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दिल्‍ली का बाबूः जयंती और जंगल में सुधार
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दिल्‍ली का बाबूः जयंती और जंगल में सुधार

वन एवं पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन को मंत्रालय संभाले अभी करीब दो महीने हुए हैं, लेकिन उन्होंने विभाग के भ्रष्ट बाबुओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी. उन्होंने इस बीच तीन वरिष्ठ वन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की. वन विभाग के महानिरीक्षक सी डी सिंह, जो वन सलाहकार समिति (एफएसी) में भी थे, का तबादला कर दिया गया. हिमाचल प्रदेश में हाईडिल पावर के लिए क्लीयरेंस देने में गड़बड़ी करने वाले दो अन्य बाबुओं का भी स्थानांतरण किया गया. इन तीनों पर विजिलेंस की जांच चल रही है. वन विभाग के महानिरीक्षक सी डी सिंह के पहले भोपाल के मुख्य वन संरक्षक आर के रैना का भी स्थानांतरण किया गया था, क्योंकि उन्होंने नियमों की अवहेलना की थी. जयंती नटराजन का काम सराहनीय है, इससे जंगल में चल रहे जंगलराज पर रोक लगेगी, साथ ही अन्य विभागों में काम करने वाले अधिकारियों को भी सबक मिलेगा.

प्रतिस्पर्द्धा आयोग की परेशानी

भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग के नियामक के लिए कठिन समय चल रहा है. इसका गठन 2003 में किया गया था, लेकिन 2009 तक यह पूरी तरह काम नहीं कर सका. हाल के कुछ सप्ताहों से कुछ चर्चित मामलों पर विवादास्पद निर्णय के कारण यह फिर से चर्चा में है. इस विभाग में जितने कर्मचारियों की आवश्यकता है, उसमें लगभग आधे पद खाली पड़े हैं. यही नहीं, इस विभाग के अध्यक्ष धनेंद्र कुमार भी विगत जून माह में सेवानिवृत्त हो गए, लेकिन न तो अभी तक किसी को अध्यक्ष नियुक्त किया गया और न कर्मचारियों को. सूत्रों के अनुसार, कंपनी मामलों के मंत्रालय ने पूर्व वित्त सचिव अशोक चावला का नाम इसके अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित किया था, लेकिन आयोग के सदस्यों की असहमति के कारण इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. चावला अभी प्राकृतिक गैस वितरण करने वाली समिति के प्रमुख के रूप में काम कर रहे हैं.

उत्तर प्रदेश के बाबुओं का दु:ख

मायावती की सरकार में बाबुओं के लिए वरिष्ठता कोई मायने नहीं रखती है. वहां तो उनकी मर्जी ही चलती है. उत्तर प्रदेश के बाबुओं के बीच इस बात की चर्चा हो रही है कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रोमिला शंकर को निलंबित कर दिया गया है. प्रोमिला शंकर उत्तर प्रदेश के निवर्तमान मुख्य सचिव अनूप मिश्रा से भी वरिष्ठ हैं. 1976 बैच की आईएएस अधिकारी प्रोमिला गत माह सरकार से अनुमति लिए बिना कोलंबो चली गई थीं. उन्हें निलंबित करने का कारण फिलहाल यही बताया गया है, लेकिन इसके पीछे असल कारण कुछ और है. कुछ लोगों का कहना है कि प्रोमिला को मायावती की अवहेलना करने की कीमत चुकानी पड़ी. उन्होंने मायावती की शहरी सुधार संबंधी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का विरोध किया था, जिसमें यमुना एक्सप्रेस-वे भी शामिल है. इन परियोजनाओं के विरुद्ध ही किसानों का आंदोलन चल रहा है, लेकिन मायावती की तो माया ही निराली है. वह अपनी बात मनवाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहती हैं.

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