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सूचना शुल्क क्या और कितना
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सूचना शुल्क क्या और कितना

सूचना का अधिकार क़ानून के तहत सूचना और आवेदन के बदले पैसा लिए जाने का प्रावधान है, लेकिन इसी प्रावधान का बेजा इस्तेमाल करके कई बार लोक सूचना अधिकारी आवेदकों को परेशान भी करते हैं. सूचना का अधिकार क़ानून के तहत जब आवेदक कोई सूचना मांगता है तो सूचना के बदले पैसा मांगा जाता है. हालांकि सूचना के बदले पैसे की बात क़ानून में है ज़रूर, लेकिन यह भी देखा गया है कि कई लोक सूचना अधिकारी लाखों रुपये बतौर सूचना शुल्क जमा कराने के लिए आवेदक से कहते हैं. कई बार तो ग़रीबी रेखा से नीचे वाले यानी बीपीएल कार्डधारक आवेदकों से भी सूचना शुल्क की मांग की जाती है. इतना ही नहीं, तीस दिन समाप्त हो जाने के बाद भी सूचना शुल्क देने को कहा जाता है, जबकि क़ानून में स्पष्ट उल्लेख है कि आवेदक बीपीएल कार्डधारक हो या तीस दिन समाप्त हो चुके हों, पीआईओ को सारी सूचना मुफ्त देनी होगी, भले ही वह सूचना सैकड़ों पृष्ठों की क्यों न हो.

आवेदक को यह भी पता होना चाहिए कि सूचना क़ानून के प्रावधानों के मुताबिक़, अगर लोक सूचना अधिकारी मांगी गई सूचना तय समय सीमा के अंदर (30 दिन या जो भी अन्य समय सीमा हो) उपलब्ध नहीं कराता है तो वह आवेदक से सूचना के लिए कोई शुल्क नहीं मांग सकता. ऐसे में आवेदक को जब भी सूचना दी जाएगी, वह बिना कोई शुल्क लिए दी जाएगी.

कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें लोक सूचना अधिकारी ने आवेदक से सूचना के बदले 70 लाख रुपये तक जमा कराने को कहा है. कई बार तो यह भी कहा जाता है कि अमुक सूचना काफी बड़ी है और इसे एकत्र करने के लिए एक या दो कर्मचारी को एक सप्ताह तक काम करना पड़ेगा, इसलिए उनका एक सप्ताह का वेतन आपको देना होगा. ज़ाहिर है, सूचना न देने के लिए सरकारी बाबू इस तरह का हथकंडा अपनाते हैं. ऐसी हालत में यह ज़रूरी है कि आरटीआई आवेदक को सूचना शुल्क से संबंधित क़ानून के बारे में सही और पूरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि कोई लोक सूचना अधिकारी उसे बेवजह परेशान न कर सके. इस अंक में हम आपको आरटीआई आवेदन शुल्क और सूचना के बदले दिए जाने वाले शुल्क के बारे में बता रहे हैं. यह सही बात है कि सूचना क़ानून की धारा 7 में सूचना के बदले शुल्क की व्यवस्था है, लेकिन इसी धारा की उपधारा 1 में लिखा है कि यह शुल्क सरकार द्वारा निर्धारित किया जाएगा. इस व्यवस्था के तहत सरकारों को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने विभिन्न विभागों में सूचना के अधिकार के तहत अदा किए जाने वाले शुल्क आदि तय करेंगी.

केंद्र और राज्य सरकारों ने इस अधिकार के तहत अपने-अपने यहां शुल्क नियमावली बनाई है और उसमें स्पष्ट किया गया है कि आवेदन करने से लेकर फोटोकॉपी आदि के लिए कितना-कितना शुल्क लिया जाएगा. धारा 7 की उपधारा 3 में लोक सूचना अधिकारी की ज़िम्मेदारी बताई गई है कि वह सरकार द्वारा तय किए गए शुल्क के आधार पर गणना करते हुए आवेदक को बताएगा कि उसे सूचना लेने के लिए कितना शुल्क देना होगा. उपधारा 3 में लिखा गया है कि यह शुल्क वही होगा, जो उपधारा 1 में सरकार द्वारा तय किया गया होगा. देश के सभी राज्यों और केंद्र सरकार ने शुल्क नियमावली बनाई है और इसमें आवेदन के लिए कहीं 10 रुपये शुल्क रखा गया है तो कहीं 50 रुपये. इसी तरह दस्तावेज़ों की फोटोकॉपी लेने के लिए भी 2 से 5 रुपये तक शुल्क अलग-अलग राज्यों में लिया जाता है. दस्तावेज़ों एवं काम के निरीक्षण और सीडी-फ्लॉपी में सूचना लेने के लिए भी शुल्क इन नियमावलियों में बताया गया है. धारा 7 की उपधारा 3 कहती है कि लोक सूचना अधिकारी यह गणना करेगा कि आवेदक ने जो सूचना मांगी है, वह कितने पृष्ठों में है या कितनी सीडी-फ्लॉपी आदि में है. इसके बाद लोक सूचना अधिकारी सरकारी नियमावली में बताई गई दर से यह गणना करेगा कि आवेदक को सूचना लेने के लिए कुल कितनी राशि जमा करानी होगी. इसके लिए किसी लोक सूचना अधिकारी को यह अधिकार कतई नहीं दिया गया है कि वह मनमाने तरीक़े से शुल्क की गणना करे और आवेदक पर मोटी रकम जमा कराने के लिए दबाव डाले. यदि लोक सूचना अधिकारी मनमाने तरीक़े से या सरकार द्वारा तय शुल्क के अतिरिक्त कोई शुल्क आवेदक से मांगते हैं तो वह ग़ैर क़ानूनी है.

इसी के साथ आवेदक को यह भी पता होना चाहिए कि सूचना क़ानून के प्रावधानों के मुताबिक़, अगर लोक सूचना अधिकारी मांगी गई सूचना तय समय सीमा के अंदर (30 दिन या जो भी अन्य समय सीमा हो) उपलब्ध नहीं कराता है तो वह आवेदक से सूचना के लिए कोई शुल्क नहीं मांग सकता. ऐसे में आवेदक को जब भी सूचना दी जाएगी, वह बिना कोई शुल्क लिए दी जाएगी. आवेदक को यह हमेशा याद रखना होगा कि लोक सूचना अधिकारी या कोई भी अन्य सरकारी कर्मचारी आम आदमी द्वारा दिए गए टैक्स से वेतन लेने वाला व्यक्ति है. उसे यह वेतन दिया ही इसलिए जाता है कि वह आम आदमी के लिए बनाए गए विभिन्न क़ानूनों का पालन करते हुए कार्य करे. हमें उम्मीद है कि आप सभी पाठकों के लिए यह जानकारी काफी मददगार साबित होगी और आप लोग जमकर आरटीआई क़ानून का इस्तेमाल करते रहेंगे.

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