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शार्क करेगी इलाज
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शार्क करेगी इलाज

शार्क बहुत आदिम जंतु है लेकिन उसके बदन से एक ऐसा परिष्कृत पदार्थ पैदा होता है, जिसमें हेपेटाइटिस से लेकर बुखार तक के वायरस से लड़ने की क्षमता मौजूद है. स्न्वैलेमीन नामक यह यौगिक पदार्थ 1993 में खोजा गया था, लेकिन नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस में प्रकाशित एक अध्ययन में पहली बार मानवीय वायरस से लड़ने में इसके संभावित उपयोग की जांच की गई है. शोधकर्ताओं ने डॉगफिश शार्क के लीवर से तैयार स्कवैलेमीन का अध्ययन किया और पाया कि यह वायरल संक्रमण को रोक सकता है या उस पर कंट्रोल कर सकता है. कुछ मामलों में तो यह जानवरों की बीमारियां दूर करते हुए दिखा. इस परियोजना की शुरुआत तब हुई, जब मुख्य रिसर्चर माइकल जासलॉफ, जो जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में सर्जरी और पेड्रियाटिक्स के प्रोफेसर हैं, ने स्न्वैलेमीन के नमूने पूरे अमेरिका में टेस्ट के लिए भेजे. 1995 में स्न्वैलेमीन को प्रयोगशाला में बनाना शुरू किया गया था, तबसे वह सीधे शार्क के टिश्यू से नहीं निकाला जाता.

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शोध में कहा गया है कि टिश्यू के गुण दिखाते हैं कि वह इंसानी ख़ून में डेंगू वायरस और इंसानी लीवर की कोशिकाओं में हेपेटाइटिस बी और डी के संक्रमण को रोकता है. जानवरों पर किए गए शोध से पता चला है कि यौगिक पदार्थ पीत ज्वर, ईस्टर्न इक्वीन इंसेफ्लाइटिस वायरस और हर्पीस वायरस के एक प्रकार मूरीन साइटोमेगालो वायरस पर नियंत्रण करता है. जासलॉफ कहते हैं, यह निश्चित तौर पर संभावनाओं वाला ड्रग है और यह असर की प्रक्रिया और रासायनिक संरचना में अन्य दूसरे तत्वों से अलग है, जिनकी इस समय वायरल इंफेक्शन के इलाज के लिए जांच चल रही है. वह कहते हैं, हमने अभी तक किसी भी जानवर में, जिन पर अध्ययन किया गया है, स्न्वैलेमीन का डोज तय नहीं किया है. हम अभी तक नहीं जानते कि इलाज में उन्हें अधिकतम लाभ कितना हो सकता है. जासलॉफ का कहना है कि उनकी टीम को एंटी वायरल एजेंट के रूप में स्न्वैलेमीन की उपयोगिता पर पूरा भरोसा है और अब वह इसका प्रयोग इंसानों पर भी करना चाहते हैं. स्न्वैलेमीन इंसानों के लिए सुरक्षित है और इसे कैंसर एवं नेत्र रोग के उपचार के लिए संभावित दवा समझा गया है. इस समय कुछ लोगों पर इसका क्लीनिकल ट्रायल भी चल रहा है. जासलॉफ ने कहा कि पहले के कई ट्रायलों में स्न्वैलेमीन ने महत्वपूर्ण और आशाजनक परिणाम दिए हैं, कैंसर के  कुछ रूपों और डायबेटिक रेटेनोपैथी में भी. स्न्वैलेमीन की खोज 1993 में प्रो. जासलॉफ ने ही की थी. उन्हें मेंढक की खाल के प्राकृतिक एंटीबायटिक गुणों की खोज के लिए भी जाना जाता है.

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