाता में BJP-TMC कोहराम जारी, BJP पर विद्यासागर की मूर्ति तोड़ने का आरोप

कोलकाता BJP-TMC विद्यासागर मूर्ति
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के सियासी महाभारत में कोलकता कुरुक्षेत्र बना हुआ है. कोलकाता में BJP-TMC कोहराम जारी है. ममता बनर्जी ने विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने के खिलाफ बृहस्पतिवार को एक विरोध रैली की घोषणा भी की है. विद्यासागर की प्रतिमा गिराने के मुद्दे पर टीएमसी ने चुनाव आयोग से मुलाकात का समय मांगा है.

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान बवाल के बाद विवाद बढ़ता जा रहा है. रोड शो में हिंसा के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी पर समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ने का आरोप लगाया है. इस मामले के तूल पकड़ते ही सीएम ममता ने अपने ट्विटर की डीपी में अब विद्यासागर की फोटो लगा ली है.
विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने के खिलाफ विरोध रैली निकालेंगी ममता
विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने के खिलाफ बृहस्पतिवार को ममता बनर्जी ने एक विरोध रैली की घोषणा भी की है. बवाल के बाद कल ममता बनर्जी ने कहा था, ‘’बीजेपी के लोग इतने असभ्य हैं कि उन्होंने विद्यासागर की प्रतिमा तोड़ दी. वे सभी बाहरी लोग हैं. बीजेपी मतदान वाले दिन के लिए उन्हें लाई है.’’ इस दौरान ममता ने अमित शाह को ‘गुंडा’ बताया.
कोलकाता में अमित शाह के रोड शो में बवाल, कहीं हुई आगजनी तो कहीं पोस्टर फाड़े कुलमिलाकर बंगाल इस समय सियासी हिंसा की आग में जल रहा है बीजेपी और टीएमसी के बीच ना सिर्फ सत्ता के लिए युद्ध हो रहा है बल्कि दोनों ही दल एक दूसरे को बड़ा साबित करने में लगा हुआ है बीजेपी वहां अपनी जमीन तलाश रही है तो वहीं टीएमसी अपने वर्चस्व का दबदबा कायम रखना चाहती है. ऐसे में दोनों ही ये भूल गए हैं कि जनादेश जनता जनार्दन के हाथ होता है.
दरअसल मंगलवार को कोलकाता में अमित शाह का रोडशो हुआ. इस दौरान कोलकाता के विद्यासागर कॉलेज के अंदर से टीएमसी के कथित समर्थकों ने शाह के काफिले पर पथराव, किया जिससे दोनों पार्टियों के समर्थकों के बीच झड़प हुई. गुस्साए बीजेपी समर्थकों ने कॉलेज के गेट के बाहर टीएमसी प्रतिद्वंद्वियों के साथ मारपीट की. उन्होंने बाहर खड़ी कई मोटरसाइकलों को आग के हवाले कर दिया गया. इस हिंसा के दौरान ही ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा भी तोड़ दी गई.
कौन थे ईश्वर चंद्र विद्यासागर?
मशहूर बांग्ला लेखक और समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर बंगाल के पुनर्जागरण के स्तम्भों में से एक थे. इनका जन्म बंगाली ब्राह्मण परिवार में 26 सितम्बर 1820 को और निधन 29 जुलाई 1891 को हुआ था. इनके बचपन का नाम ईश्वर चन्द्र बन्दोपाध्याय था, लेकिन उनकी विद्वता के कारण ही उन्हें विद्यसागर की उपाधि दी गई थी. विद्यसागर नारी शिक्षा के समर्थक थे. उनकी कोशिशों से ही कलकत्ता और अन्य जगहों में बहुत ज्यादा बालिका विद्यालयों की स्थापना हुई थी. इतना ही नहीं इन्हीं की कोशिशों 1856 ई. में विधवा-पुनर्विवाह कानून पारित हुआ था. उन्होंने अपने इकलौते बेटे की शादी एक विधवा से की थी. उस दौर में उन्होंने बाल विवाह का भी विरोध किया था. इन्हें समाज सुधारक के रूप में राजा राममोहन राय का उत्तराधिकारी माना जाता है.
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