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बीपीएल चयन प्रक्रिया की जांच कैसे करें

जिस देश की 37 फीसदी से ज़्यादा आबादी ग़रीब हो, वहां यह ज़रूरी हो जाता है कि ग़रीबी से जुड़ी योजनाओं को ईमानदारी से लागू किया जाए, लेकिन व्यवहार में अब तक यही देखने को मिला है कि ग़रीबों के विकास के लिए बनाई गईं लगभग सभी योजनाओं में भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है. इस अंक में हम एक ऐसे ही मसले पर बात कर रहे हैं, जो सीधे-सीधे ग़रीबों के अधिकारों और उनके विकास से जुड़ा हुआ है यानी बीपीएल सूची, जिसके आधार पर ग़रीबों को बहुत सी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकता है. ज़ाहिर है, सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए बहुत से लोग किसी भी प्रकार अपना नाम बीपीएल सूची में शामिल करा लेते हैं. नतीजतन, जो ज़रूरतमंद लोग हैं और जिन्हें वाकई सरकारी मदद की ज़रूरत होती है, वे इससे वंचित रह जाते हैं. इस अंक में एक ऐसा ही आवेदन प्रकाशित किया जा रहा है, जिसके इस्तेमाल से आप बीपीएल सूची में पारदर्शिता बनाने का दबाव डाल सकते हैं और साथ ही सूची तैयार करते व़क्त इसमें होने वाली गड़बड़ियों को पकड़ सकते हैं या उसका खुलासा कर सकते हैं. हम उम्मीद करते हैं कि आप इस आवेदन का इस्तेमाल ज़रूर करेंगे और अन्य लोगों को भी इसके लिए उत्साहित करेंगे.

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पाठकों के पत्र

आवेदन लंबित है

मैंने एक आवेदन शिक्षा निदेशक, उत्तर प्रदेश को भेजा था, जो अब तक लंबित पड़ा हुआ है. मेरी अपील पर भी कोई निर्णय नहीं आया है, जबकि काफी समय बीत चुका है. आख़िर मेरे मामले का निष्पादन क्यों नहीं हो रहा है?

– आर एच नकवी, अमरोहा, उत्तर प्रदेश.

अगर आपने तय समय सीमा के भीतर प्रथम अपील कर दी है और प्रथम अपील के निष्पादन के लिए तय समय सीमा के भीतर सुनवाई नहीं हुई है तो आपको सूचना का अधिकार क़ानून, 2005 के नियमों के तहत द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग में कर देनी चाहिए.

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समाजसेवी बनना चाहता हूं

सूचना अधिकार क़ानून को लेकर चौथी दुनिया की पहल जनता को बहुत जागरूक कर रही है. मैं भी एक समाज सेवक के रूप में काम करना चाहता हूं. कृपया मुझे इस संबंध में कुछ सलाह दें.

– रंजय कुमार, नवादा, बिहार.

यह ख़ुशी की बात है कि आप समाजसेवा करना चाहते हैं और वह भी आरटीआई का इस्तेमाल करके. आप अगर नियमित रूप से चौथी दुनिया में प्रकाशित इस स्तंभ को पढ़ते रहें तो आपको इस क़ानून से जुड़ी लगभग अधिकांश सामग्री मिल जाएगी. वैसे आप जब चाहें, हम आपको इस क़ानून से जुड़े विभिन्न मुद्दों और समस्याओं पर सलाह देने के लिए हमेशा तैयार हैं.

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द्वितीय अपील के बाद क्या करूं

मेरे मामले में केंद्रीय सूचना आयोग ने जो निर्णय दिया, वह मेरे हिसाब से पक्षपातपूर्ण है. इसके अलावा पीआईओ ने आयोग के आदेश के बाद भी सूचना उपलब्ध नहीं कराई. अगर द्वितीय अपील के बाद भी न्याय न मिले, तो क्या करना चाहिए?

– एस आर के मिश्रा, धनबाद, बिहार.

सूचना क़ानून के तहत अगर द्वितीय अपील/शिक़ायत के बाद भी सूचना नहीं मिलती है तो इसके बद स़िर्फ न्यायालय का रास्ता ही बचता है. आप यदि उक्त निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं और अगर निर्णय के बाद भी आपको सूचना नहीं मिली है, तो आप अपना यह मामला उच्च न्यायालय में ले जा सकते हैं.

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