fbpx
Now Reading:
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाकर आईपीएस अफसर ने क्यों कि ख़ुदकुशी ? पढ़िए पूरा सुसाइड नोट
Full Article 4 minutes read

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाकर आईपीएस अफसर ने क्यों कि ख़ुदकुशी ? पढ़िए पूरा सुसाइड नोट

कोलकाता: पश्चिम बंगाल कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक नए विवाद में फंस गई हैं। एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी गौरव चंद्र दत्त ने ख़ुदकुशी कर ली है और अपने सुसाइड नोट से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है। आईपीस अधिकारी गौरव चंद्र दत्त का जो सुसाइड नोट पुलिस के हाँथ लगा है उसमे उन्होंने मुख्यमंत्री पर कई संगीन आरोप लगाए हैं। रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी गौरव चंद्र दत्त ने अपने ख़ुदकुशी के लिए सीधे तौर पर सीएम को जिम्मेदार ठहराया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी ने मुख्यमंत्री मांटक बनर्जी पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए लिखा कि, ‘मुख्यमंत्री ने मेरे दो लंबित मामलों में कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। एक केस में पश्चिम बंगाल सरकार ने जानबूझकर मामले से जुड़ी फाइल को खो दिया। जबकि दूसरे मामले में डीजी के समझाने पर भी केस को बंद कर दिया।’

अपने सुसाइड नोट में पूर्व आईपीएस अधिकारी गौरव चंद्र ने लिखा कि नौकरशाही की तरफ से मेरे साथ भेदभाव हुआ। मुझे डेपुटेशन और किसी भी पुलिस ट्रेनिंग कोर्स में भी नहीं भेजा गया। इतना ही नहीं, मेरे पासपोर्ट का नवीनीकरण भी नहीं होने दिया गया। मैं कई वरिष्ठ अधिकारियों से मिला। उनके सामने अपनी समस्याएं रखीं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। समारोह से उनका नाम काट दिया गया।

अधिकारी ने अपने सुसाइड नोट में कई बार प्रदेश सरकार के सचिव गौतम सानियाल से मिलने की भी कोशिश की। लेकिन हर बार उन्हें मिलने से इनकार कर दिया। गौरव चंद्र दत्त ने राज्य सरकार पर प्रोविडेंट फंड और अन्य राशि रोकने का आरोप भी लगाया। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि मुख्यमंत्री ने मेरी ग्रेचुएटी के 30 लाख, अर्जित अवकाश के 17 लाख और अन्य देय राशि के 25 लाख रुपये रोक लिए हैं। दत्त के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में वो कई बार दिल्ली गए और गृह मंत्रालय में अपनी व्यथा भी रखी। लेकिन वहां से भी उन्हें मायूसी हाथ लगी।

उन्होंने आरोप लगाया, मुख्यमंत्री जो चाहते हैं उन्हीं का बोलबाला है। जो मुख्यमंत्री के चेहते हैं और उन्हें लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। दत्त ने सुसाइड नोट में लिखा कि, ‘गृह विभाग, पुलिस डायरेक्टर और विजिलेंस आयोग ने मुझे प्रताड़ित करने की पूरी कोशिश की। पेंशन से संबंधित मेरे कागजात में देरी की गई। मेरी अनदेखी के साथ-साथ मेरा अपमान किया गया। जिसके चलते मैं पूरी तरह टूट गया और आखिर में मैंने हार मान ली।

रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी ने आईपीएस लॉबी पर सवाल उठाते हुए लिखा कि, ‘जब मैं मुश्किल में था मैंने कई लोगों से बात कि लेकिन कोई भी मेरी मदद के लिए नहीं आया।मानों सभी ने सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और सर्कार और उनके लोग सिर्फ मुझसे ही दुश्मनी निभा रही हो, तो अधिकारी भी सरकार की लाइन पर चलने लगते हैं और आपके साथ गली के कुत्ते की तरह व्यवहार करते हैं।

उन्होंने लिखा कि, ‘मैं यहां उन किसी अधिकारियों का नाम नहीं लिख रहा हूं, जिन्होंने पिछले 10 साल मेरा अपमान किया। मुझे प्रताड़ित करके अधिकारी सीएम को खुश करते थे और कुछ लाभ हासिल करते थे। सभी मित्रों, सामाजिक परिचितों और शुभचिंतकों ने मुझे त्याग दिया। 33 साल के करियर में ये मेरी सबसे बड़ी असफलता थी, क्योंकि मेरे माता-पिता ने मुझे चाटुकारिता से दूर रखा था’।

दत्त ने अपने सुसाइट नोट में ये भी लिखा कि, ‘मेरे से इस बड़े कदम के बाद सरकार मेरी बचत के पैसे जारी करने के लिए मजबूर होगी और उन पैसों से मेरा परिवार सम्मान के साथ रह सकेगा। अपने सुसाइट नोट में दत्त ने लिखा कि, मैंने पश्चिम बंगाल और भारत के अन्य हिस्सों में रह रहे ईमानदार अफसरों के सामने आने वाली समस्याओं को उजागर करने के लिए कठोर कदम उठाने का फैसला लिया है। अगर एक ईमानदार अधिकारी सम्मान से जी नहीं सकता, तो उसके लिए बेहतर है कि वो सम्मान से मर जाए।

सुसाइड नोट में लिखा है कि, पश्चिम बंगाल में कोई भी आईपीएस अधिकारी अपनी बात खुलकर नहीं रख सकता। अधिकारी डरे हुए हैं कि, कहीं, उन्हे सत्ताधारी पार्टी के गुस्सा का सामना ना करना पड़े। सभी एक तरह से कैदी हैं, किसी को भी डेपुटेशन पर नहीं भेजा जा रहा है।

Input your search keywords and press Enter.