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आजादी के बाद से अबतक पक्की सड़क को तरसते इस गांव ने किया, मतदान बहिष्कार का एलान

आजादी के बाद से अबतक पक्की सड़क को तरसते इस गांव ने किया, मतदान बहिष्कार का एलान

औरंगाबाद: आजादी के बाद से देश की तस्वीर बदली, तक़दीर बदली, सरकार बदली और देश ने तरक्की भी की, सभी सरकारें कई- कई हजार किमी सड़कें  बनवाने का दावा भी करतीं हैं। लेकिन आजादी के बाद से अब तक अगर कोई चीज नहीं बदली है तो वो है ये गांव और गांववालों का नसीब, ये आज भी पक्की सड़क का ख़्वाब पाले बैठे हैं। उदासीन सरकारों के रवैये से तंग आकर इसबार ग्रामीणों ने मतदान के बहिष्कार का एलान किया है।
महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के कविटखेड़ा गांव में पक्की सड़क नहीं है, गांव वालों का आरोप है कांग्रेस के साथ-साथ बीजेपी सरकार भी है जिम्मेदार। औरंगाबाद से 35 किलोमीटर की दूरी पर फुलंब्री तहसील के कविटखेड़ा हैबकी ग्राम वासियों को गांव में आने जाने के लिए अच्छा रास्ता नहीं है।
गांव की जनसंख्या 800 है ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सरकारी स्कूल सिर्फ चौथी कक्षा तक है। स्कुल की हालत भी ऐसी है कि देखकर आपको भी यकीं हो जाएगा कि यहां बच्चों को पढ़ाया नहीं जा सकता। आगे की पढ़ाई के लिए गांव के बच्चों को वड़ोद बाजार स्कूल में शिक्षा के लिए जाना पड़ता है, जो गांव से तकरीबन साढ़े 3 किलोमीटर दूरी पर है। लेकिन खराब सड़क के कारण बच्चे शहर के स्कुल नहीं जा पाते।
चांद को छूने का दावा करने वाले इस देश में इस गांव का किसान अब भी बैल गाडी पर या फिर कंधे पर लादकर कृषि उत्पाद बाजार या मंडी तक लेकर जाता है। गांव में पक्का रास्ता नहीं होने से उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ रहा है कृषि माल बैलगाड़ी से लेजाना पढ़ रहा है।
महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष का ग्रह क्षेत्र है 
महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागड़े, फुलंब्री तहसील के होने के बावजूद उनका कविटखेड़ा पर जरा भी ध्यान नहीं होने का आरोप ग्राम वासियों ने लगाया है।
गांव की महिलाओं का कहना 
खराब रास्ते के कारण गर्भवती महिलाओं को बहुत परेशानी होती है गांव का 3 किलोमीटर रास्ता तय करने के लिए एंबुलेंस को तकरीबन आधा घंटा लग जाता है।
आजादी के बाद से रास्ता नहीं होने की शिकायत गांव वासियों ने कहीं बार की लेकिन हर चुनाव के टाइम पर नेता आते हैं आश्वासन देते हैं और चले जाते हैं लेकिन गांव का विकास नहीं होता जिसको देखते हुए अब संपूर्ण गांव की और से चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया है।
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