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महबूबा के बागवती बयान पर भड़के कुमार मुफ़्ती को लगाई कड़ी फटकार
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महबूबा के बागवती बयान पर भड़के कुमार मुफ़्ती को लगाई कड़ी फटकार

जम्मू कश्मीर में बंटवारे की राजनीति करने वाली महबूबा मुफ़्ती ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगलने वाला बयान ट्विट्टर पर जारी किया है, जिसपर कवी और पूर्व आप नेता कुमार विश्वास भड़क गए और उन्होंने फिसलती जुबान के साथ महबूबा को उनके अलगाववादी बयान के लिए कड़ी फटकार लगाई है। दरसल पुलवामा हमले के बाद उठी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 35A खत्म करने की बात पर सूबे की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती देश को बांटने वाला बयान दिया है। केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा कि ”आग से मत खेलो, अनुच्छेद-35A से छेड़छाड़ मत करो वरना 1947 से अब तक जो आपने नहीं देखा, वह देखोगे। यदि ऐसा होता है तो मुझे नहीं पता कि जम्मू-कश्मीर के लोग तिरंगा उठाने की बजाए कौन सा झंडा उठाएंगे। जिस के बाद महबूबा मुफ्ती के इस बयान पर तंज कसते हुए अपने ही अंदाज में कवि सम्राट कुमार विश्वास ट्वीट कर कहा कि ‘झंडा बिना डण्डे का थोड़े है बुआ 😡 सारे भतीजे फ़र्ज़ी नहीं होते ! ज़रा सँभाल कर 👎’

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आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर में 35A की वैधानिक मान्यता को चुनौती देने की कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में इसी हफ्ते सुनवाई करेगा। वहीं इसे लेकर एक दिन पहले जम्मू कश्मीर प्रशासन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में अपना स्टैंड साफ किया , जिसमें उन्होंने कहा कि आर्टिकल 35A पर सिर्फ चुनी हुई सरकार फैसला ले सकती है , इसके बाद उमर अब्दुल्ला ने केंद्र से कहा कि वे चुनाव कराएं ।

क्या है अनुच्छेद 35A

दरअसल, अनुच्छेद 35A, धारा 370 का हिस्सा है। यह अनुच्छेद जम्मू -कश्मीर की विधानसभा को राज्य के स्थायी नागरिक की परिभाषा तय करने का अधिकार देता है। इस अनुच्छेद की वजह से दूसरे राज्यों का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में ना तो संपत्ति खरीद सकता है और ना ही वहां का स्थायी नागरिक बनकर रह सकता है । साथ ही अगर कश्मीर की कोई लड़की बाहर शादी करती है तो उसे भी संपत्ति से हाथ धोना पड़ता है । सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में इस विशेषाधिकार को खत्म करने की मांग की गई है। यानी जम्मू कश्मीर को जिस वजह से विशेष दर्जा मिला हुआ है उसमें 35-ए का भी अहम योगदान है। अगरअनुच्छेद 35 A को खत्म हो जाएगा तो जम्मू कश्मीर में रोजगार भी पैदा होंगे जो इस समय वहां के युवाओं के लिए सबसे ज्यादा जरुरी भी है लेकिन अलगाववादी नेता हमेशा से ही इन्ही बेरोजगार युवाओं को इनके अधिकार से दूर रखकर ही अपना राजनीतिक लाभ उठाते रहे हैं।

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