fbpx
Now Reading:
BSNL कैसे पहुंची कंगाली की कगार पर ? कर्मचारियों के वेतन पर अब भी लटकी तलवार

BSNL कैसे पहुंची कंगाली की कगार पर ? कर्मचारियों के वेतन पर अब भी लटकी तलवार

प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों का पोषण करते-करते देश की सरकारी टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर कंपनी BSNL कंगाली की कगार पर पहुंच गई है। कर्मचारी बकाए वेतन के लिए जब बिलखने लगे तब जाकर मामला प्रकाश में आया, हालांकि लोसभा चुनाव सर पर है इसलिए तुरंत सरकार ने महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) के 2300 कर्मचारियों की बकाया सैलरी के भुगतान के लिए 171 करोड़ रुपये जारी किए हैं। वहीं भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के मैनेजमेंट और कर्मचारी यूनियनों को होली से पहले 850 करोड़ रुपये जारी करने का वादा किया गया है।
दिल्ली और मुंबई में ऑपरेट करने वाली एमटीएनएल ने बुधवार से अपने कर्मचारियों को सैलरी बांटने का काम शुरू कर दिया है। एमटीएनएल के सैलरी खर्च को डीओटी पूरा करता है। अधिकारी ने बताया कि बीएसएनएल को 21 मार्च से पहले 850 करोड़ रुपये मिल जाएंगे, जिससे वह अपने के सैलरी और बकाया का भुगतान कर सकेगी। यानी होली के पहले बकाय वेतन सभी को मिल जाएगा। लेकिन कई ऐसे सवाल हैं जिसका जवाब अब तक नहीं मिला है और मिलना जरुरी है।

अभी तो चुनाव से पहले सरकार ने मदद कर दी है, बाद में वेतन कहाँ से आएगा ?

मजबूत आधारभूत ढांचा होने के बावजूद कैसे हिल गई BSNL की नींव ?

क्या कंपनी को घाटे में दिखाकर इसके निजीकरण की हो रही है तैयारी ?

दोनों कंपनियां, प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों से कस्टमर को वापस पाने के लिए जूझ रही हैं। दोनों कंपनियों के गठन के समय डीओटी ने भारी संख्या में इनमें सरकारी कर्मचारियों को ट्रांसफर किया था। एमटीएनएल में आमदनी के मुकाबले सैलरी का अनुपात बढ़कर 90 पर्सेंट तक पहुंच गया है। वहीं बीएसएनएल में यह करीब 67-70 पर्सेंट है। एमटीएनएल पर करीब 20,000 करोड़ का कर्ज है, जबकि उसकी सालाना आमदनी 2,700 करोड़ रुपये है। वहीं बीएसएनएल पर 13,000 करोड़ रुपये का कर्ज है, जबकि सालाना आमदनी 32,000 करोड़ है। यह भी अनुमान है कि अगले 5 से 6 सालों में एमटीएनएल के 16,000 कर्मचारी और बीएसएनएल के करीब आधे कर्मचारी रिटायर हो जाएंगे।
इस बीच दूरसंचार विभाग में फैसला लेने वाली सबसे बड़ी संस्था, डिजिटल कम्युनिकेशन आयोग ने दोनों कंपनियों से मुनाफे में आने के लिए रणनीति बताने को कहा है। आयोग ने इसके लिए उन्हें वित्तीय सहयोग देने का भी वादा किया है। दोनों कंपनियों ने मुनाफे में आने की अपनी रणनीति के तहत वित्तीय सहयोग, 4जी स्पेक्ट्रम के आवंटन और एसेट्स की बिक्री की मंजूरी मांगी थी। दोनों टेलिकॉम कंपनियों ने अपने लैंड असेट्स की बिक्री और कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) लाने की मंजूरी मांगी है।
हिंदुस्तान को बोलवाने वाला BSNL खमोशी की कगार पर …….
Input your search keywords and press Enter.